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सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished310 pages

प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची

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सामवेद डा. रेखा व्यास एम. ए., पी-एच. डी. संस्कृत साहित्य प्रकाशन नई दिल्ली ebook converter DEMO Watermarks*

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© संस्कृत साहित्य प्रकाशन संस्करण : २०१५ ISBN 81-87164-97-2 वि. प्र.- 535.5H15* संस्कृत साहित्य प्रकाशन के लिए विश्व बुक्स प्रा. लि. एम-१२, कनाट सरकस, नई दिल्ली-११०००१ द्वारा वितरित ebook converter DEMO Watermarks*

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अपनी बात आमतौर पर सामवेद को ऋग्वेद के मंत्रों का संग्रह माना जाता है. छांदोग्य उपनिषद् में कहा भी गया है—'या ऋक् तत् साम' अर्थात् जो ऋक् है, वह साम है. इस का यह अर्थ कदापि नहीं है कि सामवेद में समस्त छंद ऋग्वेद से ही लिए गए हैं. सामवेद की अनेक ऋचाएं ऋग्वेद से भिन्न हैं. कुछ स्थलों पर सामवेद की ऋचाओं में ऋग्वेद की ऋचाओं से आंशिक साम्य दिखाई देता है. इसे पाठभेद के रूप में भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है. यदि यह पाठभेद होता तो ऋचाएं उसी रूप और क्रम में ली गई होतीं, जिस रूप और क्रम में वे ऋग्वेद में ली गई हैं. दूसरी बात यह है कि यदि ऋग्वेद से केवल गायन के लिए ऋचाओं का सामवेद के रूप में संग्रह किया गया होता तो केवल गेय मंत्रों का ही संग्रह होना चाहिए था, जबकि उपलब्ध सामवेद में लगभग ४५० मंत्र पूरी तरह गेय नहीं हैं. तीसरी बात यह है कि अगर सामवेद के मंत्र ऋग्वेद से उद्धृत माने जाएं, तो उन के रूप और स्वर निर्देश ऋग्वेद से भिन्न हैं. ऋग्वेदीय मंत्रों में उदात्त, अनुदात्त और स्वरित स्वर पाए जाते हैं, जबकि सामवेदीय मंत्रों में सप्त स्वर विधान है. इन दृष्टिकोणों से देखने पर स्पष्ट प्रतीत होता है कि सामवेद के मंत्र ऋग्वेद से ऋण स्वरूप नहीं लिए गए हैं. उन की अपनी स्वतंत्र सत्ता है. वे उतने ही स्वतंत्र हैं, जितने ऋग्वेद के मंत्र. हां, एक बात अवश्य है कि ऋग्वेद और सामवेद के मंत्रों में वर्ण्य विषयगत अंतःसंबंध है. ऋग्वेद के समान सामवेद में भी अग्नि, इंद्र, सोम, अश्विनीकुमारों आदि की स्तुति की गई है. इसी माध्यम से उन का स्वरूप निर्धारित करने का प्रयास किया गया है. ऋग्वेद के समान सामवेद से भी तत्कालीन उन्नत समाज का पता चलता है. चूंकि सामवेद ऋग्वेद के बाद की रचना है, इसलिए उक्त संदर्भ में सामवेद का अध्ययन रोचक ही नहीं, ज्ञानवर्द्धक भी हो सकता है. इतना ही नहीं, सामवेद का अध्ययन ऋग्वेद काल के पश्चात विकसित लोककला और संस्कृति को भी रेखांकित करता है. इस प्रकार सामवेद को ऋग्वेद का पूरक कहा जा सकता है. इस की महत्ता ऋग्वेद से किसी भी रूप में कम नहीं मानी जा सकती है. इसीलिए यह वेदत्रयी (ऋक्, यजु और सामवेद) में गिना जाता है. गीता में उपदेशक कृष्ण ने ‘वेदानां सामवेदो ऽ स्मि’ कह कर सामवेद की विशिष्टता की ओर ही संकेत किया है. ebook converter DEMO Watermarks*

