सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअपनी लपटों से सर्वत्र प्रकाशित हो रहे हैं. (३) कया ते अग्ने अङ्गिर ऊर्जो नपादुपस्तुतिम्. वराय देव मन्यवे.. (४) हे अग्नि! आप अंगों को प्रकाशित करते हैं. आप ऊर्जा बढ़ाते हैं. सब आप को अंगीकार करते हैं. हम आप के अलावा और किस को श्रेष्ठ देव मानें? (४) दाशेम कस्य मनसा यज्ञस्य सहसो यहो. कदु वोच इदं नमः.. (५) हे अग्नि! हम किस मन से आप का भजन करें? हम कब आप को नमन करें? कब हमारी वाणियां आप को प्राप्त करें? (५) अधा त्व ꣳ हि नस्करो विश्वा अस्मभ्य ꣳ सुक्षिती:. वाजद्रविणसो गिरः.. (६) हे अग्नि! आप हम पर सब कृपा कीजिए. हम अपनी प्रार्थनाओं से आप को अपने प्रति कृपालु बनाएं. आप हमें धनधान्यमय बनाइए. (६) अग्न आ याह्यग्निभिर्होतारं त्वा वृणीमहे. आ त्वामनक्तु प्रयता हविष्मती यजिष्ठं बर्हिरासदे.. (७) हे अग्नि! आप देवों को आमंत्रित करने वाले हैं. आप हमारी स्तुतियां सुनिए. आप अन्य अग्नियों के साथ हमारे यज्ञस्थान पर पधारिए, कुश का आसन ग्रहण कीजिए. हमारी हवि से युक्त आहुतियां स्वीकार करने की कृपा कीजिए. (७) अच्छा हि त्वा सहसः सूनो अङ्गिरः सुचश्चरन्त्यध्वरे. ऊर्जो नपातं घृतकेशमीमहे ऽ ग्निं यज्ञेषु पूर्व्यम्.. (८) हे अग्नि! आप सर्वत्र भ्रमणशील और बलवर्द्धक हैं. आप के यजमान पुत्र आप के पास हवि पहुंचाने के लिए आतुर हैं. आप उन की आहुतियां अंगीकार कीजिए. आप ऊर्जा का नाश रोकते हैं. हम आप की यज्ञ में सर्वप्रथम आराधना करते हैं. आप घी से बढ़ते हैं. (८) अच्छा नः शीरशोचिषं गिरो यन्तु दर्शतम्. अच्छा यज्ञासो नमसा पुरूवसुं पुरुप्रशस्तमूतये.. (९) हे अग्नि! आप दर्शनीय व लपटों वाले हैं. हमारी वाणियां शीघ्र आप तक पहुंचें. आप यज्ञ में हमारा मार्ग प्रशस्त कीजिए. हम यज्ञ में आप को नमन करते हैं. आप बहुत प्रशंसनीय हैं. आप भलीभांति प्रज्वलित हैं. (९) अग्नि ꣳ सूनु ꣳ सहसो जातवेदसं दानाय वार्याणाम्. द्विता यो भूदमृतो मर्त्येष्वा होता मन्द्रतमो विशि.. (१०) हे अग्नि! आप अमर हैं. आप पृथ्वी पर अमृत स्वरूप हैं. आप यज्ञ को सफल बना कर आनंददायक हैं. आप को दान देने के लिए हम बारबार बुलाते हैं. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*