शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन
Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan
by श्रीमती हिमांशु द्विवेदी
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Read in contextराम–सुग्रीव मैत्री, बालि–वध, सम्पाति, हनुमान उत्पत्ति आदि कथायें। उत्तरकाण्ड में विश्रवा, कुबेर एवं राक्षस वंश का वर्णन, रावण के जन्म के विषय में अनेक प्रकार की कथाये, हनुमान जी के उत्पत्ति एवं जीवन से सम्बन्धित अनेक चमत्कारी घटनायें, कुत्ते एवं ब्राह्मण की कथा, निमि और वशिष्ठ, ययाति और उनके पुत्र पुरू, मान्धाता–वध, इन्द्र–वृत्रासुर आदि कथाओ का पूर्ण–विस्तार के साथ सुविकसित वर्णन कथा साहित्य का पूर्ण रूप किसको नहीं, लुब्ध एवं द्रवित करता है। सुन्दरकाण्ड एवं युद्ध काण्ड में प्रायः अधिकारिक कथा राम की ही सम्प्राप्त होती है।
कथा सौन्दर्य की अनुपम कृति महाभारत जैसा ग्रन्थ विश्व के किसी भी साहित्य में अलभ्य है। कथा शिल्प के तीनों क्या और भी चाहे जितनी शिल्प की परिकल्पना की जाये महाभारत सबका आकर है। इसमें भी रामायण की भाँति आधिकारिक कथा के साथ–साथ प्रचुर मात्रा में अवान्तर कथाओं का योगदान है। जो आधिकारिक कथा में चार चाँद लगाती हैं। महाभारत के पश्चात कथा साहित्य की संरचनाओं मे महाभारत की नीतियों का प्रयोग इतस्ततः सर्वत्र दिखायी पड़ता है। इसके लिए एक कहावत चरितार्थ है कि पृथिवी पर सुन्दरतम कथाओं का महाभारत के उपाख्यानों मे पूर्णतया समावेश है। पशु कथा महाभारत में पूर्ण विकसित हुई है। महाभारत की अवान्तर कथाओ मे पर्वो के अनुसार आदिपर्व– में गजकच्छप, समुद्रमन्थन, दुष्यन्त–शकुन्तला आख्यान, माण्डव्य ऋषि, एकलव्य, सुन्द–उपसुन्द आदि। सभापर्व में–जरासन्ध, शिशुपाल आदि। वनपर्व में नल–दमयन्ती, अगस्त्य–लोपामुद्रा, परशुराम, सुकन्या, च्यवन महर्षि, गंगावतरण, मान्धाता, उशीनर, अष्टावक्र, शिवि, मुद्गल, सावित्री चरित्र, कर्णजन्म आदि। उद्योग पर्व में विदुला रन्तिदेव, भरत, पृथु आदि। शल्य पर्व में–त्रिपुरों की उत्पत्ति एवं विनाश की कथा, हंस–कौआ आख्यान, देवल मुनि आदि। शान्ति पर्व में–स्वयंभू मनु, परशुराम, पृथु, केकयराज, व्याघ्र, सियार, इन्द्र–प्रहलाद, मत्स्यत्रयी, विडाल, चूहा, ब्रह्मदत्त, पूजनी चिडिया,
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