संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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सन्तति-शास्त्र ।
कमसे कम इतना वजन बच्चोंमें होना आवश्यक है । यदि इससे कम हो तो वे निरोग नहीं कहे जा सकते ।
इन दिनोंमें माताओंको अनेक पुरुष पदार्थ खाने चाहियें; क्योंकि जो माताएँ खाने पीनेपर ध्यान नहीं रखतीं उनके बच्चे डुबले पतले और कम वजनके बने रहते हैं । बच्चा जब तक दूधके ही आसरे रहता है उस समयतक माताके आहारपर ही उसका जीवन होता है । इसलिये माता जैसा भोजन करेगी उसीके अनुसार बच्चेका वजन बढ़ेगा । जब बचपनमें वजनकी कमी रह जाती है तो वह पूरी नहीं होती । यदि होती भी है तो वर्षों लगते हैं । इसलिये बच्चोंको प्रारम्भसे ही चलवाना चनाना हमारा कर्तव्य है ।
(६२) धाय कैसी होनी चाहिये ?
बच्चोंकी जीवन-यात्राके लिये यह एक बड़ा प्रश्न है कि धाय कैसी हो ? प्रायः माताएँ स्तनोंमें दूध न होने या बच्चा पैदा होकर बारम्बार मर जाने या अपने स्तनोंको सुन्दर सुडौल बनाए रखनेके कारण दूध नहीं पिलातीं । ऐसी दशामें बच्चे गाय, भैंस और बकरियों या धायोंके दूधपर पाले जाते हैं । धाय कैसी होनी चाहिये ? यह एक बड़े महत्वका प्रश्न है ।
वैद्यकशास्त्रके एक विद्वान्ने कहा है कि धायको माताके समान होना चाहिये । ( १० क० )
इसका तात्पर्य यह है कि जो कार्य माताका बालकके प्रति है वही धायका भी है । अतएव धायका सर्व-गुण-संपन्न होना आवश्यक है । विद्वानोंने इस विषयका अनेक प्रकारसे प्रतिपादन किया है ।