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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

Devanagarihipublished302 pages

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की सम्मति यही है कि संसार-सेवामें पुरुषोंकी अपेक्षा स्त्रियों-का बहुत बड़ा भाग गार्हस्थ्य जीवनमें है; क्योंकि धर्मशास्त्रमें ऐसा कहा है कि

भार्यया कथ्यते गृही

'जिसके स्त्री है वही गृहस्थ है।' अतएव संसार में स्त्रियों का बहुत बड़ा मान है, परन्तु शोक की बात है कि इन स्त्रियों से हम किसी प्रकार भविष्यमें उन्नतिकी आशा नहीं पाते। किसी समयमें इसी भारतमें इन्हीं स्त्रियोंसे ऐसे ऐसे रक्त उत्पन्न हो गए हैं कि जिनके नामपर भारतवासी अपनी मर्यादाको लिये बैठे हैं।

ऐसी ही माताओंके सुपुत्रोंकी वदौलत एक दिन हमारा भारत विद्या-बुद्धि-संपन्न और गुणोंकी खान था। उस समय इस देशकी कीर्ति का पताका भूमंडलवासियोंको दूरसे दिखलायी पड़ता था। कानोंसे सुनी बातोंको नेत्रोंसे देखनेके लिये अनेक देशोंके यात्री आते थे और यहाँकी योग्यता व फलाकौशलको देख इसकी अतुलनीय कीर्तिकी वर्णन अपनी मातृभाषाके ग्रन्थोंमें करते थे। वे ग्रन्थ आज इस भारतकी गुरुता, सभ्यता और योग्यताके साक्षी रूपमें उपस्थित हैं।

जिस समय संसार अज्ञानान्धकारमें मग्न था और पृथ्वीके अधिकांश भागोंमें असभ्यता फैली हुई थी, उस समय यही भारत धर्म, आस्तिकता; भक्ति, सभ्यताऔर कला कौशल के