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यहां एक बात और ध्यान देने योग्य है कि आज 'वेद' शब्द भले ही चार वेदों—ऋक्, यजु, अथर्व और साम के साथ जुड़ कर ग्रंथवाची हो गया हो, किंतु मूल रूप में यह ज्ञान का ही बोधक रहा है. आरंभ में इन चारों को मिला कर एक ही 'वेद ग्रंथ' माना जाता था, जैसा कि महाभारत में कहा भी गया है— एक एव पुरा वेदः प्रणवः सर्ववाङ्मयः. बाद में आकारगत विशालता को देखते हुए इस के चार भाग किए गए—ऋग्वेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद और सामवेद. इन्हें 'चतुर्वेद' कहा जाता है. श्रुति परंपरा से पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतर विकसित होते रहने वाले इस ज्ञान के भंडार का संभवतया प्रथम विभाजन व्यास ने किया था. यह विभाजन प्रमुखतया साहित्यिक विधाओं पर आधारित है—पद्य, गद्य और गान. सामान्यतया किसी भी भाषा का साहित्य इन्हीं तीन रूपों में पाया जाता है. इस दृष्टि से ऋग्वेद और अथर्ववेद पद्य प्रधान, यजुर्वेद गद्य प्रधान और सामवेद गान प्रधान हैं. सामवेद की आचार्य परंपरा सामवेद के आदि आचार्य जैमिनि माने जाते हैं. वायु, भागवत, विष्णु आदि पुराणों से भी इस कथन की पुष्टि होती है. पुराणों के अनुसार, वेदव्यास ने अपने शिष्य जैमिनि को सामवेद की शिक्षा दी थी. जैमिनि के बाद सुमंतु, सुन्वान, स्वकीय सूनु सुकर्मा तक पीढ़ी दर पीढ़ी यह अध्ययन परंपरा जारी रही. सुकर्मा ने सामवेद संहिता का व्यापक विस्तार किया. पौराणिक उल्लेखों के अनुसार सामवेद की एक हजार शाखाएं थीं. आचार्य पतंजलि ने भी इस की पुष्टि की है—'सहस्रवर्त्मा सामवेदः.' आज इन में से केवल तीन ही शाखाएं मिलती हैं—कौथुमीय, राणायणी और जैमिनीय. तीनों शाखाओं में उपलब्ध सामवेद की ऋचाओं की संख्या तो अलगअलग है ही, उन में पाठभेद भी मिलता है. ब्राह्मण तथा पुराण ग्रंथों के अनुसार, साम मंत्रों (ऋचाओं) के पदों की संख्या एक लाख से भी अधिक है लेकिन सामवेद की कुल उपलब्ध ऋचाओं की संख्या अधिक नहीं है. सामवेद के मुख्यतया दो भाग हैं—आर्चिक और गान. आर्चिक का अर्थ है ऋचाओं का समूह. इस के दो भाग हैं—पूर्वार्चिक और उत्तरार्चिक. पूर्वार्चिक में छह अध्याय हैं. हर अध्याय में कईकई खंड हैं. इन्हें 'दशति' भी कहा गया है. 'दशति' से दस (संख्या) का बोध होता है. किंतु हर खंड में ऋचाओं की संख्या १० नहीं है. किसी में यह संख्या १० से कम है तो किसी में ज्यादा भी. इसीलिए इसे 'दशति' न कह कर खंड कहना अधिक उचित प्रतीत होता है. सामवेद के पहले अध्याय में अग्नि से संबंधित ऋचाएं हैं. इसलिए इसे 'आग्नेय पर्व' कहा गया है. दूसरे से चौथे अध्याय तक इंद्र की स्तुति की गई है. इसलिए यह 'ऐंद्र पर्व' ebook converter DEMO Watermarks*

