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सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

by राजीव दीक्षित

Source: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (origin)

DevanagariHindipublished80 pages
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स्वदेशी चिकित्सा

सौन्दर्य-निखार

A close-up photograph of a woman's face. She is looking towards the camera with a slight smile. Her right hand is raised to her cheek, applying a clear, translucent, crystalline substance. The background is white with some green leaves visible on the right side.

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आमुख

इस दौर में जबकि कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों का बाज़ारों में अंबार लगा हुआ हो और लोग विज्ञापनी मायाजाल के वशीभूत इनके पीछे पागल हुए जा रहे हों, तो लेखक ने इस पुस्तक के जरिए भारतीय संस्कृति और परम्परा के अनुकूल एकदम निरापद स्वदेशी सौन्दर्य-रक्षक उपायों को अपनाने की प्रेरणा जगाने का एक सद्प्रयास किया है। यह पुस्तक अपनी इस स्थापना में काफी हद तक सफल है कि सौन्दर्य निखारने के कृत्रिम पश्चिमी तौर-तरीके भारतीय परम्परा और विरासत के पासंग भी नहीं उहरते। इतना ही नहीं, यह पुस्तक अपने छोटे कलेवर के बावजूद कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों व कुछ अन्य कृत्रिम उत्पादों के हानिकारक पहलुओं पर भी सिलसिलेवार ढंग से तर्कपूर्ण और तथ्यात्मक विवेचन प्रस्तुत करती है।

वैसे तो सुन्दरता बढ़ाने के गुर बताने वाली ढेरों पुस्तकें बाज़ार में उपलब्ध हैं, पर इस पुस्तक की विशेषता यह है कि यह लोगों के सौन्दर्यबोध में ही सार्थक बदलाव लाने की कोशिश करती है। जहाँ इस विषय की अन्य को तड़क-भड़क वाली उपभोक्तावादी बनावटी जिन्दगी जीने की तरफ ही घसीटने की कोशिश करती दिखाई देती हैं, वहाँ इस पुस्तक में देश की जनता को संयम व सादगीपूर्ण जीवन की ओर मोड़ने का प्रयत्न किया गया है। यही वास्तव में आज़ादी बचाओ आन्दोलन का मिशन भी है।

लेखक सन्त समीर जी ने बाह्य शारीरिक सौन्दर्य के साथ-साथ मानसिक और चारित्रिक सौन्दर्य विषयक चर्चा करके इस लघुकाय पुस्तक को कई अर्थों में सर्वांगपूर्ण बना दिया है। अच्छी बात यह भी है कि स्त्री-पुरुष दोनों ही वर्गों के लिए इस पुस्तक की समान उपयोगिता है। अन्त में, मेरी कामना यही है कि अपने सौन्दर्य के प्रति सचेत देश के स्त्री-पुरुष कृत्रिम प्रसाधनों के मोहजाल से छूटकर इसमें सुझाए गए अकृत्रिम और निरापद उपायों को आजमाएं तथा कृत्रिम प्रसाधनों के जरिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा की जा रही करोड़ों-अरबों रुपयों के अकूत धन की लूट से इस देश को बचाने की मुहिम में भागीदार बनें।

राजीव दीक्षित राष्ट्रीय प्रवक्ता, आज़ादी बचाओ आन्दोलन

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Table of Contents

राष्ट्रीय प्रवक्ता, आज़ादी बचाओ आन्दोलन .....2
प्रथम खण्ड .....4
सौन्दर्य चाहिए तो स्वास्थ्य बचाइए .....4
बढ़ सकता है मुखड़े का आकर्षण .....7
सुन्दरता के प्रतीक काले-घने-घुँघराले बाल .....23
शरीर और सौंसों की बदबू भगाइए .....31
स्त्रियों की समस्या अ विकसित, बेडौल वक्ष .....37
कुछ नुस्खे हाथ-पैरों की देखभाल के लिए .....39
सौन्दर्य में निखार लाए मालिश .....41
सौन्दर्यरक्षक आभ्यंतर प्रयोग .....45
स्वास्थ्य और सौन्दर्य का शत्रु मोटापा .....48
दुबलापन भगाइए सौन्दर्य बचाइए .....54
द्वितीय खण्ड .....62
कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों से सावधान ! .....62
सुन्दरता का शत्रु है साबुन .....66
टृष्णशः स्वास्थ्य का साधन या रोगाणुओं की सराय .....68
शीतल पेय भी हैं सौन्दर्य के शत्रु .....70
सौन्दर्य का नाश करता है नशा .....73
कुछ फुटकर नुस्खे .....78

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प्रथम खण्ड

सौन्दर्य चाहिए तो स्वास्थ्य बचाइए

सौन्दर्य प्रसाधनों के दिन-दूने रात-चौगुने बढ़ते बाजार को देखकर यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि लोग सुन्दरता के लिए कितने परेशान हैं। स्त्री-पुरुष यहाँ तक कि नई पीढ़ी के बच्चे तक सुन्दर दिखने के लिए मेकअप के नए-नए तरीके आजमाने में लगे हैं। सुन्दरता के प्रति इतनी जागरूकता शायद पहले कभी नहीं रही। यदि इतनी ही जागरूकता समूचे स्वास्थ्य को लेकर लोगों में होती तो चिन्ता की विशेष बात नहीं थी। लेकिन दुर्भाग्य से लोग स्वास्थ्य के प्रति पूरी मनमानी करते हुए भी कृत्रिम प्रसाधनों के सहारे अपना सौन्दर्य निखारना चाहते हैं। अब कौन समझाए कि हँसना और गाल फुलाना, दोनों एक साथ नहीं हो सकते। अगर कुछ लोग यह सोचते हों कि वे स्वास्थ्य के प्रति पूरे लापरवाह रहकर भी अपने सौन्दर्य की हिफाज़त कर लेंगे तो वे निरा भ्रम के ही शिकार हैं। बाज़ारू सौन्दर्य प्रसाधनों का नकली आवरण असलियत को कितनी देर छुपाएगा? वास्तव में सच्चे सौन्दर्य का रहस्य तो अच्छे स्वास्थ्य में ही छुपा है। स्वास्थ्य निखरेगा तो सौन्दर्य में अपने आप निखार आ जाएगा, यह तय है।

कहने का सीधा सा अर्थ यह है कि अगर सौन्दर्य चाहिए तो स्वास्थ्य को सही-सलामत रखने का इन्तज़ाम भी अनिवार्यतः करना ही पड़ेगा। अब सवाल यह हो सकता है कि स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए किया क्या जाए? तो इसका सीधा सा उत्तर है कि दिनचर्या सुधार ली जाए, तो बहुत कुछ ठीक हो जाएगा। दिनचर्या में आहार, निद्रा और व्यायाम पर ध्यान देना सबसे महत्वपूर्ण बातें हैं। आहार के विषय में आयुर्वेद का प्राचीन आदर्श है—हितभुक् मितभुक् ऋतभुक्। भाव यह है कि भोजन शरीर की अवस्था के अनुकूल हितकारी, उचित मात्रा में और प्रकृति सम्मत होना चाहिए। जिन्हें अपने सौन्दर्य-रक्षा की चिन्ता है उन्हें शुद्ध सात्विक शाकाहार अपनाना चाहिए। दाल, चावल, गेहूँ, जौ, बाजरा आदि विविध अन्नों के साथ हरी साग-सब्जी, फल व सलाद की समुचित मात्रा अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। यह ज़रूरी नहीं है कि स्वास्थ्य सुधारने के लिए आप मँहंगे फल-मेवे की तरफ़ ही भागें। मौसम के अनुसार मिलने वाले ढेरों सस्ते फल, सब्जियाँ आदि हैं जिनका उपयोग अपनी शारीरिक प्रकृति को देखते हुए किया जाय तो स्वास्थ्य-रक्षा का काम बखूबी हो सकता है।

