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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished421 pages

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उत्तरार्ध उनतालीसवां अध्याय लहू से उग्र देव को संतुष्ट करना चाहते हैं. श्रेष्ठ व्रतों से मित्र देव को प्रसन्न करना चाहते हैं. दुराचार दूर कर के उस संकल्प से रुद्र देव को प्रसन्न करना चाहते हैं. हम सदाचार से इंद्र देव को रिझाना चाहते हैं. बल से मरुद्गणों को प्रसन्न करना चाहते हैं. श्रेष्ठ कर्मों से साध्य देवों को प्रसन्न करना चाहते हैं. कंठ से भव देव को खुश रखना चाहते हैं. पार्श्व ( पीछे ) से रुद्र देव, उत्तम आचरण से महा देव, यकृत से शर्व देव व हम नाड़ी से पशुपति को प्रसन्न करना चाहते हैं. ( ९ ) लोमभ्यः स्वाहा लोमभ्यः स्वाहा त्वचे स्वाहा त्वचे स्वाहा लोहिताय स्वाहा लोहिताय स्वाहा मेदोभ्यः स्वाहा मेदोभ्यः स्वाहा. मा ꣳ सेभ्यः स्वाहा मा ꣳ सेभ्यः स्वाहा स्नावभ्यः स्वाहा स्नावभ्यः स्वाहास्थभ्यः स्वाहास्थभ्यः स्वाहा मज्जभ्यः स्वाहा मज्जभ्यः स्वाहा रेतसे स्वाहा. पायवे स्वाहा.. (१०) रोम के लिए स्वाहा. त्वचा के लिए स्वाहा. लहू के लिए स्वाहा. चरबी के लिए स्वाहा. मांस के लिए स्वाहा. नाड़ियों के लिए स्वाहा. हड्डियों के लिए स्वाहा. मज्जा के लिए स्वाहा. वीर्य के लिए स्वाहा. गुदा के लिए स्वाहा. ( १० ) आयासाय स्वाहा प्रायासाय स्वाहा संयासाय स्वाहा वियासाय स्वाहोद्यासाय स्वाहा. शुचे स्वाहा शोचते स्वाहा शोचमानाय स्वाहा शोकाय स्वाहा.. (११) आयास देव के लिए स्वाहा. प्रयास देव के लिए स्वाहा. संन्यास देव के लिए स्वाहा. वियास देव के लिए स्वाहा. उद्यास देव के लिए स्वाहा. शुच देव के लिए स्वाहा. शोच देव के लिए स्वाहा. शोचमान और शोक देव के लिए स्वाहा. ( ११ ) तपसे स्वाहा तप्यते स्वाहा तप्यमानाय स्वाहा तप्ताय स्वाहा घर्माय स्वाहा. निष्कृत्यै स्वाहा प्रायश्चित्यै स्वाहा भेषजाय स्वाहा.. (१२) तप के लिए स्वाहा. तप्यमान के लिए स्वाहा. तृप्त के लिए स्वाहा. धर्म के लिए स्वाहा. निष्कृति और प्रायश्चित्त के लिए स्वाहा. भेषज के लिए स्वाहा. ( १२ ) यमाय स्वाहान्तकाय स्वाहा मृत्यवे स्वाहा. ब्रह्मणे स्वाहा ब्रह्महत्यायै स्वाहा विश्वेभ्यो देवेभ्यः स्वाहा द्यावापृथिवीभ्या ꣳ स्वाहा.. (१३) यम देव के लिए स्वाहा. अंतक के लिए स्वाहा. मृत्यु के लिए स्वाहा. ब्राह्मण के लिए स्वाहा. ब्रह्महत्या की शांति के लिए स्वाहा. विश्वों के लिए स्वाहा. स्वर्गलोक के लिए स्वाहा. पृथ्वीलोक के लिए स्वाहा. ( १३ ) ४१६ - यजुर्वेद

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