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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

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तुम्हारी महिमा नहीं समाती. तुम आकाश से जल की वर्षा करो और हमारे लिए गाएं दो. (८) आश्रुत्कर्ण श्रुधी हवं नू चिद्दधिष्व मे गिरः. इन्द्र स्तोममिमं मम कृष्वा युजश्चिदन्तरम्.. (९) हे इंद्र! तुम्हारे दोनों कान चारों ओर की बात सुनने वाले हैं, इसलिए हमारी पुकार जल्दी सुनो. हमारी स्तुतियों को अपने मन में स्थान दो. जिस प्रकार मित्र की बातें स्मरण रहती हैं, उसी प्रकार हमारी ये स्तुतियां भी अपने पास रखो. (९) विद्या हि त्वा वृषन्तमं वाजेषु हवनश्रुतम्. वृषन्तमस्य हूमह ऊतिं सहस्रसातमाम्.. (१०) हे इंद्र! हम तुम्हें जानते हैं कि तुम मनचाही वर्षा करते हो तथा युद्धस्थल में हमारी प्रार्थना सुनते हो. तुम समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले हो. हम हजारों प्रकार के धन देने वाली तुम्हारी रक्षा का आह्वान करते हैं. (१०) आ तू न इन्द्र कौशिक मन्दसानः सुतं पिब. नव्यमायुः प्र सू तिर कृधी सहस्रसामृषिम्.. (११) हे इंद्र! तुम हमारे पास शीघ्र आओ. हे कुशिक ऋषि के पुत्र! प्रसन्न होकर सोमपान करो, देवताओं द्वारा प्रशंसनीय यज्ञकर्म करने के लिए हमारा जीवन बढ़ाओ एवं मुझ ऋषि को हजारों धन वाला बनाओ. (११) परि त्वा गिर्वणो गिर इमा भवन्तु विश्वतः. वृद्धायुमनु वृद्धयो जुष्टा भवन्तु जुष्टयः.. (१२) हे हमारी स्तुतियों के विषय इंद्र! हमारी ये स्तुतियां सब ओर से तुम्हारे पास पहुंचें. चिर आयु वाले तुम्हारा अनुगमन करके ये स्तुतियां वृद्धि प्राप्त करें. ये स्तुतियां तुम्हें संतुष्ट करके हमारे लिए प्रसन्नता प्रदान करें. (१२) सूक्त—११ देवता—इंद्र इन्द्रं विश्वा अवीवृधन्त्समुद्रव्यचसं गिरः. रथीतमं रथीनां वाजानां सत्पतिं पतिम्.. (१) सागर के समान विस्तृत रथ के स्वामियों में श्रेष्ठ, अन्यों के स्वामी एवं सबके पालक इंद्र को हमारी स्तुतियों ने बढ़ाया था. (१) सख्ये त इन्द्र वाजिनो मा भेम शवसस्पते. त्वामभि प्र णोनुमो जेतारमपराजितम्.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*