आहार के विषय में यह ध्यान देने वाली बात है कि वर्तमान में जो लोगों की दिन भर कुछ न कुछ खाते रहने की आदत बढ़ रही है, यह ग़लत है। इसके अलावा 'फ़ास्ट फूड' संस्कृति ने आहार के मामले में और भी ज़्यादा भ्रष्टाचार फैला दिया है। अगर अपने स्वास्थ्य व सौन्दर्य की हिफाज़त करनी है तो इन आदतों को भी सुधारना ही पड़ेगा। दिन भर में मुख्य भोजन सिर्फ़ दो बार करना ही सेहत की दृष्टि से उचित है। यदि दोपहर 12 बजे तथा शाम 8 बजे के आस-पास

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भोजन करने की आदत हो तो सबेरे 8 बजे और तीसरे पहर 4 बजे के आस-पास हल्का सुपाच्य नाश्ता लिया जा सकता है। वैसे शाम का भोजन सूर्यास्त तक कर लेना श्रेयस्कर है। जो लोग दोपहर का भोजन जल्दी करते हैं, वे सबेरे नाश्ते की आदत न बनायें तो अच्छा है। भोजन के साथ ढेर सारा पानी पीने की भी लोगों की अक्सर गलत आदत देखने को मिलती है। यह आदत एक न एक दिन पाचन संबंधी विकारों का कारण अवश्य बनती है। भोजन में यदि रोटी आदि सूखी चीजें ज्यादा मात्रा में हों, तो ही बीच-बीच में यदा-कदा एकाध घूंट पानी लिया जा सकता है, अन्यथा भोजन के कम से कम डेढ़ दो घंटे बाद ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना उचित है। स्वास्थ्य की दृष्टि से दिन भर में कम से कम 7-8 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए। दोपहर के भोजन के बाद आधा घंटा विश्राम तथा रात के भोजन के बाद लगभग आधा घंटा टहलने की आदत स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। आहार के बाद निद्रा पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। रात देर तक जगने तथा सबेरे देर तक सोने की आदत आजकल आम बात हो गई है। यदि कोई विशेष विवशता न हो तो रात 10 बजे तक सो जाना तथा सबेरे 4-5 बजे तक जग जाना आदर्श स्थिति है। अलबत्ता, कुछ लोगों की शारीरिक प्रकृति ऐसी भी हो सकती है, जिन्हें नींद का समय कुछ कम या ज्यादा भी करना पड़ सकता है। सामान्य नियम यह है कि जितनी नींद से मन और शरीर में प्रफुल्लता और ताजगी बनी रहे, उतनी नींद पर्याप्त है।

आहार और निद्रा के बाद व्यायाम अथवा शारीरिक श्रम सबसे जरूरी चीज है। शरीर को सुडौल तथा कार्यक्षम बनाए रखने के लिए व्यायाम वास्तव में अनिवार्य है। जो लोग व्यायाम या शरीर श्रम पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते वे पौष्टिक आहार का भी उचित लाभ नहीं ले सकते। खायो पिया शरीर में अच्छी तरह जड़ हो, इसके लिए व्यायाम या श्रम जरूरी है। स्वास्थ्य और सौन्दर्य रक्षा के लिए प्रतिदिन एकाध घंटे का समय व्यायाम के लिए अवश्य दिया जाना चाहिए। योगासन-व्यायाम की किसी अच्छी पुस्तक से इस विषय में जानकारी ली जा सकती है। बेहतर है कि किसी योगासन-व्यायाम केन्द्र या विशेषज्ञ व्यक्ति से उचित विधि से प्रशिक्षण लेने के बाद ही इसे दिनचर्या में शामिल किया जाय।

अन्त में, स्वास्थ्य और सौन्दर्य की दृष्टि से ब्रह्मचर्य पालन पर भी किंचित संकेत कर देना आवश्यक है। वैसे ब्रह्मचर्य के व्यापक अर्थों में आहार, निद्रा, व्यायाम जैसी चीजें भी शामिल हैं; परन्तु यहाँ ब्रह्मचर्य का उल्लेख वीर्य-रक्षा के विशेष अर्थ में किया जा रहा है। विवाहित लोगों के लिए सिर्फ इतना संकेत पर्याप्त है कि अगर उन्हें स्वास्थ्य और सौन्दर्य को बरकरार रखना है तो वे स्त्री-संसर्ग के मामले में ऋतुगामी बनें, अर्थात् अति करने से बचें और संयम से काम लें। सांस्कृतिक मूल्यों के अनुसार जो ऋतुगामी है वह समझिए कि ब्रह्मचारी ही है। अविवाहित युवाओं के लिए तो खैर हर प्रकार से ब्रह्मचर्य पालन अनिवार्य है। भारतीय संस्कृति में यदि 25 वर्ष की आयु तक ब्रह्मचर्यपूर्वक विद्या प्राप्ति का संदेश दिया गया है तो इसका वास्तव में बहुत व्यापक उद्देश्य है। जिसने युवावस्था में ब्रह्मचर्य का मन, वचन, कर्म से समुचित पालन किया, उसका पूरा जीवन ही सौन्दर्यता से परिपूर्ण, आनन्दमय और तेजस्वी हो जाता है; महापुरुषों के जीवन-चरित्र पढ़ने से इसके ढेरों प्रमाण मिल जाते हैं। आज अगर उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रवाह के चलते ब्रह्मचर्य विनाश की परिस्थितियाँ दिख रही हैं तो यह हम सबके लिए ही चिन्ता का विषय होना

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चाहिए। यहाँ पृष्ठ सीमा के नाते ब्रह्मचर्य पालन की विस्तार से चर्चा न करके सिर्फ कुछ सांकेतिक बातें ही कही गई हैं। वैसे जिनको ब्रह्मचर्य पालन का वैज्ञानिक तरीके से महत्व जानना हो, उन्हें डॉ. सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार लिखित 'ब्रह्मचर्य-संदेश' नामक पुस्तक एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए।

इतनी चर्चा के बाद यह समझ में आ जाना चाहिए कि सौन्दर्य के लिए स्वास्थ्य-रक्षा कितनी जरूरी है। यह बात जरूर है कि यहाँ आहार, निद्रा, व्यायाम आदि के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी जा रही है। ऐसा इसलिए है कि स्वास्थ्य-रक्षा के विविध पहलुओं पर लेखक की 'स्वदेशी चिकित्सा' नामक पुस्तक में पर्याप्त चर्चा की गई है। कुल मिलाकर उपरोक्त सभी बातों का संक्षेप में यही उद्देश्य है कि इस पुस्तक में सुझाए गए सौन्दर्यवर्धक उपायों को आजमाते हुए स्वास्थ्य-रक्षा के लिए आहार-विहार भी पर अवश्य ध्यान देना चाहिए।

