भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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परम पुरुष के तीन पैर ४ ३६१ विराट् की उत्पत्ति ५-७ ३६१-३६२ पृथ्वी तथा अन्य जीवों की उत्पत्ति ८-१८ ३६२-३६३ प्रजापति की महिमा १९ ३६३-३६४ परम पुरुष से इच्छा पूर्ति करने का अनुरोध २०-२२ ३६४ बत्तीसवां अध्याय परम पुरुष का वर्णन १-६ ३६५-३६६ परम पुरुष की शक्ति ७ ३६६ परम पुरुष की व्यापकता एवं अमरता ८-१४ ३६६-३६७ बुद्धि की कामना १५ ३६७ ब्रह्मज्ञान की कामना १६ ३६७ तैंतीसवां अध्याय अग्नि की स्तुति और महिमा का गान १-१७ ३६८-३७० इंद्र देव का ध्यान १८ ३७१ यज्ञ रक्षक सूर्य की किरणें १९ ३७१ श्रेष्ठ कार्य हेतु देवों से अनुरोध २० ३७१ स्वर्ग और पृथ्वीलोकों के संरक्षक सोम २१ ३७१ इंद्र का गुणगान २२-३० ३७१-३७३ सर्व प्रकाशक सूर्य ३१ ३७३ भरणपोषण कर्ता वरुण ३२ ३७३ दिव्य अश्विनीकुमार ३३ ३७३ कल्याणकारी सविता ३४ ३७३ शत्रुनाशी इंद्र ३५ ३७३ सूर्य की महानता ३६-४४ ३७३-३७५ इंद्र, वायु, अग्नि व बृहस्पति आदि देवों का आह्वान ४५-५४ ३७५-३७६ वैभवशाली पुरोहित ५५ ३७६-३७७ इंद्र से सोमरस पीने का आग्रह ५६ ३७७ मित्र और वरुण का ध्यान ५७ ३७७ अश्विनीकुमारों से सोमपान का आग्रह ५८ ३७७ श्रेष्ठ वर्णीय मंत्रों से देवस्तुति ५९ ३७७ अग्नि का गुणगान ६०-६१ ३७७