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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 181 of 1855

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मरुद्गणों के साथ आओ. (९) सूक्त—२० देवता—ऋभुगण अयं देवाय जन्मने स्तोमो विप्रेभिरासया. अकारि रत्नधातमः.. (१) जिन ऋभुओं ने जन्म धारण किया था, उन्हीं को लक्ष्य करके बुद्धिमान् ऋत्विजों ने पर्याप्त धन देने वाला यह स्तोत्र अपने मुख से उच्चारण किया. (१) य इन्द्राय वचोयुजा ततक्षुर्मनसा हरी. शमीभिर्यज्ञमाशत.. (२) जिन ऋभुओं ने इंद्र को प्रसन्न करने के लिए अपने मन से ऐसे घोड़े बनाए हैं, जो आज्ञा पाते ही रथ में जुत जाते हैं. वे ही शमी वृक्ष से निर्मित चमस आदि लेकर इस यज्ञ में आवें. (२) तक्षन्नासत्याभ्यां परिज्मानं सुखं रथम्. तक्षन्धेनुं सबर्दुघाम्.. (३) ऋभुओं ने दोनों अश्विनीकुमारों के लिए रथ बनाया, जिसकी गति सर्वत्र समान थी तथा उन्होंने दूध देने वाली एक गाय उत्पन्न की. (३) युवाना पितरा पुनः सत्यमन्त्रा ऋजूयवः. ऋभवो विष्ट्यक्रत.. (४) छलरहित और सर्वकार्यसाधक ऋभुओं के मंत्र सदा सफलता प्राप्त करते हैं. उन्होंने अपने माता-पिता को दोबारा युवा बना दिया था. (४) सं वो मदासो अग्मतेन्द्रेण च मरुत्वता. आदित्येभिश्च राजभिः.. (५) हे ऋभुगण! मरुद्गण सहित इंद्र और प्रकाशमान सूर्य के साथ तुम्हें सोमरस दिया जा रहा है. (५) उत त्यं चमसं नवं त्वष्टुर्देवस्य निष्कृतम्. अकर्त चतुरः पुनः.. (६) त्वष्टा द्वारा निर्मित, सोमधारण में समर्थ चमस नाम का नया काष्ठपात्र बिलकुल तैयार हो गया था. ऋभुओं ने उसके चार टुकड़े कर दिए. (६) ते नो रत्नानि धत्तन त्रिरा साप्तानि सुन्वते. एकमेकं सुशस्तिभिः.. (७) हे ऋभुगण! तुम हमारी सुंदर स्तुतियों को सुनकर सोमरस निचोड़ने वाले हमारे यजमान को एक-एक करके स्वर्ण, मणि, मुक्ता—तीनों रत्न प्रदान करो. तुम दर्शपौर्णिमासादि सात कर्मों के तीनों वर्गों को पूरा करो. (७) ebook converter DEMO Watermarks*

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