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बढ़ सकता हैं मुखड़े का आकर्षण

तमाम लोग अपने चेहरे के मूल ढाँचे को लेकर ही दुखी रहते हैं और सुडौलता लाने के चक्कर में प्लास्टिक सर्जरी तक की सहायता लेते हैं। परंतु मेरे विचार से चेहरे की प्राकृतिक बनावट के प्रति चिंता बेमानी है और कई अर्थों में यह हमारे विकृत सौन्दर्यबोध को ही दर्शाता है। परमात्मा ने स्वस्थ माँ-बाप द्वारा एक स्वस्थ व्यक्ति के रूप में जैसे चेहरे-मोहरे के साथ हमें इस संसार में भेजा है, उस पर संतुष्ट रहने में ही असली सुख है। सुन्दरता के तथाकथित मानदण्डों पर खरा उतरने के लिए कृत्रिम साधनों की सहायता लेने से आपके मन की मुराद पूरी तरह से पूरी तो ख़ैर नहीं ही हो सकती, उल्टे कई बार नुकसानदेह नतीजों का भी सामना करना पड़ सकता है। विशेष अपरिहार्य परिस्थितियों में कृत्रिम साधन प्रयोग किए जाएं तो ही उचित कहा जा सकता है।

दरअसल चेहरे के सौन्दर्य का असली अर्थ यह है कि चेहरा स्वस्थ हो तथा ओज और ताज़गी से परिपूर्ण रहे। चेहरे के स्वास्थ्य और सौन्दर्य सुधारने का यह भी अर्थ नहीं है कि यह कोई एकदम से अलग विषय है। सही बात यह है कि अगर आपका शरीर स्वस्थ है तो स्वास्थ्य की झलक चेहरे पर भी दिखाई ही देगी। हाँ, थोड़ी अतिरिक्त देखभाल करके चेहरे की चमक, दमक और रौनक अवश्य बढ़ायी जा सकती है।

इस प्रकरण में इसी उद्देश्य से कुछ ऐसे देशी और हानिरहित नुस्खे प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिन्हें आप अपना आहार-विहार दुरुस्त रखते हुए आजमाएंगे तो कील-मुहोंसे, दाग-धब्बे, के मालिक बन जाएंगे।

नुस्खों का इस्तमाल करते समय ध्यान रखने वाली एक विशेष बात यह है कि जिन नुस्खों में तेल या चिकनाई की चीजें मिली हों, उनका प्रयोग ठण्ड के मौसम में विशेष लाभप्रद रहता है।

चेहरे पर काली मिट्टी का लेप लगाएं। यह ऊपरी चिकनाहट दूरकर मृत त्वचा को हटाती है।

नीम की जड़ को महीन पीसकर लेप करने से मुहोंसे जल्दी ठीक होते हैं।

मुहोंसे अधिक बड़े-बड़े व ज्यादा संख्या में हों तो सिरके में कलौंजी पीसकर रात में मुँह पर लगाकर सो जाएं। सुबह धो डालें। इसके बाद ओस की बूँदों को साफ़ रूई में भिगोकर मुहोंसों पर फेरें।

एक छोटा चम्मच जौ का आटा, आधा चम्मच चंदन पाउडर, चुटकी भर हल्दी लेकर नींबू के रस में घोल बनाएं तथा चेहरे पर लगाकर आधे घण्टे बाद धो दें। यह काफ़ी असरदार नुस्खा है।

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हरी ककड़ी के रस में नींबू या संतरे का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं और लगभग आधे घण्टे बाद धो डालें।

— — — — — पहले चेहरा ठण्डे पानी से धो लें और फिर गर्म पानी में तौलिया गीला करके चेहरे पर रखकर भाप सेंक करें। इसके तुरंत बाद ठण्डे पानी से भीगा तौलिया चेहरे पर रखें। चेहरे को तैलीय न होने दें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुहोंसों से आसानी से छुटकारा मिल जाएगा।

— — — — — धनियाँ, वच, लोध और कूठ को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर महीन पीसकर एक में मिलाकर रख लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण लेकर पानी में गाढ़ा घोल बनाएं। अब पत्थर पर पानी के साथ जायफल घिसकर एक छोटे चम्मच की मात्रा में घोल में मिला दें। इस मिश्रण को शाम के समय चेहरे पर लेप करके एक घण्टे तक लगा रहने दें। फिर हल्के हाथों से मसलकर छुड़ा दें और सो जाएं। सबेरे उठकर चेहरा धो डालें। उचित आहार-बिहार के साथ कुछ दिनों तक यह प्रयोग करने से मुहासों की समस्या से निजात मिल जाएगी।

— — — — — लाल चंदन, मंजीठ, लोध, अगर, खस, कूठ व सुगंधबाला सबको बराबर-बराबर मात्रा में लेकर अलग-अलग चूर्ण बनाकर कपड़छन करके शीशियों में रख लें। जब भी उपयोग में लाना हो तो सब चूर्ण आधा-आधा चम्मच लेकर गुलाबजल के साथ पीसकर लेप बना लें। अब एक चम्मच दूध में 1-2 पंखुड़ी केसर की घोंटकर इस लेप में मिलाएं और साथ ही 4-6 बूँद नींबू का रस भी मिला लें।

इस लेप को चेहरे तथा गर्दन पर लगाकर कुछ देर के लिए सूखने दें और फिर लेप छुड़ाकर चेहरा पानी से धो डालें। यह नुस्खा चेहरे की रौनक बढ़ाने के लिए काफी कारगर है।

— — — — — त्वचा का स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आँवला, कच्चा नारियल, मक्खन-मिश्री, सलाद, संतरे जैसी चीजें विशेष लाभप्रद हैं। चूने के पानी का शर्बत त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसको बनाने का तरीका यह है कि खाने का चूना पानी में भिगोकर 4-5 दिन तक रख दें। इसे दिन में 2-3 बार साफ़ लकड़ी से हिलाकर चला दिया करें। पाँचवें दिन ऊपर का निथरा हुआ पानी अलग कर लें। इसमें शक्कर मिलाकर शर्बत योग्य चाशनी बनाकर ठण्डा करके बोटल में भर लें। इस शर्बत को भोजन के बाद दोनों समय एक-एक चम्मच की मात्रा में 40 दिनों तक सेवन करना चाहिए।

— — — — — जिन महिलाओं के चेहरे व होठों के ऊपर घने रोएं हों उन्हें बेसन, मैदा, शहद और नींबू का रस 1-1 चम्मच लेकर एक में मिलाकर चेहरे पर लेप करना चाहिए। लेप सूखने लगे तो मसलकर छुड़ा दें। इस प्रयोग से धीरे-धीरे अनावश्यक बालों की समस्या से निजात मिल जाएगी। इसके अलावा चेहरे की त्वचा भी मुलायम, चिकनी और चमकीली बन जाएगी।

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नींबू का रस और तुलसी के पत्तों का रस समान मात्रा में मिलाकर झाँड़ियों पर लगाने से झाँड़ियों से मुक्ति मिल जाती है। इससे मुहासे भी समाप्त होते हैं।

