यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअदिति की विशालता ४-५ ३४४ रात्रि और उषा देवी का वर्णन ६ ३४५ अग्नि और वायु की वंदना ७ ३४५ भारती देवी से यज्ञ की रक्षा की कामना ८ ३४५ त्वष्टा देव के लिए यज्ञ कामना ९ ३४५ वनस्पति देव से प्रार्थना १० ३४५ अग्रगामी अग्नि ११ ३४५ मेघ देव की महिमा १२ ३४६ इंद्र देव का रथ १३ ३४६ मेघ देव के तीन बंधन १४-१७ ३४६ वायु की स्तुति १८ ३४७ अर्वन् देव की स्तुति १९-२४ ३४७-३४८ अग्नि की स्तुति २५-२८ ३४८ कुशों का सुखासन २९ ३४८ दिव्य द्वार वाली देवियां ३० ३४९ दिव्य कार्य करने वाली देवियां ३१ ३४९ विराट् यज्ञ के दो दिव्य होता ३२ ३४९ तीन देवियों का आह्वान ३३ ३४९ त्वष्टा देव का पूजन ३४ ३४९ यजमानों से निवेदन ३५ ३४९ अग्नि की स्तुति ३६-३७ ३४९-३५० वीरों के लिए विजय कामना ३८-४६ ३५०-३५१ रक्षा के लिए देवों से प्रार्थना ४७ ३५१ बाणों से कल्याण कामना ४८ ३५१ चाबुक, रथ व दुंदुभि आदि युद्ध साधनों का वर्णन ४९-५७ ३५१-३५३ विभिन्न देवताओं से संबंध ५८-६० ३५३-३५४ तीसवां अध्याय सविता देव की स्तुति १-४ ३५५ चारों वर्णों के कर्तव्य ५ ३५५ उपयुक्त संबंधों की विवेचना ६-२२ ३५५-३६० इकतीसवां अध्याय परम पुरुष का वर्णन १-३ ३६१