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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

Devanagarihipublished302 pages

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स्तनोंके रोग ।

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३. किसी प्रकारका दवाव पहुँचनेसे जब कि नसें और गिलटियाँ दब जावें या पेंट जावें ।

ऐसे दर्दमें अनेक लक्षण होते हैं ।

१. सूजनका न होना ।

२. नसोंमें गाँठ पड़ जाना या मोटी हो जाना ।

ऐसे दर्दमें मवाद नहीं पड़ती है और न रगत बदलती है ।

३ स्तनोका सूख जाना । इसके कई कारण हैं ।

१. निर्बलता, दमा और कफके प्रकोपसे ।

२. तपेदिक, शरीरमें रक्तके न बनने और विषम ज्वरसे ।

३. रजस्वला होनेके पहले या होनेपर जब कि शरीर अत्यन्त निर्बल हो, पुरुषका संसर्ग होनेसे ।

ऐसे रोगमें अनेक लक्षण होते हैं ।

१. स्तनमें गिलटियोंका सूखना ।

२. भिटनीका सुरक्षा जाना ।

ऐसी दशामें दूध नहीं निकलता, स्तन सूखते चले आते हैं ।

स्तानोंकी खजली । इसके कई कारण हैं ।

१. रक्त-विकार और छूतदार रोगोंसे ।

२. दाढ़का पानी या प्रसव समयमें बहते हुए खून या पानीके लग जानेसे ।

३. रजके लगने या खुजलाते समय नाखूनके विकारोंसे ।

एसी दशामें अनेक लक्षण होते हैं ।

१. छोटे छोटे दाने पोस्त सरीखे पड़ जाते हैं ।

२. स्तनका रंग लाल हो जाता है ।

जब ऐसा होता है । तो दाने फूट जाते हैं और जहाँ वह पनी लगता है वहाँ दूसरे दाने पड़ते जाते हैं । इसमें सफाईकी बड़ी जरूरत है ।