भारतकोश
वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary

भट्ट नारायण द्वारा

DevanagariHindipublished355 पृष्ठ

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१४ कथा-सार हूँ—तू मेरे हाथसे ही मर। इतनेमें दुर्योधन दोनोंके बीच खड़े होकर उन्हें शान्त कर ही रहे थे कि रण-स्थलसे भीमकी गदासे व्यथित दुःशासनका आर्तनाद सुनाई पड़ा। उसे बचानेके लिये अश्वत्थामाको छोड़कर सभी दौड़ पड़े। चतुर्थ अङ्क दुःशासनको बचानेके लिए दुर्योधन अपनी पूरी शक्तिसे विकट संग्रामका सामना करने पर भी अधिक देर तक टिक न सके। अन्तमें भीमकी प्रचण्ड गदासे मूर्च्छित होकर वे भी धराशायी हो गये। चतुर सारथी शीघ्रतासे इन्हें रथपर लादकर भाग गया और रणस्थलीसे दूर ले जाकर एक वट-वृक्षके नीचे ठण्डी हवामें भूमिशय्यापर लिटा दिया। उधर भीमने महारथी कर्ण और शल्य आदि योद्धाओंके समक्ष ही दुःशासनको पछाड़कर जीवित ही उसके विशाल वक्षःस्थलको अपने हाथोंसे चीरकर पूर्व प्रतिज्ञाके अनुसार यथेच्छ रक्तपान करके अवशिष्ट रक्तसे समस्त शरीरको रञ्जित कर डाला तथा महाभयानक घोराकृतिसे प्रलयकालीन मेघके समान गरजकर कर्णके ऊपर भी वे टूट पड़े। उस समय उनकी विकट आकृतिको देखकर उभय पक्षकी सेनायें उन्हें अजीब दानव समझकर चीत्कार करती हुई रणस्थली छोड़कर भाग गयीं। इतनेमें भीमका मेघनाद सुनकर कर्णको बचानेके लिए कृपाचार्य भी सुसज्जित होकर भागती हुई सेनाओंको ललकारते हुए रणस्थलमें पहुँच गये। अर्जुन भी भीमकी पराजयकी शंकासे अपने रथको तेजीसे बढ़ाकर महारथी कर्णके ऊपर बाण बरसाने लगे। दोनों महारथियोंके विकट युद्धमें असंख्य योद्धाओंकी गर्दन कटकर पृथ्वीपर गिरने लगी। हाथी, घोड़े और रथचक्रकी धूलिसे समस्त रणस्थल इतना प्रच्छन्न हो गया कि योद्धा लोग बिना निशाना साधे ही एक दूसरेपर बाण बरसाने लगे। इतनेमें पिताकी पराजय सुनकर कर्णका पुत्र कुमार वीर वृषसेन भी रणस्थलमें आ पहुँचा। उसे देख अर्जुन ने कहा—'अरे रे, कुमार वृषसेन ! मेरे क्रुद्ध हो जानेपर तेरे पिता भी पलभर मेरे समक्ष नहीं टिक सकते फिर तेरा तो कहना ही क्या ? दूर हो जा बालक !' यह सुन उस बालकने मर्मच्छेदी विकराल बाणोंसे अर्जुनके वक्षःस्थलको बींध डाला। महारथी अर्जुन उस व्यथाको सह न सके। झट क्रोधावेशमें आकर कर्कश गांडीवकी प्रत्यञ्चा ( डोरी ) तानकर बालकके ऊपर असंख्य बाणोंकी वर्षा करने लगे। पर अर्जुनका एक भी बाण सफल नहीं हुआ। त्वरित ही