BharatKosha
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 193 of 1855

Read in context
Page 193

हुआ उनका रथ देखा है. वरुण ने मेरी प्रार्थना स्वीकार की है. (१८) इमं मे वरुण श्रुधी हवमद्या च मृळय. त्वामवस्युरा चके.. (१९) हे वरुण देव! आज मेरी पुकार सुनो. आज मुझे सुख प्रदान करो. मैं अपनी रक्षा की इच्छा से तुम्हें बुला रहा हूं. (१९) त्वं विश्वस्य मेधिर दिवश्च ग्मश्च राजसि. स यामनि प्रति श्रुधि.. (२०) हे बुद्धिमान् वरुण! आकाश, धरती एवं समस्त संसार में तुम्हारा प्रकाश फैला हुआ है. तुम हमारी प्रार्थना सुनकर हमारी रक्षा करने का वचन दो. (२०) उदुत्तमं मुमुग्धि नो वि पाशं मध्यमं चृत. अवाधमानि जीवसे.. (२१) हमारे सिर वाले फंदे को ऊपर से और कमर के फंदों को बीच से खोल दो, जिससे हम जीवन धारण कर सकें. (२१) सूक्त—२६ देवता—अग्नि वसिष्वा हि मियेध्य वस्त्राण्यूर्जां पते. सेमं नो अध्वरं यज.. (१) हे अग्नि देव! तुम यज्ञ के योग्य एवं अन्नों के पालक हो. तुम अपना तेज धारण करो और हमारे इस यज्ञ को पूरा करो. (१) नि नो होता वरेण्यः सदा यविष्ठ मन्मभिः. अग्ने दिवित्मता वचः.. (२) हे अग्नि! तुम सदा युवा, कमनीय एवं तेजस्वी हो. हम यज्ञ संपन्न करने वाले एवं ज्ञानपूर्ण वाक्यों से तुम्हारी स्तुति कर रहे हैं. तुम यहां बैठो. (२) आ हि ष्मा सूनवे पितापिर्यजत्यापये. सखा सख्ये वरेण्यः.. (३) हे श्रेष्ठ अग्नि! जिस प्रकार पिता पुत्र को, भाई भाई को और मित्र मित्र को अभीष्ट वस्तुएं देता है, उसी प्रकार तुम भी मुझे इच्छित वस्तुएं दो. (३) आ नो बर्ही रिशादसो वरुणो मित्रो अर्यमा. सीदन्तु मनुषो यथा.. (४) हे अग्नि देव! शत्रुओं का नाश करने वाले मित्र, वरुण और अर्यमा जिस प्रकार मनु के यज्ञ में आए थे, उसी प्रकार तुम भी हमारे यज्ञ में बिछे हुए कुशों पर बैठो. (४) पूर्व्य होतरस्य नो मन्दस्व सख्यस्य च. इमा उ षु श्रुधी गिरः.. (५) हे पूर्वज एवं यज्ञ संपन्नकर्त्ता अग्नि! हमारे इस यज्ञ और हमारी मित्रता से तुम प्रसन्न हो ebook converter DEMO Watermarks*