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शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan

by श्रीमती हिमांशु द्विवेदी

DevanagariHindipublished208 pages

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कथा- 29

"सुन्दरी और मोहन की कथा"

सीहुली ग्राम मे महाधन नाम का वणिक् रहता था। उसकी पत्नी का नाम सुन्दरी था। मोहन नाम का उपपति नित्य घर आकर उसका उपभोग करता था। एक दिन जब वह ऐसी स्थिति में भी तभी उसका पति आ गया।

वह पति को घर की ओर आते देख, उपपति को नंगे ही छींके पर आरूढ कर, बाल बिखेरे, घर से निकलकर, दूर स्थित हो पति से बोली हमारे घर में छीके पर चढा हुआ एक नग्न भूत है। मन्त्रवेत्ताओं को बुलाने जाओ। उसके इस तरह कहने पर वह बुलाने चला गया। तब उसी बीच मे हाथ में जलता हुआ लुकाठा लेकर उपपति को बाहर निकाल दिया। पति के आने पर वह बोली-लुकाठा देखकर भूत भाग गया।

कथा- 30

"मूलदेव और पिशाच की कथा"

भूतवास श्मशान पर कराल और उत्ताल नाम के दो पिशाच रहते थे। उनकी क्रमशः धूमप्रभा और मेघप्रभा पत्नियाँ थी। एक दिन दोनों पिशाचों में दोनों पत्नियों में कौन सुन्दर है- इस विषय को लेकर काफी विवाद छिड़ गया। एक समय सपत्नीक उन दोनों पिशाचों को मूलदेव दिखाई पडा। उन दोनों ने मूलदेव को कसकर पकड लिया और कहा कि- इन दोनों में कौन स्मणीय है? झूठ बोलोगे तो हम मार डालेंगे। उनकी पत्नियाँ कुरूप, भीषण पिशाचिनी थीं।

अतः उसने यथार्थ न कहकर यह कहा कि जो जिसे प्रिय है उसको वही रमणीय है, दूसरी नहीं। इस तरह धूर्तराज मूलदेव के इस प्रकार कहने पर दोनों पिशाचों ने उसे छोड़ दिया।

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