— — — — — दो चम्मच कच्चे दूध में गाढ़ा लेप बनने लायक चिरौंजी पीसकर सायंकाल चेहरे पर लेप करके कुछ देर तक सूखने के लिए छोड़ दीजिए। सूखने पर मसलकर छुड़ा दें और पानी से चेहरा धो लें, धीरे-धीरे निखार आने लगेगा।

— — — — — चेहरे पर निखार लाने के लिए एक चम्मच चूने के पानी में थोड़ा शहद मिलाकर लेप करें और लगभग आधे घण्टे बाद चेहरा धो दें।

— — — — — काली कसांदी का रस नींबू और तुलसी पत्तों के रस में मिलाकर ताँबे की कटोरी में भरकर धूप में रख दें। यह घोल जब गाढ़ा हो जाए तो मुहासों पर लगाएं, काफी लाभ होगा।

— — — — — नींबू, ककड़ी तथा खीरे का रस समान मात्रा में मिलाकर स्नान से पूर्व चेहरे पर मलें तथा कुछ समय बाद स्नान करें। चेहरे की रौनक बढ़ेगी।

— — — — — दो चम्मच दही में एक चम्मच मसूर की दाल भिगोएं। दाल फूल जाए तो पीसकर इसमें थोड़ा सा मक्खन और चुटकी भर हल्दी मिलाकर चेहरे व गर्दन पर लगाएं। लगभग आधे घण्टे बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो दें। नियमित यह प्रयोग करने से शनै:शनै: चेहरे की स्निग्धता और चमक बढ़ेगी।

— — — — — मलाई में नींबू का रस मिलाकर 10-15 मिनट तक चेहरे की मालिश करें। कुछ देर रुककर चेहरा धो दें। कुछ दिनों के प्रयोग से चेहरा दमकने लगेगा।

— — — — — आँखों के नीचे काले गड़ढे पड़ जाएं तो एक भाग नींबू के रस में चार भाग पानी मिलाकर मालिश करते हुए धोएं। थोड़े दिनों में स्याहपन मिटने लगता है।

— — — — — एक भाग नमक में चार भाग कच्चा दूध मिलाकर सोने से पूर्व रात में चेहरे की मालिश करें। सबेरे चेहरा धो डालें।

— — — — — एक-दो चम्मच बेसन में तिल का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं तथा मलकर छुड़ा दें। चेहरे की आभा बढ़ेगी।

— — — — — एक चम्मच नींबू के सूखे छिलकों के महीन चूर्ण में एक चम्मच बेसन मिलाकर ठण्डे कच्चे दूध में फेंटकर गाढ़ा लेप तैयार करें। प्रतिदिन यह लेप चेहरे पर लगाकर कुछ देर बाद पानी से धो दें। यह प्रयोग चेहरे को आकर्षक बनाता है।

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— — — — — मसूर की पिसी हुई दाल में थोड़ी हल्दी और जैतून का तेल मिलाकर उबटन बनाएं तथा चेहरे और शरीर पर मलें। कुछ देर बाद स्नान करें। त्वचा साफ और स्निग्ध होती है। — — — — —

एक चम्मच बेसन, एक चुटकी आटा, 5-6 बूँद नींबू रस तथा 5-6 बूँद गुलाबजल एक में मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएं। अगर त्वचा रुखी या कठोर दिखती हो तो इसमें आधा चम्मच मलाई मिला लें। इस लेप को चेहरे पर मलें तथा कुछ देर बाद ताजे पानी से धो दें। कुछ दिनों के प्रयोग से चेहरे की चमक बढ़ जाएगी। — — — — —

चेहरे पर चेचक के दाग हों तो मुरदार-श्वंग में नींबू का रस मिलाकर लगाना चाहिए। इस प्रयोग से गहरे दाग होंगे तो हल्के हो जाएंगे और हल्के दाग होंगे तो समाप्त हो जाएंगे। — — — — —

नींबू के एक चम्मच रस में एक पके टमाटर का रस मिलाकर चेहरे पर मलें तथा एक घण्टे बाद ठण्डे पानी से धो दें। धीरे-धीरे चेहरे की लाली बढ़ने लगेगी। — — — — —

चेहरे की रौनक बढ़ाने के लिए संतरे के सूखे छिलकों के साथ दो-तीन बादाम की गिरी दूध की मलाई के साथ सिल पर महीन घोंट-पीसकर चेहरे पर मलें। सूख जाने पर मसलकर छुड़ा दें तथा चेहरा धो डालें। — — — — —

एक चम्मच नींबू के रस में कुछ बूँद जैतून का तेल मिलाकर रात में सोने से पूर्व चेहरे पर लगाएं। इससे रंग में निखार आएगा तथा त्वचा की कठोरता, रुखापन दूर होंगे। — — — — —

खीरा व ककड़ी का रस मिलाकर मलने से आँखों के नीचे का स्याहपन मिटता है। — — — — —

मैदे में दूध मिलाकर गाढ़ा-गाढ़ा लेप चेहरे पर मलें। इससे चेहरे की मैल साफ होगी तथा मुलायमियत बढ़ेगी। — — — — —

ग्लिसरीन, नींबू का रस तथा गुलाबजल बराबर मात्रा में लेकर घोल बनाकर रख लें। सर्दी के दिनों में चेहरे पर लगाने का यह अच्छा लोशन है। त्वचा की खुशकी दूर तो होगी ही, त्वचा के रोग भी ख़त्म होंगे। — — — — —

चेहरे या शरीर के खुले हिस्सों की त्वचा को ठण्डी हवा के असर से बचाने के लिए सफेद मक्खन, बादाम व सफेद मोम को एक में घोंट-पीसकर क्रीम बनाकर चेहरे पर लगाएं। इसे 5:2:5 के अनुपात में मिलाकर बनाना चाहिए। — — — — —

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संतरे और नींबू के छिलके सुखाकर महीन पीसें तथा इसमें दूध मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएं। इसे चेहरे या पूरे शरीर पर लगाकर सूखने दें फिर स्नान करें। शरीर कान्तिमान होने लगेगा।

नींबू व संतरे के सूखे छिलकों के चूर्ण में दही, बेसन तथा गुलाबजल मिलाकर लेप बनाएं तथा चेहरे पर मलें। मुहासे और झाँइयों से छुटकारा मिलेगा। यदि इसे पूरे शरीर में उबटन की भाँति लगाया जाए तो त्वचा का रंग साफ होकर मुलायमियत आती है।

नींबू का रस, शहद, मैदा और बेसन चारों समान मात्रा में लेकर किंचित पानी के साथ गाढ़ा लेप बनाकर कुछ देर तक चेहरे पर अच्छी तरह मलें। नियमित प्रयोग से कुछ दिनों में चेहरे से अनावश्यक रोएं साफ हो जाएंगे।

चावल, जौ व बाजरी का आटा, नींबू का रस तथा हल्दी— सभी समान भाग में लेकर थोड़ा जैतून का तेल मिलाकर उबटन बनाएं तथा चेहरे व पूरे शरीर पर लगाकर मसलें। कुछ देर बाद धो दें या स्नान कर लें। इस प्रयोग से त्वचा का रंग साफ होता है। काफी अच्छा नुस्खा है।

