संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextस्त्रियोंका उपदेश ।
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४. मसानेको फूल जाना—इसके कई कारण हैं।
१. मसानेमें स्त्रीत्व पैदा हो जाने और नरम करनेकी शक्ति न होनेसे।
२. मूत्र इकट्ठा हो जानेसे।
इसमें कई लक्षण प्रकट होते हैं।
१. पेटके अफूरेके समान मसानेमें अकरा सालूम होना।
२. मूत्रके निकलनेमें कुछ थोड़ी रुकावट।
३. जल्दी जल्दी पेशाब लगना।
पेटका अफरा पचानेवाली दवा खानेसे अच्छा हो जाता है; परन्तु यह इससे नहीं अच्छा होता।
इस प्रकार मसानेके रोगसे स्त्रियाँ पीड़ित रहती हैं और इनके अनेक उपद्रवोंसे दूसरे रोग उत्पन्न हो जाते हैं। अतएव कुछ सन्देह होते ही इलाज करना आवश्यक है।
(२२) स्त्रियोंका उपदेश ।
पुरुषोंकी भाँति स्त्रियोंको भी उपदेश (आतश्क) होता है। इस रोगसे प्रायः सदाचरणी स्त्रियाँ बची रहती हैं। परन्तु बाजारू (रपिडयॉ) और बदचलन स्त्रियोंको तो यह अवश्य होता है। वे स्त्रियाँ जो कि बदचलन नहीं हैं, उनको यह रोग उनके बदचलन पतिसे मिलता है। बदचलन पुरुषोंको बदचलन स्त्रियोंसे मिलता है; परन्तु कहीं कहीं सदाचारी पुरुष भी अपनी स्त्री से ऐसे रोगको पाते हैं। सारांश इसका यह है कि यह रोग इसी प्रकार फैलता है। वैद्यकके मतसे यह पाँच प्रकारका होता है—वातज, पित्तज, कफज, रक्तज और सन्निपातिक। इसका कारण वैद्यकमें इस प्रकार कहा है।