सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
पृष्ठ 13, कुल 80 में से
संदर्भ में पढ़ेंWWW.RAJIVDIXITJI.COM | AUDIO | VIDEO | ANDROID APP
चने का बेसन— 200 ग्राम, संतरे के सूखे छिलकों का चूर्ण— 10 ग्राम, कपूर— 10 ग्राम, पिंसी हल्दी— 25 ग्राम, मसूर की दाल का महीन चूर्ण— 200 ग्राम, सफेद चंदन—10 ग्राम, जटामांसी— 10 ग्राम, गुलाब के सूखे फूल— 10 ग्राम।
सबका बारीक कपड़छन चूर्ण बनाकर बाद में कपूर मिलाकर रख लें। एक बार में 200 ग्राम चूर्ण लेकर इसमें 5 ग्राम सरसों का तेल और किंचित पानी मिलाकर मुख और शरीर पर उबटन करें। इससे साँवलापन कम होकर रंग में निखार आता है तथा मुहोंसे आदि भी दूर होते हैं।
— — — — — कचूर घिसकर लेप करने से मुहोंसों से निजात मिलती है।
— — — — — सिरके में कलौंजी के बीजों को पीसकर रात के समय लेप करके कुछ देर बाद चेहरा धो दें। एक हफ्ते में ही मुहोंसे और दाग आदि से छुटकारा मिलने लगता है।
— — — — — गुलाबजल में संतरे के छिलकों का चूर्ण मिलाकर मुहोंसों पर लेप करने से मुहोंसे तो दूर होते ही हैं, वर्ण भी सुधरता है।
— — — — — नीम की छालरहित जड़ को घिसकर मुहोंसों पर लगाने से हफ्ते भर में लाभ मिल जाता है।
— — — — — दूध में सेमल के काँटों का बारीक चूर्ण पीसकर लेप बनाकर चेहरे पर लगाते रहने से मुहोंसे तथा कीलें नष्ट हो जाती हैं।
— — — — — लाल चंदन, मसूर, मंजीठ, लोध तथा लहसुन की कॉपल लेकर एक साथ पानी में महीन पीसकर रात को मुहासों पर लगाकर सो जाएं तथा सबेरे धो दें। कुछ दिन में लाभ मिल जाएगा।
— — — — — काली मिर्च, लाल चंदन तथा जायफल समान भाग लेकर पानी में पीसकर चेहरे पर लगाने से मुहोंसों से छुटकारा मिल जाता है।
— — — — — 5 तोला मसूर की दाल तथा एक तोला हल्दी में एक नींबू का रस मिलाकर पानी के साथ पीसें तथा चेहरे पर लेप करें। मुहोंसे ठीक होंगे।
— — — — — हल्दी की गाँठ पानी के साथ पत्थर पर घिसकर लेप लगाने से चेहरे पर निखार आता है।
— — — — — केसर, लाख, लाल चंदन, मंजीठ तथा मुलहटी 1—1 तोला लेकर कल्क करके 16 तोला तिल तेल व 32 तोला बकरी का दूध और इतना ही पानी मिलाकर धीमी आँच पर पकाएं। तेल सिद्ध हो जाए तो ठण्डा करके छानकर रख लें। इस तेल की मालिश से चेहरे की कान्ति बढ़ती है। एक हफ्ते में ही मुहोंसे, झोंइयों आदि भी मिट जाती हैं।
pg. 13