भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 27

रात्रि देवी की प्रशंसा ३२ ३८९ उषा देवी की प्रशंसा ३३ ३८९ प्रातःकाल विभिन्न देवों का आह्वान ३४-३५ ३८९-३९० भग देव की स्तुति ३६ ३९० सूर्य देव की कृपा से धनवान होने की कामना ३७ ३९० भग देव का आह्वान ३८-३९ ३९० प्रभात वेला से कल्याण कामना ४० ३९० पूषा देव से बुद्धि को श्रेष्ठ कार्यों में लगाने की कामना ४१-४२ ३९१ विष्णु द्वारा विश्व धारण ४३-४४ ३९१ स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक ४५ ३९१ देवों से शत्रु पराजय की कामना ४६ ३९१ देवताओं सहित अश्विनीकुमारों से आने का अनुरोध ४७ ३९१-३९२ मरुद्गणों की स्तुति ४८ ३९२ दिव्य सृष्टि ४९ ३९२ स्वर्णमय धन ५०-५१ ३९२ चिरायु कामना से रक्षा बंधन ५२ ३९२ सभी देवों की स्तुति ५३-५४ ३९३ शरीर में विद्यमान सात प्राण व सात ऋषि ५५ ३९३ देवत्व धारण के लिए ब्रह्मणस्पति का आह्वान ५६ ३९३ मंत्रों में देवों का वास ५७ ३९३ संसार के नियंत्रक देवगण ५८ ३९४ पैंतीसवां अध्याय देवपुत्रों का लोक १-३ ३९५ पीपल और पलाश वृक्षों पर वास करने वाली ओषधियां ४ ३९५ सुखदायी पृथ्वी का आह्वान ५ ३९५ प्रजापति से जलधारा के लिए प्रार्थना ६ ३९५-३९६ मृत्यु का पथ ७ ३९६ सर्वकल्याणकारी कामना ८-१० ३९६ पापकर्मों को दूर हटाने का आग्रह ११ ३९६ जल एवं ओषधियों से मैत्री १२ ३९६-३९७ बछड़े का आह्वान १३ ३९७ प्रकाशमय स्वर्गलोक १४ ३९७ मर्यादा रूपी परिधि १५ ३९७