सूखे आँवलों के कपड़छन चूर्ण में उचित मात्रा में दही मिलाकर चेहरे पर अच्छी तरह लगाकर सूखने दें। सूखने के बाद लेप को मसलकर छुड़ा दें। अब गर्म पानी से भीगे तौलिए से चेहरे की सेंक करें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुहासे तो ठीक ही होंगे, चेहरा साफ, सुंदर, चमकदार भी दिखेगा।

रात सोने से पूर्व चेहरे पर मलाई मलने से स्निग्धता बढ़ती है।

लाख, मंजीठ, मुलहठी, पलाश के फूल, लाल चंदन, कुसुम, खस, पद्माख, बड़ की छाल, नीलकमल, पाकर की मूल, कमलकेशर, हल्दी, दारुहल्दी, मेंहदी तथा अनंतमूल— सभी 4-4 तोला लें।

सभी औषधियों को जौकुट चूर्ण बनाएं तथा ढाई किलो जल में मिलाकर चतुर्थांश क्वाथ करें। अब इसे छानकर 16 तोला तिल तेल, 32 तोला बकरी का दूध तथा 1-1 तोला मुलहठी, मंजीठ, लाख पतंग व केशर का कल्क मिलाकर धीमी आँच पर तेल सिद्ध करें।

यह तेल चेहरे की फुंसियां, दाग, मुहासों आदि के लिए काफी लाभप्रद है। यह किंशुकादि या कुंकुमादि तेल के नाम से बना-बनाया आयुर्वेदिक दवा की दुकानों पर भी मिलता है।

रीठे का छिलका, मालकांगनी, कायफल, रेवन्दचीनी व हल्दी, प्रत्येक 1-1 तोला लेकर चूर्ण बनाकर इसमें 12 तोला जौ का आटा मिलाकर रख लें।

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इसमें से आवश्यकताभर चूर्ण लेकर सरसों का तेल और थोड़ा पानी मिलाकर मुख पर लेप करें तथा आधा घण्टा बाद मसलकर छुड़ा दें और पानी से चेहरा धो डालें। नियमित नित्य यह प्रयोग करने से दाग, धब्बे, मुहोंसे, झाँइयाँ आदि मिटकर चेहरे पर निखार आ जाता है।

बरगद की जटा, लाल चंदन, मंजीठ, सेमल का काँटा, मसूर की, कपूर— सभी 5—5 तोला तथा पीली सरसों 10 तोला व केंसर 1 तोला लेकर कपड़छन चूर्ण बनाकर रख लें।

इस चूर्ण का थोड़े से जल में उबटन बनाकर चेहरे पर लेप करने से मुहोंसे, दाग आदि दूर होकर त्वचा की चमक बढ़ जाती है।

निंबोली की मिंगी— 500 ग्राम तथा नीम की पत्ती— 500 ग्राम लेकर अलग—अलग महीन पीस लें। दोनों को अलग—अलग बटोरकर दो गोला सा बनाएं। अब इन दोनों गोलों को एक शीशे के पात्र में रखकर थोड़ा—थोड़ा पानी डालते हुए शीशे की डंड़ी से चलाएं। जब गाढ़ा अवलेह सा बन जाए तो चलाना बंद कर दें तथा इसमें 1 किलो गुलाबजल डालकर पुनः चलाएं। जब सब चीजें एकरस हो जाएं तो पात्र पर ढक्कन लगाकर उसकी दरारें मैदे के गाढ़े लेप से बंद कर दें तथा 21 दिन तक वैसे ही पड़ा रहने दें। इसके बाद ऊपर निथरे हुए तरल पदार्थ को अलग करके बोटलों में भर लें। इस अर्क को मुहोंसों पर लगाने से मुहोंसे समाप्त हो जाते हैं।

नींबू का रस, शुद्ध ग्लिसरीन तथा गुलाबजल सभी 1:2:3 के अनुपात में लेकर मिला लें तथा इसमें नींबू रस का पचासवां भाग सुहागें का फूला मिश्रण करके शीशी में रख लें।

इस मिश्रण को प्रतिदिन रात्रि में चेहरे पर मलने से दाग, झुर्री, मुहोंसे समाप्त होते हैं तथा चेहरे का सौन्दर्य बढ़ता है।

सफेद चंदन— 10 ग्राम, रसकपूर— 6 रत्ती, बादाम की गिरी— 20 ग्राम तथा गुलाबजल— 300 ग्राम की मात्रा में लें।

चंदन घिसकर तथा बादाम पीसकर, रसकपूर तथा गुलाबजल सहित सबको एक में मिलाकर छानकर शीशी में रख लें। नित्य प्रति इसमें से एक चम्मच मिश्रण लेकर चेहरे पर मलें तथा 10 मिनट बाद धो दें। कुछ दिन में चेहरे की कांति बढ़ने लगेगी। साधारण दाग, झुर्रियाँ आदि भी मिटेंगे।

रीठे का छिलका—15 तोला, बादाम की खली— 40 तोला तथा चावल का आटा— 3 तोला। सबके बारीक बने मिश्रण में आधा तोला लोहबान पीसकर मिलाकर रख लें।

इसमें से दो तोला चूर्ण लेकर पानी में लेप बनाकर चेहरे पर खूब मलें। 15—20 मिनट बाद छुड़ाकर गुनगुने जल से धो दें। हफ्ते भर में चेहरे की सुंदरता बढ़ने लगेगी और दाग, कील दूर होने लगेंगे।

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चने का बेसन— 200 ग्राम, संतरे के सूखे छिलकों का चूर्ण— 10 ग्राम, कपूर— 10 ग्राम, पिंसी हल्दी— 25 ग्राम, मसूर की दाल का महीन चूर्ण— 200 ग्राम, सफेद चंदन—10 ग्राम, जटामांसी— 10 ग्राम, गुलाब के सूखे फूल— 10 ग्राम।

सबका बारीक कपड़छन चूर्ण बनाकर बाद में कपूर मिलाकर रख लें। एक बार में 200 ग्राम चूर्ण लेकर इसमें 5 ग्राम सरसों का तेल और किंचित पानी मिलाकर मुख और शरीर पर उबटन करें। इससे साँवलापन कम होकर रंग में निखार आता है तथा मुहोंसे आदि भी दूर होते हैं।

— — — — — कचूर घिसकर लेप करने से मुहोंसों से निजात मिलती है।

— — — — — सिरके में कलौंजी के बीजों को पीसकर रात के समय लेप करके कुछ देर बाद चेहरा धो दें। एक हफ्ते में ही मुहोंसे और दाग आदि से छुटकारा मिलने लगता है।

— — — — — गुलाबजल में संतरे के छिलकों का चूर्ण मिलाकर मुहोंसों पर लेप करने से मुहोंसे तो दूर होते ही हैं, वर्ण भी सुधरता है।

— — — — — नीम की छालरहित जड़ को घिसकर मुहोंसों पर लगाने से हफ्ते भर में लाभ मिल जाता है।

— — — — — दूध में सेमल के काँटों का बारीक चूर्ण पीसकर लेप बनाकर चेहरे पर लगाते रहने से मुहोंसे तथा कीलें नष्ट हो जाती हैं।

