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विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

by गोस्वामी तुलसीदास

DevanagariAwadhipublished475 pages

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विनय-पत्रिका २३ २—'वामा'—शब्दका अर्थ कई टीकाकारोंने पार्वती किया है। पर अमर- कोशमें इस शब्दका अर्थ 'सामान्य स्त्री' पाया जाता है। पुराणोंमें यह शब्द दुर्गाके लिए प्रयुक्त हुआ है, पार्वतीके लिए नहीं। यथा:— वामं विरुद्धरूपन्तु विपरीतन्तु गीयते। वामेन सुखदा देवी वामा तेन मता बुधैः॥ इति देवीपुराणे ४५ अध्यायः। अथवा— या पुनः पूज्यमानातु देवादीनान्तु पूर्वतः। यज्ञभागं स्वयं धत्ते सा वामा तु प्रकीर्त्तिता॥ इति कालिका पुराणे ७७ अध्यायः। किन्तु आगेके पदमें गोस्वामीजीने पार्वतीकी स्तुति की है, इसलिए यह पद भी पार्वतीकी ही स्तुतिमें लिखा गया प्रतीत होता है। क्योंकि शिवकी स्तुतिके बाद किसी अन्य देवीकी स्तुति और उसके बाद पार्वतीकी स्तुति असंगत है। इस स्तुतिमें ग्रन्थकारने दुर्गा और पार्वतीमें अभेद सम्बन्ध माना है। ३—मार्कण्डेय और देवीपुराणमें चण्ड, मुण्ड, महिषासुर और शुम्भ- निःशुम्भ नामक प्रबल पराक्रमी दैत्योंकी कथा है। जब इनके अत्याचारोंसे तीनों लोक थर्रा उठा, तब सब देवताओंने तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेशने आद्या शक्ति भगवती महामायाकी स्तुति की। देवीने उक्त राक्षसोंका वध करके संसारमें शान्ति स्थापित की। राग रामकली ( १६ ) जय जय जगजननि देवि, सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि, मुक्ति-भुक्ति-दायिनि, भय-हरनि कालिका। मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि, पर्वसर्बरीस बदनि, ताप-तिमिर तरुन तरनि-किरन मालिका ॥१॥