BharatKosha
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 178 of 1855

Read in context
Page 178

हे मनुष्यों के स्वामी इंद्र! मुझ पुरोहित की रक्षा के लिए मेरी पुकार सुनो. (२) अनुकामं तर्पयेथामिन्द्रावरुण राय आ. ता वां नेदिष्ठमीमहे.. (३) हे इंद्र और वरुण! हमारी अभिलाषा के अनुसार धन देकर हमें तृप्त करो. हम तुम्हारा सामीप्य चाहते हैं. (३) युवाकु हि शचीनां युवाकु सुमतीनाम्. भूयाम वाजदाव्नाम्.. (४) हम बल और सुबुद्धि की इच्छा से तुम्हें चाहते हैं. हम श्रेष्ठ अन्नदाता हों. (४) इन्द्रः सहस्रदाव्नां वरुणः शंस्यानाम्. क्रतुर्भवत्युकथ्यः.. (५) सहस्रों धनदाताओं में इंद्र एवं स्तुति ग्रहणकर्त्ताओं में वरुण श्रेष्ठ हैं. (५) तयोरिदवसा वयं सनेम नि च धीमहि. स्यादुत प्ररेचनम्.. (६) इंद्र और वरुण की रक्षा से हम धन प्राप्त करके उसका उपयोग करें. हमारे पास पर्याप्त धन हो. (६) इन्द्रावरुण वामहं हुवे चित्राय राधसे. अस्मान्त्सु जिग्युषस्कृतम्.. (७) हे इंद्र और वरुण! विचित्र धनों को पाने के लिए मैं तुम्हें बुलाता हूं. तुम हमें भली-भांति विजय दिलाओ. (७) इन्द्रावरुण नू नु वां सिषासन्तीषु धीष्वा. अस्मभ्यं शर्म यच्छतम्.. (८) हे इंद्र और वरुण! हमारा मन तुम्हारी उत्तम सेवा का अभिलाषी है. तुम हमें सुख दो. (८) प्र वामश्रोतु सुष्टुतिरिन्द्रावरुण यां हुवे. यामृधाथे सधस्तुतिम्.. (९) हे इंद्र और वरुण! जिस स्तुति से हम तुम्हें बुलाते हैं और जिस शोभन स्तुति को तुम स्वीकार करते हो, हमारी वही सुंदर स्तुति तुम्हें प्राप्त हो. (९) सूक्त—१८ देवता—ब्रह्मणस्पति आदि सोमानं स्वरणं कृणुहि ब्रह्मणस्पते. कक्षीवन्तं य औशिजः.. (१) हे ब्रह्मणस्पति! तुमने जिस प्रकार उशिज के पुत्र कक्षीवान् को प्रसिद्ध किया था, उसी प्रकार सोमरस देने वाले यजमान को भी देवताओं में प्रसिद्ध करो. (१) ebook converter DEMO Watermarks*