— — — — — लाल चंदन, मसूर, मंजीठ, लोध तथा लहसुन की कॉपल लेकर एक साथ पानी में महीन पीसकर रात को मुहासों पर लगाकर सो जाएं तथा सबेरे धो दें। कुछ दिन में लाभ मिल जाएगा।

— — — — — काली मिर्च, लाल चंदन तथा जायफल समान भाग लेकर पानी में पीसकर चेहरे पर लगाने से मुहोंसों से छुटकारा मिल जाता है।

— — — — — 5 तोला मसूर की दाल तथा एक तोला हल्दी में एक नींबू का रस मिलाकर पानी के साथ पीसें तथा चेहरे पर लेप करें। मुहोंसे ठीक होंगे।

— — — — — हल्दी की गाँठ पानी के साथ पत्थर पर घिसकर लेप लगाने से चेहरे पर निखार आता है।

— — — — — केसर, लाख, लाल चंदन, मंजीठ तथा मुलहटी 1—1 तोला लेकर कल्क करके 16 तोला तिल तेल व 32 तोला बकरी का दूध और इतना ही पानी मिलाकर धीमी आँच पर पकाएं। तेल सिद्ध हो जाए तो ठण्डा करके छानकर रख लें। इस तेल की मालिश से चेहरे की कान्ति बढ़ती है। एक हफ्ते में ही मुहोंसे, झोंइयों आदि भी मिट जाती हैं।

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— — — — — दूध में हल्दी की गाँठ भिगोकर फूलने दें। फूल जाए तो इसे बारीक पीस लें और सरसों का तेल और मैदा मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएं। इसे स्नान के समय चेहरे तथा शरीर पर लगाने से त्वचा साफ, चिकनी और कान्तिमान होती है।

— — — — — पिंडखजूर को पानी में अच्छी तरह पकाकर मसलकर छान लें। अब इस छने हुए रस को पुनः धीमी आँच पर इतना पकाएं कि यह जमने लायक हो जाए। इसे सुरक्षित पात्र में रख लें। इसमें कूठ व नमक मिलाकर या अकेले ही चेहरे पर लेप करने से चेहरे की चमक बढ़ जाती है, दाग आदि मिटते हैं।

— — — — — दूध की मलाई में थोड़ी हल्दी मिलाकर नित्य रात को चेहरे पर लगाकर मलें तथा आधा एक घण्टे बाद मसलकर छुड़ा दें व धो डालें। कुछ दिनों में चेहरा कान्तिमान हो उठेगा।

— — — — — दही, बेसन, गुलाबजल, पिंसी हल्दी, संतरे के छिलकों का चूर्ण— सभी समान मात्रा में मिलाकर फेंटकर लेप बनाएं तथा चेहरे पर लगाकर सूखने दें। पश्चात् चेहरा धोकर साफ तौलिए से पांछ दें। एक—दो माह में चेहरे के सभी दाग—धब्बे मिटकर चेहरा कान्तिमान होने लगेगा।

— — — — — कच्चे आलू का रस चेहरे पर मलने से चेहरे की त्वचा स्वस्थ, चमकदार बनती है।

— — — — — नित्य तुरंत दुहे गए दूध का झाग चेहरे पर मलकर आधा घण्टा बाद गुनगुने पानी से धो दें। चेहरे की चमक बढ़ने लगेगी।

— — — — — बादाम की गिरी— 5 तोला, सफेद चंदन— 1 तोला, गुलाब के फूल— 1 तोला, कपूर— 4 ग्राम, केशर— 2 ग्राम, कस्तूरी— 200 मि.ग्राम लेकर इन सबका महीन चूर्ण बनाकर एक में मिलाकर रख लें। इसमें से 4 ग्राम चूर्ण को पानी में गाढ़ा लेप बनाकर मुख पर मलें तथा सूख जाने पर पानी से धो दें। कुछ दिनों में चेहरा चमक उठेगा।

— — — — — गुलाबजल में 5 तोला बादाम की मिगी महीन पीसकर इसमें इत्र गुलाब, इत्र हिना, इत्र केवड़ा तथा चंदन का तेल—चारों आधा—आधा तोला तथा 120 मि.ग्रा. रसकपूर पिंसा हुआ मिलाकर खरल में एकरस कर लें। चेहरा साफ करके यह लेप मलने से कुछ दिनों में चेहरा दमक उठता है।

— — — — — नीम की छाल, बकाइन की छाल, सूखा धनिया, सफेद चंदन, खिल्ला चना, मुरदारश्वंग, सफेद काशगिरी ; सब समभाग लेकर कूट पीसकर कपड़छन चूर्ण बना लें तथा गाय के दूध में गाढ़ा घोंटकर चौड़े मेंह की शीशी में रख लें।

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रात को सोते समय इसमें से आवश्यकतानुसार मिश्रण लेकर गुलाबजल में मिलाकर तथा सो जाएं। सबेरे गुनगुने पानी से मुँह धो डालें। कुछ दिनों में मुहासों से निजात मिल जाएगी और चेहरा साफ़ हो जाएगा।

हल्दी और लाल चंदन भैंस के दूध में पीसकर लेप लगाने से मुहोंसे ठीक होते हैं और चेहरे में चमक आती है।

आम की गुठली, प्रियंगु, सफ़ेद चंदन, नागकेसर, मंजीठ और रसौत को गाय के गोबर के रस में पीसकर लेप करने से त्वचा की विकृतियाँ ठीक हो जाती हैं और वर्ण निखरता है।

संतरे के रस में तुलसी के पत्तां को पीसकर लेप करें। सूख जाने पर गुनगुने पानी से चेहरा धोएं। मुहासे आदि दूर होते हैं। यह प्रयोग सोते समय करें और सबेरे चेहरा धोएं तो बेहतर है।

तुलसी पत्र का स्वरस और नींबू स्वरस समभाग मिलाकर मलने से चेहरे की त्वचा निरोगी बनती है।

4-6 बूँद शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाकर मलें। आधा घण्टा बाद पानी से धो दें। एक माह नियमित करने से चेहरे पर निखार आ जाएगा। बाद में एक-दो दिन के अंतर पर भी करते रहेंगे तो आपको किसी बाज़ारू क्रीम वगैरह की ज़रूरत नहीं महसूस होगी।

धीक्वार के पत्ते का रस चेहरे पर लगाकर लगभग आधे घण्टे बाद धोएं। मुहासे, फुंसियों से छुटकारा मिलेगा।

कच्चे नारियल का पानी चेहरे पर मलने से त्वचा साफ़ और कान्तिपूर्ण बनती है।

चेहरे की त्वचा रुखी हो तो मुल्लानी मिट्टी में खीरे का रस, टमाटर का रस, गुलाबजल, चंदन का महीन चूर्ण, ग्लिसरीन तथा नारियल का पानी मिलाकर लेई सा बनाकर लेप करें। सूखने पर पानी से धो दें। एक-दो दिन के अंतर पर भी यह प्रयोग करते रहें तो चेहरे पर निखार आने लगेगा।

नींबू का रस, खीरे का रस व गुलाबजल समान मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन चेहरे पर मलने से मुहोंसों से छुटकारा मिलता है।

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खीरे के रस में बंदगोभी के पत्तां का रस तथा शहद मिलाकर लगाएं तथा आधा घण्टा बाद चेहरा धो डालें। चेहरे की कालिमा कम होगी और निखार आएगा।