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कहलाया. पांचवां अध्याय पवमान पर्व कहलाता है. इस में सोम विषयक ऋचाएं हैं, जो ऋग्वेद के नवम मंडल से ली गई हैं. पहले से पांचवें अध्याय तक की ऋचाएं 'ग्राम गान' कहलाती हैं. छठे अध्याय का शीर्षक है 'आरण्यक पर्व'. इस में यद्यपि देवताओं और छंदों की भिन्नता है तथापि इस में गायन संबंधी एकता दिखाई देती है. इस अध्याय की ऋचाएं 'अरण्य गान' कही गई हैं, पूर्वार्चिक के छह अध्यायों में कुल ६४० ऋचाएं हैं. उत्तरार्चिक में २१ अध्याय हैं. ऋचाओं की संख्या १२२५ है. इस प्रकार सामवेद में कुल १८६५ ऋचाएं हैं. यह अनुवाद सामवेद की इन ऋचाओं का यह अनुवाद सायण भाष्य पर आधारित है, क्योंकि सायणाचार्य ने वैदिक ऋचाओं (मंत्रों) को समझने के लिए यास्काचार्य द्वारा निर्दिष्ट तीनों साधनों—परंपरागत ज्ञान, तर्क एवं मनन का पूरा सहारा लिया था. इस से भी बड़ी बात यह थी कि उन्होंने अन्य आचार्यों के समान वैदिक ऋचाओं को किसी विशेष वाद का चश्मा पहन कर नहीं देखा है. सायणाचार्य ने वैदिक ऋचाओं के प्रसंग के अनुसार मानव जीवन, यज्ञ और अध्यात्म संबंधी अर्थ दिए हैं. वैसे अधिकतर अर्थ मानव जीवन से संबंधित ही हैं. यज्ञ और अध्यात्म से जुड़े अर्थ प्रायः कम स्थानों पर ही दिए गए हैं. इन्हीं कारणों से अनुवाद करते समय सायण भाष्य को आधार बनाया गया है. अनुवाद के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि सायणाचार्य का आशय पूरी तरह स्पष्ट हो जाए. अनुवाद की भाषा यथासंभव सरल एवं सुबोध रखी गई है, ताकि आम हिंदी पाठक भी आसानी से समझ सकें कि वास्तव में वेदों में क्या है! — प्रकाशक

आग्नेय पर्व

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विषय सूची पूर्वार्चिक आग्नेय पर्व पहला अध्याय ऐंद्र पर्व दूसरा अध्याय तीसरा अध्याय चौथा अध्याय पवमान पर्व पांचवां अध्याय आरण्यक पर्व छठा अध्याय उत्तरार्चिक पहला अध्याय दूसरा अध्याय तीसरा अध्याय चौथा अध्याय पांचवां अध्याय छठा अध्याय सातवां अध्याय आठवां अध्याय नौवां अध्याय ebook converter DEMO Watermarks*

दसवां अध्याय

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दसवां अध्याय ग्यारहवां अध्याय बारहवां अध्याय तेरहवां अध्याय चौदहवां अध्याय पंद्रहवां अध्याय सोलहवां अध्याय सत्रहवां अध्याय अठारहवां अध्याय उन्नीसवां अध्याय बीसवां अध्याय इक्कीसवां अध्याय ebook converter DEMO Watermarks*

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पूर्वार्चिक आग्नेय पर्व अध्याय | खंड | विषय | मंत्र १. | १. | अग्नि की स्तुति | १-१० | | यज्ञ पुरोहित | २ | | धन के स्वामी | ३ | | धनदाता अग्नि | ४ | | सर्वश्रेष्ठ अग्नि | ९ | २. | अग्नि की स्तुति | १-१० | | अग्नि की श्रेष्ठता | १ | | ज्ञान के स्वामी अग्नि | २ | | यज्ञ रक्षक अग्नि | ७ | ३. | अग्नि की स्तुति | १-१४ | | सूर्य के रूप में अग्नि | ११ | | शत्रुनाशक अग्नि | १२ | | कल्याणकारी जल | १३ | ४. | अग्नि की स्तुति | १-१० | ५. | अग्नि के लिए आमंत्रण | १-१० | | अग्नि की स्तुति | २-६ | | स्वर्ग के निवासी | ७ | ६. | धनदाता अग्नि | १-८ | | कल्याणकारी यश | २ | | अग्नि की स्तुति | ३-८ | ७. | उपासकों के लिए संबोधन | १-१० | | बाल एवं तरुण अग्नि | २ | | मृत्युधर्मा मनुष्य | ३ | | अग्नि की स्तुति | ४-१० | ८. | अग्नि की स्तुति | १-८ | | कल्याणकारी पूषा देव | ३ | ९. | अग्नि की स्तुति | १-१० | १०. | सोम, वरुण, अग्नि आदि का आह्वान | १ | | अंगिरस | २ | | अग्नि की स्तुति | ३-६ | ११. | अग्नि की स्तुति | १-१० | | अदिति देव | ६ | १२. | अग्नि की स्तुति | १-८ ebook converter DEMO Watermarks*

