BharatKosha
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 182 of 1855

Read in context
Page 182

अधारयन्त वह्नयोऽभजन्त सुकृत्यया. भागं देवेषु यज्ञियम्.. (८) यज्ञ के लिए उपयोगी चमस आदि का निर्माण करने के कारण ऋभुगण मरणधर्मा होने पर भी अमर बन गए हैं. वे अपने सत्कर्मों के कारण देवों के मध्य बैठकर यज्ञ का भाग प्राप्त करते हैं. (८) सूक्त—२१ देवता—इंद्र एवं अग्नि इहेन्द्राग्नी उप ह्वये तयोरित्स्तोममुशमसि. ता सोमं सोमपातमा.. (१) मैं इस यज्ञ में इंद्र और अग्नि को बुलाता हूं एवं इन्हीं दोनों की स्तुति करने की इच्छा रखता हूं. सोमपान करने के अत्यंत इच्छुक वे दोनों सोमरस पिएं. (१) ता यज्ञेषु प्र शंसतेन्द्राग्नी शुम्भता नर:. ता गायत्रेषु गायत.. (२) हे मनुष्यो! इस यज्ञ में उन्हीं इंद्र और अग्नि की प्रशंसा करो एवं उन्हें अनेक प्रकार से सुशोभित करो. गायत्री छंद का सहारा लेकर उन्हीं दोनों की स्तुतियां गाओ. (२) ता मित्रस्य प्रशस्तय इन्द्राग्नी ता हवामहे. सोमपा सोमपीतये.. (३) हम मित्र देव की प्रशंसा के लिए इंद्र और अग्नि को इस यज्ञ में बुला रहे हैं. वे दोनों सोमरस पीने वाले हैं. हम उन्हीं दोनों को सोमरस पीने के लिए बुला रहे हैं. (३) उग्रा सन्ता हवामह उपेदं सवनं सुतम्. इन्द्राग्नी एह गच्छताम्.. (४) हम शत्रुनाशन में क्रूर उन्हीं दोनों को इस सोमरसपूर्ण यज्ञ में बुला रहे हैं. वे इंद्र और अग्नि इस यज्ञ में आवें. (४) ता महान्ता सदस्पती इन्द्राग्नी रक्ष उब्जतम्. अप्रजा: सन्त्वत्रिण:.. (५) वे गुणसंपन्न एवं सभापालक इंद्र और अग्नि राक्षस जाति की क्रूरता समाप्त कर दें. नरभक्षण करने वाले राक्षस उन दोनों के प्रभाव से संतानहीन हो जावें. (५) तेन सत्येन जागृतमधि प्रचेतुने पदे. इन्द्राग्नी शर्म यच्छतम्.. (६) हे इंद्र और अग्नि! जो स्वर्गलोक हमारे कर्मफलों को प्रकाशित करने वाला है, वहीं से तुम इस यज्ञ के निमित्त जाओ और हमें सुख प्रदान करो. (६) सूक्त—२२ देवता—अश्विनीकुमार आदि ebook converter DEMO Watermarks*