चेहरा तैलीय हो तो 1 चम्मच संतरे का रस तथा दो चम्मच मुलतानी मिट्टी का लेप बनाकर लगाएं तथा सूखने के बाद धो दें।

त्वचा रूखी-सूखी रहती हो तो आधा चम्मच शहद में आधा चम्मच जैतून का तेल तथा आधा चम्मच पिप्सी मुलतानी मिट्टी मिलाकर गाढ़ा लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं तथा आधा घण्टा बाद धो दें।

फटे होंठों पर अरण्डी के तेल में गुलाबजल व शहद मिलाकर लगाने से लाभ हो जाता है।

मधुमक्खी का मोम 1 चम्मच, बादाम रोगन 2 चम्मच तथा गुलाबजल आधा चम्मच एक में मिश्रण करके लगाने से होंठों की फटन ठीक हो जाती है।

सूर्य की गर्मी से चेहरे की त्वचा झुलस जाए तो दही में गुलाबजल मिलाकर लगाएं। खीरा के रस में ग्लिसरीन मिलाकर लगाने से भी फायदा होगा।

त्वचा तैलीय हो, साँवलापन हो और मुहोंसे निकल रहे हों तो 1 चम्मच मसूर की दाल, 1 चम्मच चंदन चूर्ण, 1 चम्मच हरदार, 3 चम्मच हल्दी, आधा चम्मच जायफल, 1 चम्मच छारछबीला, 1 चम्मच कूठ, 1 चम्मच चिरौंजी तथा तिहाई चम्मच कपूर लेकर कूट-पीसकर मिश्रण बना लें। इसमें से ज़रूरत भर चूर्ण लेकर पानी में उबटन सा बनाएं और सबेरे तथा रात में चेहरे पर लगाकर सूखने तक छोड़ दें। पश्चात् लेप छुड़ाकर पानी से चेहरा धो लें। कुछ दिन नियमित यह प्रयोग आजमाएं, पर्याप्त लाभ मिलेगा।

सेब का रस 1 चम्मच, तुलसी के पत्तां का रस 1 चम्मच तथा नींबू का रस 2 चम्मच मिलाकर तथा लगभग आधा घण्टा बाद गुनगुने पानी से धो दें। दिन में दो बार यह प्रयोग करते रहने से धीरे-धीरे दाग, धब्बे, मुहोंसे कील, झाँइयाँ, काले घेरे आदि दूर होकर चेहरे में निखार आ जाता है।

नींबू व संतरे के सूखे छिलके, नीम व गुलाब की सूखी पत्तियाँ समान मात्रा में तथा इन सबके वजन के बराबर मुलतानी मिट्टी लेकर कपड़छन चूर्ण बनाकर रख लें। इसमें से आवश्यकतानुसार चूर्ण पानी में लेप बनाकर चेहरे व गर्दन पर लगाएं तथा सूखने पर धो दें।

इस नुस्खे के इस्तेमाल से चेहरे की त्वचा दाग, धब्बे रहित होकर स्निग्ध और चमकीली बनती है।

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— — — — — 25 ग्राम नीम की छाल, 50 ग्राम गेरु, 2 ग्राम वच तथा 10-10 ग्राम की मात्रा में लाल चंदन, मंजीठ, बायबिडंग, खदिर, खरेटी, हल्दी, आंबाहल्दी, दारूहल्दी, लोध, जटामांसी व बावची लेकर कूट-पीसकर कपड़छन चूर्ण बनाकर रख लें। इसमें से एक बड़ा चम्मच चूर्ण लेकर थोड़े दूध और कैंसर की 4-6 पुंखुडी के साथ घोंटकर चेहरे और गर्दन पर लगाकर एकाध घण्टे बाद जब सूख जाए तो मसलकर गुनगुने पानी से धो दें।

इस प्रयोग से चेहरे के दाग, झाँझियाँ मुहोंसे आदि मिटते हैं तथा त्वचा में उज्वलपन आता है। आँखों के नीचे का कालापन भी इससे समाप्त होता है। यह योग 'फेस केयर लेप' के नाम से बना-बनाया बाजार में उपलब्ध है।

— — — — — बड़ के पीले पत्ते, कूठ, लाल चंदन, चमेली के फूल, काला चंदन तथा लोध दो-दो तोला लेकर महीन चूर्ण करें तथा पानी में लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं। एकाध घण्टे बाद धो डालें। इससे त्वचा में निखार आएगा।

— — — — — माजूफल को चावल के धोवन के साथ घिसकर लेप बनाकर चेहरे पर लगाने से मुहोंसे ठीक होते हैं।

— — — — — को दिन में कई बार चेहरे को ठण्डे पानी से धोना चाहिए तथा नहाने से पहले ज्वार का आटा व बेसन को दूध में मिलाकर लेप करना चाहिए।

— — — — — जौ, बाजरा, चावल का आटा तथा नींबू का रस, पाँचों 1-1 चम्मच लेकर मिश्रण करके इसमें थोड़ा सा जैतून का तेल डालकर गाढ़ा उबटन सा बनाएं तथा चेहरे और शरीर पर मलें। कुछ देर बाद धो दें। इससे रंग साफ होता है। काफी प्रभावशाली नुस्खा है।

— — — — — आधा चम्मच दूध की मलाई में 4-6 बूँद नींबू का रस मिलाकर रात में चेहरे पर मलें और लगभग आधे घण्टे बाद पानी से धो दें। इसके बाद सोने से पूर्व चेहरे पर जैतून के तेल की धीरे-धीरे मालिश करें। यह पूरा प्रयोग करने से पूर्व चेहरे को गुनगुने पानी से धोकर तौलिए से पोंछ लें तो बेहतर रहेगा कुछ दिनों तक यह उपाय करने से चेहरे की झुर्रियाँ, दाग आदि मिटकर त्वचा कतिमान हो जाती है। साबुन का प्रयोग बंद रखें।

— — — — — गुलाब की ताज़ा पंखुडियाँ पीसकर थोड़ी गिलसरीन मिलाकर लेप सा बनाएं और होंठों पर नियमित रूप से कुछ दिन लगाएं। होंठों की कालिमा धीरे-धीरे कम होने लगेगी। लिपिस्टिक का इस्तेमाल बंद रखें।

— — — — — दही से निकाले मक्खन में कैंसर मिलाकर होंठों पर मलने से होंठों की लालिमा बढ़ती है।

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— — — — — गर्मी के दिनों में तैलीय त्वचा हो तो चंदन की लकड़ी गुलाबजल में और खुशक त्वचा हो तो दूध में घिसकर चेहरे पर लगाएं। घण्टे भर बाद ठण्डे पानी से धो दें। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में चेहरे से दाग, धब्बे मिटते नजर आएंगे।

— — — — — चेहरे को आभावन बनाने के लिए गुलाब के फूल की पंखुडियों को दूध में पीसकर लेप करें। कुछ समय बाद गुनगुने पानी से धो दें।

— — — — — नीम की ताजी पत्तियाँ पीसकर चेहरे पर लेप करें, इससे त्वचा निरोगी रहेगी।

— — — — — एक चम्मच चमेली के तेल में 3 ग्राम सोहागा मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर मलें तथा सबेरे बेसन का गाढ़ा लेप लगाकर मसलकर पानी से धो दें। कुछ दिनों में मुहोंसे गायब होना शुरू हो जाएंगे।