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सुखशांति दाता ४ देव श्रेष्ठ ६ ऐंद्र पर्व २. १. उपासकों के लिए उद्बोधन १-१० इंद्र की स्तुति २ गौओं की स्तुति ३ उपासकों को सलाह ४ इंद्र की स्तुति ५-८ शूरवीर इंद्र ९ अंतर्यामी इंद्र १० २. श्रेष्ठ वीर इंद्र १-१० इंद्र की स्तुति २-८ चिर युवा इंद्र ९ इंद्र की स्तुति १० ३. मरुद्गणों का चाबुक १-१० इंद्र की स्तुति २-३ देवताओं की स्तुति ४ ब्रह्मणस्पति की स्तुति ५ वृत्रासुर हंता इंद्र ६ सूर्य की स्तुति ७ समर्थ इंद्र ८ बुद्धिमान इंद्र ९ इंद्र की स्तुति १० ४. इंद्र की स्तुति १-१० सूर्य का दिव्य तेज ३ इंद्र के सहायक पूषा ४ धन संपन्न पृथ्वी ५ इंद्र की स्तुति ६-९ सोम और पूषा १० ५. उपासकों का आह्वान १-१० इंद्र की स्तुति ३-९ उपासकों का आह्वान १० ६. इंद्र की स्तुति १-१० गायों के स्वामी इंद्र ४ शत्रुनाशक इंद्र ५ ७. इंद्र की माता १-१० वेदानुसार आचरण २ अथर्ववेदी ब्राह्मण ३ अपूर्व उषा ४ ebook converter DEMO Watermarks*

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इंद्र की स्तुति ५-९ वायु से निवेदन १० ८. वरुण, मित्र और अर्यमा १-९ इंद्र की स्तुति २-४ विद्या की देवी सरस्वती ५ मनुष्यों में क्षमता ६ इंद्र का आह्वान ७ इंद्र, अर्यमा और वरुण ८ धनवान इंद्र ९ ९. इंद्र की स्तुति १-१० महान इंद्र ३-४ बृहत्साम ५ ऋभु देव ६ सर्वद्रष्टा इंद्र ७ इंद्र की स्तुति ८ इंद्र और पूषा ९ वृत्रासुर संहारक इंद्र १० १०. भयनाशक इंद्र १-१० इंद्र की स्तुति २-१० ११. इंद्र और सोमरस १-९ इंद्र की स्तुति २ इंद्र का प्रश्न ३ लोक की रक्षा ४ मित्र और वरुण ५ उषा ६ मित्र व वरुण ७ मरुत् ८ वामन अवतार ९ १२. इंद्र की स्तुति १-१० ३. १. इंद्र की स्तुति १-१० धनवान व दुःखनाशक इंद्र ३-४ शत्रुनाशक इंद्र ५ तारनहार इंद्र ६ इंद्र की स्तुति ७-८ मरुद्गणों की स्तुति ९ बलवान इंद्र १० २. उन्नतिशील इंद्र १-१० इंद्र की स्तुति २-१० ३. इंद्र की स्तुति १-१० मित्र, वरुण और अर्यमा ३ इंद्र की स्तुति ४ ebook converter DEMO Watermarks*

