स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)
Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)
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(३)
गणना यहीं से की जाती। शुक्ल पक्ष से सब कार्यारम्भ होता है।
शुक्ल पक्ष के आदि ही, तीन तिथि लग चन्द्र।
फिर सूरज फिर चन्द्र है, फिर सूरज फिर चन्द्र।
कृष्ण पक्ष के आदि में, तीन तिथि लग भान।
फिर चन्द्र फिर भान है, फिर चन्द्र फिर भान।।
शुक्ल पक्ष अर्थात् चाँदनी रात की पहली तिथि को निरोगी मनुष्य का सूर्योदय के समय चन्द्र स्वर चलता रहेगा। इसी प्रकार लगातार तीन दिन तक ऐसा रहेगा। यह दशा पाँच घड़ी तक रहती है। बाद में स्वर बदल जाता है।
कृष्ण पक्ष में लगातार तीन दिन तक अर्थात् प्रथमा, द्वितीया और तृतीया की सूर्योदय के समय सूर्य स्वर चलेगा। तीन दिन के बाद सवेरे स्वर बदल जाया करता है। नीचे के नक्शे से यह बात भलीभाँति समझ में आ जावेगी।
प्रातः काल का समय सूर्योदय से लेकर ५ घड़ी तक -
दाहिना (सूर्य)
बाँया (चन्द्र)
कृष्ण पक्ष -
१, २, ३, ७, ८, ९
१३, १४, १५
४, ५, ६, १०, ११, १२
शुक्ल पक्ष -
४, ५, ६, १०, ११, १२
१, २, ३, ७, ८, ९
१३, १४, १५
पाँच घड़ी समाप्त होने पर स्वर आप से आप बदल जाता है। यह दशा