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स्वप्नदोष चिकित्सा

स्वप्नदोष चिकित्सा

Swapnadosh Chikitsa

by स्वामी ओमानन्द सरस्वती

Source: Brahmacharya Sangrah · वैदिक पुस्तकालय (origin)

DevanagariHindipublished14 pages

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ओङ्कार

स्वप्रदोष और उसकी चिकित्सा

“इन्द्रियाँ और संस्कार के दोष से अविद्या उत्पन्न होती हैं”

वैदिक पुस्तकालय

-ब्रह्मि दयानन्द

स्वप्रदोष क्या है?

अर्थनिद्रा में मनुष्य अनेक प्रकार के स्वप्न देखता है। जैसे संस्कार और विचार होते हैं, वैसे ही रात्रि में स्वप्न आते हैं। हमारे माता-पिता आदि पूर्वजों ने हमारे उत्पन्न करने के लिये कोई तैयारी नहीं की। लगभग सभी गृहस्थ कामवासना में अन्धे होकर व्यभिचार करते हैं। इसी पाप के फलस्वरूप हमारी उत्पत्ति होती है। यों कहिए हम विषयभोगों के कीड़े मकोड़े अपने पूर्वजों के गन्दे संस्कारों का भार सिर पर लादकर गर्भ से बाहर आते हैं और पैदा होने के पीछे न हमें ब्रह्मचर्य की शिक्षा मिलती है और न ही हमारे पालन-पोषण में स्वास्थ्य के नियमों का ध्यान रखा जाता है। सबके पेट उष्ण, उत्तेजक व वीर्यनाशक पदार्थों से टूंस-टूसंकर भर दिएजाते हैं। हम चरित्रहीन नीच साथियों के साल खुलेरूप से खेलते-कूदते हैं। हमें कोई रोकने-टोकनेवाला नहीं होता।

ब्रह्मचर्य का कौनसा नियम है जिसको हमारे देश के बालक गिन-गिनकर जानबूझकर प्रतिदिन तोड़ते न हों। इस कारण जानबूझकर जागृत-अवस्था में तथा विन जाने स्वप्न-अवस्था में वीर्यनाश करते हैं। नींद में गन्दे स्वप्न आकर वा विना स्वप्रदोष भी वीर्यपात (वीर्य का निकल जाना) स्वप्रदोष कहलाता है। यह भयङ्कर रोग है, हजारों में एकाध सौभाग्यशाली युवक वा विद्यार्थी होगा जो इससे बचा हुआ हो, आज सारा संसार इससे दुःखी है। यह सब हमारे पापों का ही फल है, इसलिए विना इच्छा के भी होता रहता है। कई बार तो मनुष्य इसको दूर करने के लिये घोर पुरुषार्थ और यत्न करता है और यह फिर भी होजाता है। कितने ही ब्रह्मचर्यप्रेमी युवक और विद्यार्थी इसी रोग के कारण महादुःखी और निराश दिखाई देते हैं। कितने ही स्वप्रदोष के रोगियों के पत्र मेरे पास आते रहते हैं। एक विद्यार्थी के एक पत्र का कुछ भाग नीचे देता हूँ-

हमारे विद्यालय में आपने ब्रह्मचर्य के बारे में व्याख्यान दिया। आपकी बातों का मेरे ऊपर काफी असर पड़ा। मैंने भी कुछ प्रतिज्ञायें कीं। किन्तु आज तक मैं अपनी प्रतिज्ञा में पास नहीं हुआ। जिसने मुझे पास नहीं होने दिया वह चीज मेरे वीर्य का बाहर निकल जाना है। मैंने इसको रोकने के लिये हजार कोशिश की, किन्तु सब फेल हुई। एक वैद्य ने मुझे कई प्रकार की दवाई दी किन्तु कोई असर