वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary
by भट्ट नारायण
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Read in contextकथा-सार १५ उस वीर बालकने अपने भुजबलसे अर्जुनके तमाम बाणोंको काटते हुए विद्युत गतिसे अर्जुनके उस प्रशस्त रथको क्षणभरमें बाणोंसे ढक दिया। वीर बालकके इस अपौरुषेय पराक्रमको देखकर उभय पक्षके सैनिक तथा भगवान् वासुदेव भी कहने लगे-शाबाश बालक ! शाबाश !! यह सुनकर गाण्डीवधारी अर्जुन तिलमिला उठे और इस बार उन्होंने अति तीक्ष्ण बाणोंसे बालकके रथ तथा धनुषकी प्रत्यञ्चाको ही काट डाला। किन्तु फिर भी वह वीर बालक विचलित नहीं हुआ। झट तलवार खींचकर पैदल ही अर्जुनपर टूट पड़ा। उधर कर्ण भी शरवर्षणसे अपने असहाय पुत्रकी सहायता करने लगे। इतनेमें एक दूसरे रथपर उछलकर वह बालक चढ़ गया और कहने लगा-'अरे, मेरे, पिताकी निन्दामें रत पाण्डुकुमार अर्जुन ! देख, अब मेरे बाण तेरे अङ्गोंके अतिरिक्त कहीं नहीं गिरेंगे।' ऐसा कहकर उसने गाण्डीवधारी अर्जुनके समस्त शरीरको बाणोंसे बींध डाला। अर्जुन उसके तीक्ष्ण बाणोंकी व्यथासे व्यथित हो उठे और इस बार क्रुद्ध होकर सहस्र सूर्यकिरणोंसे भी अधिक प्रकाशमान अपने शक्तिबाणको बालकके ऊपर छोड़ दिया। परन्तु उससे भी यह बालक विचलित नहीं हुआ। शीघ्रतासे उसने भी परशुरामके कुठारके समान तीक्ष्ण धारवाले बाणको प्रत्यञ्चापर चढ़ाकर कर्णपर्यन्त खींचकर एक ही निशानेमें अर्जुनके उस शक्तिबाणको आधे मार्गमें ही काट डाला। पुनश्च भगवान् वासुदेव कहने लगे-शाबाश बालक ! शाबाश !! यह सुन अर्जुनका शिर झुक गया और कर्णके अट्टहाससे समरभूमि गूँज उठी। यह देख अर्जुनने तिलमि- लाकर कहा—अरे रे, कर्ण ! तूने तो मेरे परोक्षमें मेरे वीर बालक अभिमन्युका वध किया था पर आज मैं तेरे सामने ही उसका बदला लेता हूँ। यह कहकर इस बार उस महागाण्डीवको सम्भाला जिसका शब्द वज्रपातके समान था। इतनेमें महारथी कर्णने भी अपने 'कालपृष्ठ' नामक धनुषको खींचा। दोनों महारथियोंके धनुषकी प्रत्यञ्चाकी गगनभेदी टङ्कारोंसे कर्ण-विवर फटने लगे। पर अन्तमें कर्णके हाथोंसे धनुष गिर पड़ा, कौरवसेना चिल्ला उठी—'हाय कुमार वृषसेन मारे गये !' तदनन्तर कर्णका सहचर सुन्दरक यह सब समाचार लेकर इतस्ततः भटकता हुआ उस वटवृक्षके नीचे बेहोश दुर्योधनके पास पहुँचा। उस समय कुछ होशमें आकर दुर्योधन अपने सबसे प्रिय छोटे भाई वीर दुःशासनके वधका ताजा समाचार सुनकर विलख-