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शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan

by श्रीमती हिमांशु द्विवेदी

DevanagariHindipublished208 pages

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स्त्री (गणिकाआदि)¹ शारीरिक अवस्था और कामचेष्टा की निपुणता के आधार पर नायिकाओ के तीन भेद होते है- (1) मुग्धा, (2) मध्या, (3) प्रौढा। नाट्य दर्पण में कुलजा, दिव्या, क्षत्रिया और पण्यस्त्री ये चार प्रकार की नायिकायें कही गयी हैं।²

स्वकीया नायिका शील, सरलता आदि गुणों से युक्त होती है। जैसे शुकसप्तति की प्रमुख पात्र प्रभावती स्वकीया नायिका है। स्वकीया नायिका तीन प्रकार की होती है- (1) मुग्धा, (2) मध्या, (3) प्रगल्भा।³ जिसकी अवस्था नवीन होती है जो रतिक्रीड़ा में झिझकने वाली और क्रोध करने मे कोमल होती है वह मुग्धा नायिका है।⁴ जिसमें यौवन और काम का उदय हो रहा हो, जो बेसुधी पर्यन्त रति में समर्थ है, वह मध्या नायिका है।⁵ जैसे धनश्री (कथा न० 14), सज्जनी (कथा नं० 24), मोहिनी (कथा नं० 27) देविका पुश्चली (कथा नं० 28) आदि मध्या नायिका की श्रेणी में आती हैं। जो यौवन में अन्धी सी, काम से उन्मत्त सी, आनन्द के कारण प्रियतम के अंङ्गो में प्रविष्ट होती हुई सी सुरत के आरम्भ में भी चेतना रहित हो जाती है। वह प्रगल्भा नायिका हैं⁶ जैसे- शशिप्रभा (कथा नं० 2), विषकन्या (कथा नं० 4), सुभगा (कथा न० 10), रम्भिका (कथा न० 11), राजिका (कथा नं० 13), जयिका (कथा नं० 15), स्वच्छन्दा (कथा नं० 19), केलिका (कथा न० 20), मन्दोदरी (कथा न० 21), मादुका (कथा नं० 22), सुन्दरी (कथा न० 29), रत्ना देवी (कथा न० 26) राजिनी (कथा नं० 32), सुभगा (कथा नं० 37), रुक्मिणी (कथा न० 59), तेजुका (कथा नं० 61), मण्डुका (कथा नं० 64) आदि प्रगल्भा नायिकाओं की श्रेणी में आती हैं।


1 साहित्यदर्पण 3/56, भाव प्रकाश 94, पक्ति, काव्यानु० 7/26
2 नाट्य दर्पण 4/255
3 मुग्धा मध्या प्रगल्भेति स्वीया शीलार्जवादियुक्।
4 मुग्धा नववय कामा रतौ वामा मृदु क्रुधि। दशरूपक, द्वितीय प्रकाश, 26 वीं कारिका।
5 मध्योद्भूतौवनानङ्गा मोहान्तसुरतक्षमा। दशरूपक, द्वितीय प्रकाश, 27 वीं कारिका।
6 यौवनान्धा स्मरोत्मत्ता प्रगल्भा ययिताङ्गके।
विलीयमानेवानन्दाद्गतारम्भेऽप्चेतना।। दशरूपक, द्वितीय प्रकाश, 29 वीं कारिका।

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