— — — — — शुक्ति पिष्ठी और टंकण एक-एक तोला चूर्ण मिलाकर रख लें। थोड़ा सा यह चूर्ण शहद में मिलाकर लगाते रहने से कील-मुहोंसे समाप्त होते हैं।

— — — — — संधा नमक, सफेद सरसों, लोध्र और वचा —दो—दो तोला लेकर महीन चूर्ण बनाकर रख लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण पानी में गाढ़ा लेप बनाकर मुहोंसों पर लगाएं। कुछ दिन में लाभ होने लगेगा।

— — — — — चिरौंजी, पीली सरसों और मसूर की दाल समान मात्रा में लेकर महीन पीसकर रख लें। इस चूर्ण को आवश्यक मात्रा में दूध के साथ गाढ़ा उबटन बनाकर चेहरे पर और इच्छा हो तो शरीर पर भी लगाएं। जब सूखने लगे तो मसलकर छुड़ा दें और चेहरा गुनगुने पानी से धो दें या स्नान कर लें।

इस उबटन से त्वचा में निखार आता है और दाग-धब्बे व मुहोंसे समाप्त होते हैं। यह उबटन 'चंद्रप्रभा उबटन' के नाम से बाज़ार में बिकता है।

— — — — — नाभि में तेल लगाते रहने से होंठ नहीं फटते।

— — — — — मक्खन में नमक मिलाकर होंठों पर लगाने से होंठ नहीं फटते।

— — — — — होंठों पर जैतून का तेल मलने से फटे होंठ जल्दी ठीक हो जाते हैं।

— — — — — थोड़ा सा नमक, शुद्ध घी में मिलाकर दिन में दो-तीन बार नाभि में मलने से होंठों का फटना ठीक होता है और होंठ मुलायम रहते हैं।

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को पीसकर लगाने से होंठ कोमल हो जाते हैं।

चने की थोड़ी सी दाल दूध में रात भर भिगोएं तथा सबेरे पीसकर चुटकी भर हल्दी और कुछ बूँदें नींबू रस की मिलाकर चेहरे पर लेप करके लगभग आधे घण्टे बाद छुड़ा दें। चेहरे की रंगत साफ़ होने लगेगी।

तुलसी की सूखी पत्तियों का चूर्ण बनाकर चेहरे पर मलने से दाग-धब्बे मिटकर चेहरे की कांति बढ़ती है।

ताँबे के बरतन में नींबू का रस निचोड़कर 24 घण्टे तक रखिए। इसके बाद इसमें इतनी ही मात्रा में काली तुलसी तथा काली कसौंदी का रस मिलाकर धूप में गाढ़ा होने के लिए रख दें। इस लेप को चेहरे पर लगाने से चेहरे के सौन्दर्य में निखार आता है। इसे स्तनों पर लगाने से वे पुष्ट व उन्नत बनते हैं।

काली मिर्च व गोरेशचन का लेप बनाकर लगाने से मुहोंसे खत्म होते हैं, त्वचा की चमक बढ़ती है।

बिजौरा नींबू की जड़, मनः शिला और घी को गाय के गोबर के रस में पीसें तथा चेहरे पर लेप करें। धीरे-धीरे चेहरा दाग-धब्बों से मुक्त होकर आभावान बनता है।

रात में सोते समय भौहों पर और बरौनियों के ऊपर जैतून के तेल की हल्के- हल्के मालिश करें। कुछ दिनों में भौहें और बरौनियाँ घनी होने लगेगी।

संतरे के सूखे छिलके का चूर्ण, जौ का आटा तथा आँवले का चूर्ण तिल के तेल में मिलाकर उबटन करने से चेहरे पर निखार आने लगता है।

अरहर की दाल पानी में भिगोकर रात भर के लिए रख दें और सबेरे इसे पीसकर कुछ बूँदें नींबू के रस की मिलाकर चेहरे सहित अन्य सभी खुले अंगों पर मलें। कुछ ही दिनों में त्वचा की रंगत सुधरने लगेगी।

चेहरे की त्वचा साँवली हो तो 2 बादाम की गिरी पीसकर इसमें एक चम्मच शहद, 2-3 बूँद नींबू का रस तथा ज़रा सा दूध मिलाकर गाढ़ा लेप बनाकर लगाएं। लगभग आधे घण्टे बाद चेहरा धो दें।

मुहासों से छुटकारा पाने के लिए दूध में बेसन मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगाएं तथा सबेरे गुनगुने पानी से धो दें।

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— — — — — गोभी के पत्ता के रस में थोड़ा खमीर मिलाकर चेहरे व गर्दन पर लगाकर आधे घण्टे बाद ताजे पानी से धो दें। धीरे-धीरे त्वचा की खुशकी, झुर्रियाँ व कालिमा कम होने लगेंगी।

— — — — — मूली के रस में मक्खन मिलाकर चेहरे पर मलें तथा आधा घंटा बाद गुनगुने पानी से धो दें। धीरे-धीरे चेहरे की झुर्रियाँ कम होंगी तथा चमक बढ़ेगी।

— — — — — दूध में गाजर व नींबू का रस मिलाकर नियमित रूप से चेहरे पर लगाने से सॉवलापन कम होता है।

— — — — — होंठों को मुलायम बनाए रखने तथा उन्हें फटने से बचाने के लिए प्रतिदिन सबेरे नींबू शहद और ग्लिसरीन का मिश्रण लगाएं तथा सूखने पर धो दें।

— — — — — प्रतिदिन रात में गुलाब की ताजा पंखुडियाँ पीसकर मलाई में मिलाकर होंठों पर लेप करें तथा सूखने पर धो दें। इससे होंठों की रंगत सुधरेगी तथा होंठ मुलायम बने रहेंगे।

— — — — — दूध की मलाई में शहद मिलाकर लगाने से नेत्रों के नीचे का कालापन मिटता है तथा होंठों की रंगत सुधरती है तथा वे मुलायम बने रहते हैं।

— — — — — तुलसी के पत्तों को दूध में पीसकर लगाने से झोंई मिटती है।

— — — — — सादा कच्चा दूध भी चेहरे पर मलने से चेहरा साफ और स्निग्ध होता है।

— — — — — को पानी में पीसकर लेप करने से महँसे ठीक होते हैं।

— — — — — अर्जुन वृक्ष की छाल, अखरोट की छाल, सेंधा नमक तथा मौलश्री की छाल का कपड़छन चूर्ण बनाएं तथा कंडे की राख मिलाकर रख लें। इसका मंजन करने से पीले, गंदे दाँत साफ और चमकीले बनते हैं।

— — — — — दिन में एक दो बार सरसों के तेल में थोड़ा नमक तथा हल्दी मिलाकर दाँतों, मसूड़ों की मालिश करते रहने से कृमिदंत आदि तमाम बीमारियाँ नहीं होतीं। यह दाँतों के लिए बेहद आसान, सस्ता और कारगर उपाय है।

— — — — — दो तोला दूध में चार कली लहसुन उबालकर चेहरे पर मलने से चेहरा खिल उठता है।

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