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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

Devanagarihipublished302 pages

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भूमिका ।

किसी देश, समाज या मनुष्यकी उन्नतिका विचार करने-पर यह प्रश्न आपसे आप मनमें उठता है कि वे कौनसे कारण हैं कि जो अभीतक उन्नतिको रोके थे और भविष्यमें उन कारणोंके दूर होनेसे उन्नतिकी आशा हैं या नहीं। इसपर विचार करते हुए सहसा बुद्धि इस बातको मान लेती है कि देश, समाज और मनुष्यकी अवनतिका मुख्य कारण स्त्रियोंकी हीन दशा ही है। एक विद्वानका कहना है कि जिस देश, समाज या घरकी दशा जाननेकी इच्छा हो तो सबसे पहले वहाँ के स्त्रियों की दशा देखनी चाहिये। क्या हमारे देश, हमारे समाज और हमारे घरों की स्त्रियाँ उन्नत दशामे है ? और क्या हम इनसे भविष्यमें उन्नति की आशा कर सकते हैं ? कभी नहीं। जो स्त्रियाँ गृहलक्ष्मी हैं, जो गृहस्वामिनी हैं, जो गृहस्थाश्रमकी आधार-रूपा और पुरुषोंकी सह-धर्मिणी हैं और जिनकी प्रशंसामें धर्मशास्त्र प्रयोजकोंने लिखा है कि

दाराधीनाः क्रियाः सर्वादारस्वर्गस्थसाधनम्

‘सारी क्रियायें स्त्रियोंके ही आधीन हैं। और स्त्रियाँ ही संस्वर्ग प्राप्त होता है।’ ऐसे मन्तव्यों पर एक साधारण तर मनुष्य क्या विचार कर सकता है ? परन्तु अनेक धर्मशास्त्र प्रयोजकों-