BharatKosha
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 184 of 1855

Read in context
Page 184

हे अग्नि देव! देवों की कामना करने वाली पत्नियों को इस यज्ञ में ले आओ. तुम सोमपान करने के लिए त्वष्टा को यहां ले आओ. (९) आ ग्ना अग्न इहावसे होत्रां यविष्ठ भारतीम्. वरूथ्रीं धिषणां वह.. (१०) हे अग्नि! हमारी रक्षा के लिए देवपत्नियों को यहां ले आओ. हे अत्यंत युवा अग्नि! हमें ऐसी वाणी दो, जिससे हम देवों को बुला सकें एवं निष्ठापूर्वक सत्य भाषण कर सकें. (१०) अभि नो देवीरवसा महः शर्मणा नृपत्नीः. अच्छिन्नपत्राः सचन्ताम्.. (११) मनुष्यों का पालन करने वाली एवं शीघ्रगामिनी देवियां रक्षा एवं परम सुख देने के लिए हम पर प्रसन्न हों. (११) इहेन्द्राणीमुप ह्वये वरुणाणीं स्वस्तये. अग्नायीं सोमपीतये.. (१२) हम अपने कल्याण के लिए एवं सोमपान करने के लिए इंद्रपत्नी, वरुणपत्नी एवं अग्निपत्नी को बुलाते हैं. (१२) मही द्यौः पृथिवी च न इमं यज्ञं मिमिक्षताम्. पिपृतां नो भरीमभिः.. (१३) विशाल द्युलोक और पृथ्वी इस यज्ञ को रस से सींच दें और पोषण करके हमें पूर्ण बनावें. (१३) तयोरिद्घृतवत्पयो विप्रा रिहन्ति धीतिभिः. गन्धर्वस्य ध्रुवे पदे.. (१४) बुद्धिमान् लोग अपने कर्मों के द्वारा आकाश और पृथ्वी के बीच में घी की तरह जल पीते हैं. वह अंतरिक्ष गंधर्वों का निश्चित निवासस्थान है. (१४) स्योना पृथिवि भवानृक्षरा निवेशनी. यच्छा नः शर्म सप्रथः.. (१५) हे पृथ्बी! तुम विस्तृत, कंटकरहित और निवास के योग्य बनो. तुम हमें पर्याप्त शरण दो. (१५) अतो देवा अवन्तु नो यतो विष्णुर्विचक्रमे. पृथिव्याः सप्त धामभिः.. (१६) विष्णु ने अपने गायत्री आदि सातों छंदों से जिस पृथ्वी पर कई कदम डाले थे, उसी पृथ्वी से देवता हमारी रक्षा करें. (१६) इदं विष्णुर्वि चक्रमे त्रेधा नि दधे पदम्. समूळ्हमस्य पांसुरे.. (१७) विष्णु ने इस जगत् की परिक्रमा की. उन्होंने तीन प्रकार से कदम रखे. उनके धूलि धूसरित चरणों में सारा जगत् छिप गया. (१७) ebook converter DEMO Watermarks*