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सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

by आचार्य चतुरसेन शास्त्री

Source: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (origin)

DevanagariHindipublished222 pages

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सुगम चिकित्सा

हैं। सामने का दरवाजा दो किवाड़ों से जो ऊपर-नीचे हैं बन्द हो जाता है। बाहर की खबर हम अंगल-वगल के दरवाजों से सुनते हैं। घर के आगे दो चौकीदार हरदम खड़े रहते हैं। इस घर में एक चक्की भी है जिसमें खाना पीसा जाता है, और एक कुण्ड है जिससे घर के सब हिस्सों में पानी पहुँचता है। इसके सिवा चाँदी के दो छोटे-छोटे तार हैं जो घर के हर हिस्से में खबर पहुँचाते हैं।

इस घर की ठठरी हड्डियों की बनी है। वह बहुत मजबूत है। और काकी बोम्बा उठा सकती है। इस ठठरी के बिना बोम्बा नहीं घर की ठठरी उठा सकते थे। ये हड्डियाँ दो चीजों से बनी हैं।

एक तो एक प्रकार का चूना है दूसरी एक लचीली चीज है। हड्डी को अगर जला दो तो लचीली चीज जल जायगी, चूना ही रह जायगा। अगर हड्डी को तेज सिरके में डालो तो सिरका चूने को खा जायगा और फिर हम हड्डी को मोड़ सकते हैं। जुड़नों की वनस्पत वच्चों को हड्डियों में चूना कम होता है। इसी से बालकों को चोट कम लगती है। और बूढ़े की हड्डी अगर चोट से टूट जाय तो फिर मुश्किल से जुड़ती है। बहुत-सी हड्डियाँ भीतर से खोखली होती हैं। अगर वे ठोस होतीं तो बहुत भारी होतीं। वे गेहूँ की नरई के समान ही है। इसीसे मजबूत और हल्की है। कहीं-कहीं भीतरी खोखली जगह में घी के समान एक मोटा गुद्दा भरा रहता है इनका पोषण खून से होता है। किसी-किसी हड्डी में खून को भीतर जाने की नालियाँ होती हैं, पर हड्डियों को

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