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यजमानों को संबोधन ५ बृहत्साम स्तोत्र ६ इंद्र की स्तुति ७-१० ४. इंद्र की स्तुति १-१० यशस्वी इंद्र ३ सुखदायी मकान ४ आश्रयदाता इंद्र ५ इंद्र की स्तुति ६-१० ५. इंद्र की स्तुति १-१० ६. इंद्र की स्तुति १-१० वज्रधारी इंद्र ३ सज्जन पालक इंद्र ४ अश्विनीकुमारों की स्तुति ५ पाप निवारक वरुण ६ इंद्र की स्तुति ७-१० ७. इंद्र की स्तुति १-१० विभिन्न देवीदेवताओं की स्तुति ७ प्रकाशमान इंद्र ८ बलवान इंद्र ९ वज्रधारी इंद्र १० ८. सूर्य पुत्री उषा १-१० अश्विनीकुमारों की स्तुति २-४ पोषक इंद्र ५ पुरोहित को संबोधन ६ इंद्र की स्तुति ७-१० ९. गाय के दूध से सोमरस १-१० इंद्र की स्तुति २-७ सूर्य की स्तुति ८ ब्रह्मतेज ९ महावीर इंद्र १० १०. सर्वप्रिय इंद्र १-९ मरुद्गणों की मित्रता २ अमिट महिमाशाली इंद्र ३ अजातशत्रु इंद्र ४ विजयदाता इंद्र ५ कल्याणकारी इंद्र ६ अन्नदाता इंद्र ७ वसिष्ठ की स्तुति ८ जलवर्षक इंद्र ९ ११. देवदूत गरुड़ १-१० रक्षक इंद्र २ वेगशील इंद्र ३

पर्वतवासी इंद्र २

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शक्तिमान् इंद्र ४ इंद्र की स्तुति ६-१० १२. इंद्र की स्तुति १-१० ४. १. यज्ञ संचालक इंद्र १-८ पर्वतवासी इंद्र २ शत्रुजित् इंद्र ३ देवपालक इंद्र ४ आनंददायी मरुद्गण ५ हितकारी इंद्र ६ दधिक्राव ऋषि ७ विश्वपालक इंद्र ८ २. वीर इंद्र १-१० सर्वज्ञ इंद्र २ शत्रुजित् इंद्र ३ क्षमतावान् इंद्र ४ इंद्र के लिए आमंत्रण ५ इंद्र की स्तुति ६-७ उषा की स्तुति ८ देवताओं से प्रश्न ९ यज्ञ सदन १० ३. सेनानायक इंद्र १-११ जन कल्याण के लिए जलवर्षा २ स्वर्ग के स्वामी ३ इंद्र की स्तुति ४-६ धन के भंडार ७ आत्मज्ञाता ८ स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक ९ सम्राट १० इंद्र का आह्वान ११ ४. इंद्र की स्तुति १-१० उपासकों के लिए उद्बोधन २ इंद्र के ओज की प्रशंसा ३ इंद्र द्वारा सोमपान ४ वीर इंद्र ५ रसीला सोमरस ६ सखाओं का आह्वान ७ ब्राह्मणों के लिए उद्बोधन ८ सब प्राणियों के स्वामी ९ सब के कल्याण के लिए १० ५. इंद्र की स्तुति १-८ आदित्यों की स्तुति ५ ebook converter DEMO Watermarks*

