ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextव्रत धारण करने वाले एवं उत्तम कर्म करने वाले वरुण दैवी प्रजाओं पर साम्राज्य करने के लिए आकर बैठे थे. (१०) अतो विश्वान्यद्भुता चिकित्वाँ अभि पश्यति. कृतानि या च कत्वा.. (११) बुद्धिमान् मनुष्य वरुण की अनुकंपा से वर्तमान काल और भविष्यत् काल की सारी आश्चर्यजनक घटनाओं को देख लेते हैं. (११) स नो विश्वाहा सुक्रतुरादित्यः सुपथा करत्. प्र ण आयूंषि तारिषत्.. (१२) शोभन बुद्धि वाले वे ही अदितिपुत्र वरुण हमें सदा उत्तम मार्ग पर चलने वाला बनावें एवं हमारी आयु को बढ़ावें. (१२) बिभ्रद्द्रापिं हिरण्ययं वरुणो वस्त निर्णिजम्. परि स्पशो नि षेदिरे.. (१३) वरुण सोने का कवच धारण करके अपने बलिष्ठ शरीर को ढकते हैं. उसके चारों ओर सुनहरी किरणें फैलती हैं. (१३) न यं दिप्सन्ति दिप्सवो न द्रुह्वाणो जनानाम्. न देवमभिमातयः.. (१४) हिंसा करने वाले लोग भयभीत होकर वरुण की शत्रुता छोड़ देते हैं. मनुष्यों को पीड़ा पहुंचाने वाले लोग उन्हें पीड़ा नहीं पहुंचाते. पाप करने वाले लोग उनके प्रति पाप का आचरण त्याग देते हैं. (१४) उत यो मानुषेष्वा यशश्चक्रे असाम्या. अस्माकमुदरेष्वा.. (१५) वरुण ने मनुष्यों की उदरपूर्ति के लिए पर्याप्त अन्न पैदा किया है. वे विशेष रूप से हमारी उदरपूर्ति करते हैं. (१५) परा मे यन्ति धीतयो गावो न गव्यूतीरनु. इच्छन्तीरुरुचक्षसम्.. (१६) बहुत से लोगों ने वरुण के दर्शन किए हैं. जिस प्रकार गाएं गोशाला की ओर जाती हैं, उसी प्रकार कभी पीछे न लौटने वाली मेरी विचारधारा वरुण की ओर अग्रसर होती है. (१६) सं नु वोचावहै पुनर्यतो मे मध्वाभृतम्. होतेव क्षदसे प्रियम्.. (१७) हे वरुण! मधुर रस वाला मेरा हव्य तैयार है. तुम होता के समान उस हव्य का भक्षण करो. इसके पश्चात् हम लोग आपस में बातें करेंगे. (१७) दर्शं नु विश्वदर्शिनं दर्शं रथमधि क्षमि. एता जुषत मे गिरः.. (१८) सब लोग जिन वरुण के दर्शन करते हैं, उन्हें मैंने देखा है. मैंने कई बार धरती पर चलता ebook converter DEMO Watermarks*