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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

by श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

DevanagariHindipublished711 pages

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६५०श्रीरामकृष्णवचनामृत२८ सितम्बर, १८८४

हरीश, बाबूराम, मास्टर आदि बहुत भक्त साथ में हैं; बलराम और राखाल अभी वृन्दावन में हैं।

श्रीरामकृष्ण – (विजय और केदार को देखकर, सहास्य) – आज अच्छा मेल है। दोनों एक ही भाव के भावुक हैं! (विजय से) क्यों जी शिवनाथ की क्या खबर है? क्या तुमने –

विजय – जी हाँ, उन्होंने सुना है। मेरे साथ तो मुलाकात नहीं हुई परन्तु मैंने खबर भेजी थी और उन्होंने सुना भी है।

श्रीरामकृष्ण शिवनाथ के यहाँ गये थे, उनसे मुलाकात करने के लिए, परन्तु मुलाकात नहीं हुई। बाद में विजय ने खबर भेजी थी; परन्तु शिवनाथ को काम से फुरसत नहीं मिली, इसलिए आज भी नहीं मिल सके।

श्रीरामकृष्ण – (विजय आदि से) – मन में चार वासनाएँ उठी हैं।

“बैंगन की रसदार तरकारी खाऊँगा। शिवनाथ से मिलूँगा। हरिनाम की माला लाकर भक्तगण जप करें, मैं देखूँगा और आठ आने का कारण (शराब) अष्टमी के दिन तान्त्रिक साधक पीयेगा, मैं देखकर प्रणाम करूँगा।”

नरेन्द्र सामने बैठे हुए थे। उनकी उम्र २२-२३ की होगी। ये बातें कहते कहते श्रीरामकृष्ण की नरेन्द्र पर दृष्टि पड़ी। श्रीरामकृष्ण खड़े होकर समाधिमग्न हो गये। नरेन्द्र के घुटने पर एक पैर बढ़ाकर उसी भाव से खड़े हैं। बाहर का कुछ भी ज्ञान नहीं है, आँखों की पलक नहीं गिर रही है।

बड़ी देर बाद समाधि भंग हुई अब भी आनन्द का नशा नहीं उतरा है। श्रीरामकृष्ण आप ही आप बातचीत कर रहे हैं। भावस्थ होकर नाम जप रहे हैं। कहते हैं –

“सच्चिदानन्द! सच्चिदानन्द! कहूँ? नहीं, आज तू कारणानन्ददायिनी है – कारणानन्दमयी। सा रे ग म प ध नि। नि में रहना अच्छा नहीं। बड़ी देर तक रहा नहीं जाता। एक स्वर नीचे रहूँगा।

“स्थूल, सूक्ष्म, कारण और महाकारण। महाकारण में जाने पर चुप है। वहाँ बातचीत नहीं हो सकती।

“ईश्वरकोटि महाकारण में पहुँचकर लौट सकते हैं। वे ऊपर चढ़ते हैं, फिर नीचे भी आ सकते हैं। अवतार आदि ईश्वरकोटि हैं। वे ऊपर भी चढ़ते हैं और नीचे भी आ सकते हैं। छत के ऊपर चढ़कर, फिर सीढ़ी से उतरकर नीचे चल-फिर सकते हैं। अनुलोम और विलोम। सात मंजला मकान है, किसी की पहुँच बाहर के फाटक तक ही होती है, और जो राजा का लड़का है, उसका तो वह अपना ही मकान है, वह सातों मंजिल पर घूम-फिर सकता है। एक एक तरह के अनार है। एक खास प्रकार हैं, जिसमें थोडी देर तो एक तरह की फुलझड़ियाँ होती हैं, फिर कुछ देर बन्द रहकर दूसरे तरह के फूल