भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 26

सोम के लिए यजमानों से संबोधन ६२ ३७८ इंद्र की स्तुति ६३-६७ ३७८ सुमति के लिए आदित्य से प्रार्थना ६८ ३७८-३७९ सविता देव से घरों की रक्षा की कामना ६९ ३७९ सोमरस के लिए पुरोहित से प्रार्थना ७०-७१ ३७९ यज्ञ की पूर्णता के लिए देवों से प्रार्थना ७२ ३७९ यज्ञ के लिए पुरोहितों का आह्वान ७३ ३७९ सोम की पवित्रता ७४ ३७९ यज्ञ के लिए अग्नि का वरण ७५ ३७९-३८० इंद्र की महिमा ७६-८३ ३८०-३८१ सविता देव की आराधना ८४ ३८१ वायु देव की आराधना ८५ ३८१ इंद्र का आह्वान ८६-८७ ३८१ अश्विनीकुमारों से आगमन का अनुरोध ८८-८९ ३८२ चमकदार सोम देव ९० ३८२ बुद्धि के देवता को हवि देना ९१ ३८२ वैश्वानर की वंदना ९२ ३८२ पैर रहित उषा देवी की गति ९३ ३८२ वैभव पाने के लिए देव वंदना ९४ ३८२-३८३ इंद्र आदि देवों की महिमा ९५-९७ ३८३ चौंतीसवां अध्याय कल्याणकारी संकल्पों की आधारशिला मन १-६ ३८४-३८५ इंद्र की स्तुति ७ ३८५ अनुमति देवी से प्रार्थना ८-९ ३८५ सिनीवाली देवी १० ३८५ पांच रूपों वाली सरस्वती ११ ३८५ प्रथम पूजनीय अग्नि की स्तुति १२-१५ ३८५-३८६ इंद्र की स्तुति १६-१९ ३८६-३८७ शत्रुजयी सोम का वर्णन २०-२३ ३८७-३८८ सविता देव की स्तुति २४-२५ ३८८ सूर्य देव की महिमा २६ ३८८ सविता देव के अनुकरण की कामना २७ ३८८ अश्विनीकुमारों से यज्ञस्थलों में पधारने की कामना २८-३० ३८८-३८९ सविता देव की प्रशंसा ३१ ३८९