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विघ्न निवारक इंद्र ६ आदित्यों की स्तुति ७ अश्ववान ८ ६. भ्रातृ कलह से मुक्त १-१० धनदाता इंद्र २ मरुद्गणों की स्तुति ३ गायों के स्वामी ४ बैल के समान बलवान इंद्र ५ सम भाव वाले मरुद्गण ६ इंद्र की स्तुति ७-१० ७. सूर्य रूपी इंद्र की किरणें १-१० स्वराज्य की स्थापना २ प्रसन्नता और उत्साह की कामना इंद्र की स्तुति ४-८ सूर्य और चंद्र ९ अश्विनीकुमारों की स्तुति १० ८. अग्नि की स्तुति १-८ उषा की स्तुति ३ सोम की स्तुति ४ इंद्र की स्तुति ५-६ अग्नि की उपासना ७ अर्यमा, मित्र और वरुण ८ ९. सोम की स्तुति १-१० मरुद्गणों से रुद्र का संबंध ७ ऊह स्तोत्र ८ तेजोमय सविता ९ प्रकाशमान सोम १० १०. इंद्र की स्तुति १-१० देव कृपा से धन प्राप्ति ५ पवित्र गाएं ६ धनधान्य ७ इंद्र/मरुद्गणों की उपासना ९ ब्राह्मण और गाथाएं १० ११. अग्नि की स्तुति १-१० उषा की बहन रात ५ इंद्र की स्तुति ६-१० १२. दिव्य गुण वाला सोमरस १-१० प्रकाशमान सूर्य २ इंद्र की स्तुति ३-४ अग्नि की उपासना ५ एवयामरुत ऋषि ६ हरित सोम ७

पवमान पर्व

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सविता की उपासना ८ अग्नि की उपासना ९ श्रेष्ठ इंद्र १० पवमान पर्व ५. १. सोम की स्तुति १-१० यज्ञ के समय ५ सोम की स्तुति ६-१० २. सोम की स्तुति १-१० ३. शत्रुनाशक सोम १-१० बुद्धिवर्धक सोम २ शुद्ध सोमरस ३ वेगमान सोम ४-५ मदमस्तकर्ता सोम ६ सोम की स्तुति ७-१० ४. सूर्य के समान प्रकाशमान १-१४ बलदाता सोम २ निचोड़ा गया सोम ३-४ सोम की उत्पत्ति ६ सोम की स्तुति ७-१४ ५. सोम की स्तुति १-१२ आनंददायी सोमरस ५ शत्रुनाशक सोम ६ धनदाता सोम ७ आनंददायी सोमरस ८ पवित्र और श्रेष्ठ सोम ९ आनंददायी सोमरस १० अन्नदाता सोम ११ इंद्रप्रिय सोम १२ ६. सोम का आह्वान १-१० प्रकाशमान सोमरस २ सोम स्तुति ३-४ आनंदमय सोमरस ५ सर्वदाता सोम ६ रक्षक सोम ७ पवित्र सोमरस ८ इंद्रप्रिय सोमरस ९ सोम स्तुति १० ७. सोम की स्तुति १-१२ बलशाली सोम ६ ebook converter DEMO Watermarks*

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सूर्य द्वारा सज्जित सोम ७ बलवर्धक सोमरस ८ सोम की स्तुति ९ देवताओं के पालक सोम १० धन प्रदाता सोम ११ स्तुतियां १२ ८. यजमानों को संबोधन १-९ पालनहार सोमरस २ सोम का आनंददायी स्वरूप ३ आत्मज्ञाता सोम ४ सोम की स्तुति ५ इंद्रप्रिय सोमरस ६ शत्रुहंता सोम ७ गुणगार सोमरस ८ यजमानों को संबोधन ९ ९. दिव्यदृष्टि सोम १-१२ सोम की स्तुति २-३ मित्रवत सोमरस ४ वेगवान सोमरस ५ शक्तिदाता सोम ६ कल्याणकारी सोम ७ स्तुति सोम ८ प्रकाशमान सोमरस ९ मधुर सोमरस १० आनंदमय सोमरस ११ सामर्थ्यवान सोम १२ १०. सोम की स्तुति १-१२ जल पुत्र सोम ५ सोम की स्तुति ६ पवित्र सोमरस ७ सोम की स्तुति ८-१२ ११. सोम की स्तुति १-८ शक्तिवर्धक सोमरस ४ संतानदाता सोम ५ पूजनीय सोम ६ आनंददायी सोम ७ शत्रुनाशक सोम ८ आरण्यक पर्व ६. १. इंद्र की स्तुति १-९

