संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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सन्तति-शास्त्र ।
लगनेसे तुरन्त बच्चेमें उस गन्दागीका विष पहुँच जाता है । अतएव नालको एक बहुत अच्छे साफ गरम पानीसे खूब धोये हुए तेज चाकूसे काटना चाहिये । विचारी प्रसूता भी ऐसी गन्दागीकी बदौलत मरनेसे बचती है । इसको अनेक रोग प्रसूत ज्वर सरीखे हो जाते हैं । याद रहे कि ऐसी चमारिन गन्दी रह कर कभी अन्दर न घुसने पावे । इनके हाथ पाँच और शरीर खूब साफ करा देना चाहिये । हाथोंकी सबसे ज्यादा सफाई होती जरूरी है । नाखून कटवा कर उनके अन्दरका मेल कुचीसे साफ करा देना चाहिये । यह भी ध्यान रहे कि चमारिन रजोधर्मसे न हो । नाल कैसे काटना चाहिये यह एक सामूही बात है । नालको नाभीसे चार अँगुल छोड़कर एक ऐशमी तागेसे गाँठ लगाकर बाघे और दूसरी गाँठ पहिली गाँठसे दो इञ्च ऊपर लगावे और उन दोनोंके बीचसे नालको रोज चाकू या कैंचीसे काट देना चाहिए ।
इस विषयमें भी हमारे देशमें तरह तरहके रिवाज हैं । कहीं टेकरेसे रमाड़ कर, कहीं पतली लकडीसे, कहीं हँसिया, (घास काटनेका औजार) से काटते हैं । इस तरहसे नाल काटना बहुत बुरा है । इससे बच्चेको बहुत बड़ा दुःख होता है । जहाँ तक हो नाल काटनेमें जल्दी करनी चाहिये क्योंकि जब-तक नाल नहीं कटता बच्चेको ग्यांस लेनेमें बड़ा दुःख होता है । नाल कटते ही बच्चा फुस फुस करके ग्यांस लेने लगता है । इसके बाद बच्चेको गरम पानीसे साफ करके नाल पर स्वच्छ और नरम कपड़ा लगा देना चाहिये । बच्चेको गरम पानीसे साफ करनेका मतलब यह है कि जो कुछ उसके बदन्म लगा है वह सब साफ हो जाय । कई जगह तो यह रवाज है कि बच्चेको साफ करनेके लिये उसके शरीरमें गरम राम लपेटने