सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
by आचार्य चतुरसेन शास्त्री
Source: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (origin)
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तन्दुरुस्ती
भाङ्-फूंक कराते हैं और मुक्त में अपनी जान देते हैं। उन्हें जानना चाहिए कि बीमारी पैदा होने के कई अलग-अलग कारण होते हैं। बहुत-सी बीमारी तो खास किरम के कीड़ों से होती हैं। ये कीड़े इतने धारीक होते हैं कि आँखों से नहीं दीखते। ये या तो खाने पीने की चीजों के साथ या साँस के साथ पेट में पहुँच जाते हैं और रोग पैदा कर देते हैं। कुछ बीमारियों खान-पान की गड़बड़ी और रहन-सहन की खराबी से होती हैं। इसलिए ज़रूरी है कि तन्दुरुस्ती कायम रखने के लिए नीचे लिखी आठ बातों का पूरा-पूरा ख्याल रखा जाय—
१—हल्का ताज़ा सादा भोजन ठीक समय पर करो और साफ पानी पियो।
२—खुली हवा और धूप में रहो।
३—ठीक समय पर पाखाना पेशाब जाओ। और आँख-नाक को साफ रखो—अच्छी तरह स्नान करो।
४—सर्दी और गर्मी के अचानक हमले से शरीर को बचाओ।
५—धूल-गर्द, भीड़भाड़ और गंदगी से दूर रहो।
६—खूब मिहनत करो और खूब आराम करो। आराम और काम का समय पक्का करलो।
७—किसी किस्म का नशा न करो, भंग, शराब, गांजा, सुल्फा, अफीम, चाय, चाट-पानी और मिर्च-मसालों से दूर रहो।
८—बीमार पड़ने पर पूरा आराम करो और समझदार डाक्टर या वैद्य से इलाज कराओ।