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धन देने वाले इंद्र २ दानी इंद्र ३ वरुण की स्तुति ४ सोम की स्तुति ५-८ अन्न देव द्वारा आत्मप्रशंसा ९ २. इंद्र की स्तुति १-७ सूर्य की स्तुति २ वज्रधारी इंद्र ३ इंद्र की स्तुति ४ प्रथ और सप्रथ ५ वायु की स्तुति ६ इंद्र की स्तुति ७ ३. प्रजापति की स्तुति १-१३ सोम की स्तुति २-३ अग्नि की स्तुति ४ स्तुतियों की उत्पत्ति ५ आनंदकारी सोमरस ६ आरामदायी रात्रि ७ प्रकाशमान अग्नि ८ देवगणों की स्तुति ९ यजमानों की यशकामना १० इंद्र की स्तुति ११ सर्वस्वरूप आत्मा १२ रक्षक अग्नि १३ ४. अग्नि की स्तुति १-१२ ऋतुएं २ पूर्ण पुरुष ३-७ स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक की स्तुति इंद्र की स्तुति ९ तेजस्विता १० इंद्र की स्तुति ११-१२ ५. अग्नि की स्तुति १-१४ अन्न देने व आयु बढ़ाने की प्रार्थना सूर्य की स्तुति २-१४ उत्तरार्चिक १. १. यजमानों को संबोधन १-९ दिव्य सोमरस २ सोम की स्तुति ३ उज्ज्वल सोमरस ४ ebook converter DEMO Watermarks*

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सोम की स्तुति ५-९ २. अग्नि की स्तुति १-१२ मित्र और वरुण की स्तुति ४-६ इंद्र की स्तुति ७-९ अग्नि की स्तुति १०-१२ ३. सोम की स्तुति १-८ उशना ऋषि ८ ४. इंद्र की स्तुति १-९ आदरणीय सोम ४ इंद्र की स्तुति ५-७ सहायक इंद्र ८ इंद्र की स्तुति ९ ५. इंद्र हेतु सोमरस १-१४ राक्षसनाशक सोम २ सोम की स्तुति ३-५ चमकीला सोमरस ६ सेव्य सोमरस ७-८ सोम की स्तुति ९ यजमान सहायक सोमरस १० दुष्टनाशक सोम ११ कल्याणकारी सोम १२ मधुर सोमरस १३ व्यापक सोमरस १४ ६. यजमानों को संबोधन १-१० कल्याणकारी अग्नि २ अग्नि की स्तुति ३-५ इंद्र की स्तुति ६-१० २. १. यजमानों को संबोधन १-१२ इंद्र की स्तुति ६-८ सोमयज्ञ ९ सोम की स्तुति १० सोमयज्ञ ११-१२ २. इंद्र की स्तुति १-१२ ३. इंद्र की स्तुति १-१२ यजमानों को संबोधन ४, ५, ७, ९, ११ ४. अग्नि की स्तुति १-६ उषा ३ सूर्य ४ अश्विनीकुमारों का आह्वान ५-६ ५. ज्ञानवर्धक सोमरस १-९ प्रवहमान सोम २ ebook converter DEMO Watermarks*

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प्रतिष्ठित सोम ३ दिव्य सोमरस ४ सर्वोपरि सोम ५ परिष्कृत सोमरस ६ सोम की स्तुति ७ सोम का आह्वान ८ यजमानों को संबोधन ९ ६. घुलनशील सोमरस १-११ शक्तिमान सोमरस २ सभी देवों को प्राप्त सोम ३ सोम की स्तुति ४ वेगवान सोम ५ यशदाता सोमरस ६ सोमरस ७ सोम की स्तुति ८ पवित्र सोम ९ हरा सोमरस १० भृगु ११ ३. १. सोम की स्तुति १-१५ स्फूर्तिदायी सोमरस ४ सोम की स्तुति ५-१५ २. यज्ञ संचालक अग्नि १-१३ अग्नि की स्तुति २-३ मित्र और वरुण का आह्वान ४-६ सामगान से इंद्र की स्तुति ७ आभूषणधारी इंद्र ८ इंद्र की स्तुति ९-१० इंद्र और अग्नि की उपासना ११-१३ ३. सोम की स्तुति १-६ ४. इंद्र की स्तुति १-६ यजमानों को संबोधन ३ रक्षक इंद्र ४ इंद्र की स्तुति ५ शस्त्रधारी इंद्र ६ ५. सोम की स्तुति १-९ अपूर्व सोम ८ हितकारी सोम ९ ६. इंद्र की स्तुति १-६ ४. १. सोम की स्तुति १-१४ २. अग्नि की स्तुति १-१२ ebook converter DEMO Watermarks*

