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शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan

by श्रीमती हिमांशु द्विवेदी

DevanagariHindipublished208 pages

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कुछ जगह पक्षियों से सम्बन्धित कथाये भी हैं जैसे मन्दोदरी और उसके मयूर भक्षण की कथा।

एकादिक कथायें चोरो से सम्बन्धित हैं जैसे-सर्षपचौर की कथा।

कुछ कथायें भूत एवं पिशाचों से सम्बन्धित हैं- जैसे मूलदेव एवं पिशाच की कथा, करगरा एवं करगरानाथ की कथा।

इन पक्षियो एव भूत-प्रेतों की कथा के माध्यम से कवि ने सबल पर निर्बल की विजय किस प्रकार होती है आदि भावना का प्रदर्शन किया है।

इस प्रकार समस्त 70 कहानियों का पर्यालोचन करने के बाद दो ही प्रमुख विचार सम्मुख आते हैं-

  1. विवाहित स्त्री द्वारा कुमार्ग का अनुसरण न करना।
  2. पराक्रमी, शूरवीर किन्तु धोखेबाज प्राणियों से कमजोर व्यक्ति किस प्रकार अपनी रक्षा करें।

प्राचीन काल से चली आ रही ये दोनों ही भावनायें आज भी समाज में देखी जा सकती है।


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