शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन
Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan
by श्रीमती हिमांशु द्विवेदी
Page 34 of 208
Read in contextइसके अतिरिक्त सैकडो कथायें समयानुसार प्रकाशित हुईं जो निम्न वर्गों में विषयानुसार विभाजित की जा सकती हैं।
पौराणिक कथायें :
"मणिकुण्डलापाख्यान" "दधीच्युपाख्यान" तथा "पौराणिकी काचिकथा" (अप्पाशास्त्री राशिवडेकर), "उषाहरणम्" (उपेन्द्रनाथसेन कृत), "शिवहास्यम्" (मनुजेन्द्रदत्त कृत), "सत्यदेव-कथा" (रामावतार शर्माकृत), "भद्रसोमा" चारूचन्द्रवन्द्योपाध्याय कृत।
उपदेश प्रधान :
"अदूरदर्शिता", "संशयात्मा विनश्यति" (द्वारका नाथ शर्मा), "शत्रुसंकीर्णे कथ वस्तव्यम्" (नन्दलाल शर्मा) कृत, "दशापरिणति:", "चित्रकार चातुर्यम्", "कुटिल मतिनिमि गोमायु:", "बकचापलम्", "भगवद् भक्त:", "किमर्थ सद्गुरु:" (अप्पाशास्त्री राशिडेकर) कृत, "व्याघ्री विवाहार्थी शृगाल:", "वशीकृत भूत:", "धर्मस्यासूक्ष्मागति:", "ईश्वरस्यधनदानक्रम:" "राक्षसप्रश्नम्", "बुद्धिमाहात्म्यम्" (नयचन्द्र सिद्धान्त भूषण भट्टाचार्य) कृत।
भावात्मक और मनोवैज्ञानिक :
"मदीय: स्वप्न:" (रामनाथ शास्त्री), "सत्यो बालचर:" "विषया समस्या", "बालक भृत्य:" (भट्ट-मथुरानाथ शास्त्री), "साधुमणि:" (के० श्रीनिवास), "रामोनास्तीह भूतले" (उपेन्द्र चन्द्र व्याकरणतीर्थ), "छापापथ:" (चन्द्रचूड़ शर्मा), "प्राधान्यवाद:", "विप्रलब्धा:" (अप्पाशास्त्री राशिवडेकर) कृत।
[ 25 ]