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मित्र की स्तुति ४-६ मरुद्गणों की स्तुति ७-८ इंद्र की स्तुति ९-१२ ३. सोम की स्तुति १-६ ४. इंद्र की स्तुति १-७ ५. यजमानों की वाणी १-९ सोम की उपासना २ सोम की स्तुति ३-४ इंद्र की स्तुति ५ इंद्र के सखा ६ पवित्र सोम ब्रह्मज्ञान के स्वामी ८ सूर्य की स्तुति ९ ६. यजमानों को संबोधन १-८ अग्नि की स्तुति २ इंद्र की स्तुति ३-८ ५. १. सोम की स्तुति १-१२ २. सोम की स्तुति १-९ ३. अग्नि की स्तुति १-१२ मित्र और वरुण की स्तुति ४-५ यजमानों को संबोधन ६ वैभववान इंद्र ७ पर्वतपति इंद्र ८ यजमानों को संबोधन ९ अग्नि की स्तुति १०-१२ ४. सोम की स्तुति १-८ अरुण आभा वाला सोमरस ७ ५. इंद्र की स्तुति १-८ राजा इंद्र ७ यजमानों को संबोधन ८ ६. सोम की स्तुति १-११ सूर्य की स्तुति ५ सोमरस का परिष्करण ७ सर्वलोक जनक सोम ९ सर्वव्याप्त सोम १० ७. यजमानों को संबोधन १-९ अग्नि की स्तुति ३ इंद्र की स्तुति ४-५ यजमानों को संबोधन ६ इंद्र की स्तुति ७-९ ६. १. सोम की स्तुति १-१३ ebook converter DEMO Watermarks*

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इंद्र की स्तुति ८, १० २. सोम की स्तुति १-१४ ३. अग्नि की स्तुति १-३ सूर्य की स्तुति ४-५ मित्र और वरुण की स्तुति ६ इंद्र की स्तुति ७-१२ ४. सोम की स्तुति १-८ इंद्र और सोम की स्तुति ८ ५. इंद्र की स्तुति १-६ ६. सोम की स्तुति १-१४ ७. अग्नि की स्तुति १-३ ब्राह्मणों को संबोधन ४ ७. १. सोम की स्तुति १-१६ शोधित सोमरस ९ शक्तिदायी सोमरस १२ २. सोम की स्तुति १-१७ यजमानों को संबोधन ४ मददायी सोमरस १५ ३. अग्नि की स्तुति १-३ मित्र और वरुण की स्तुति ४-६ इंद्र की स्तुति ७-१२ ४. सोम की स्तुति १-८ ५. इंद्र की स्तुति १-९ ६. सोम की स्तुति १-१४ यजमानों को संबोधन ६ ७. अग्नि की स्तुति १-३ इंद्र की स्तुति ४-५ चिकित्सा ६ उपासकों को संबोधन ७ ८. १. पोषक सोम १-१२ शत्रुहंता सोम २ सोम की स्तुति ३-५ सोमरस का परिष्करण ६ मादक सोमरस ७ सोमरस का परिष्करण ८ सोम की स्तुति ९-१० विद्वान सोम ११ सर्वप्रिये सोमरस १२ २. सोम की स्तुति १-१२ हरी आभायुक्त सोमरस ६ ebook converter DEMO Watermarks*