१०८ उपनिषद् (ब्रह्मविद्या खण्ड - भाग १)
108 Upanishads Part 1 - Brahmavidya Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१० अथर्वशिर उपनिषद्
एक समय देवताओं ने स्वर्गलोक में जाकर रुद्र से पूछा- आप कौन हैं? रुद्र ने उत्तर दिया- मैं एक हूँ, भूतकाल हूँ, वर्तमान काल हूँ और भविष्यत्काल भी मैं ही हूँ। मेरे अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है। जो अन्तर के भी अन्तर में विद्यमान है, जो समस्त दिशाओं में सन्निविष्ट है, वह मैं ही हूँ। मैं ही नित्य और अनित्य, व्यक्त और अव्यक्त, ब्रह्म और अब्रह्म हूँ। मैं ही प्राची (पूर्व) और प्रतीची (पश्चिम), उत्तर और दक्षिण, ऊर्ध्व और अधः आदि दिशाएँ तथा विदिशाएँ हूँ। पुमान् (पुरुष), अपुमान् (अपुरुष) और स्त्री भी मैं ही हूँ। मैं ही गायत्री, सावित्री और सरस्वती हूँ। त्रिष्टुप्, जगती और अनुष्टुप् आदि छन्द भी मैं ही हूँ। मैं गार्हपत्य, दक्षिणाग्नि और आहवनीय अग्नि हूँ। मैं सत्य, गौ, गौरी, ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ हूँ। आपः और तेजस् भी मैं ही हूँ। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद भी मैं ही हूँ। अक्षर-क्षर, गोप्य (छिपाने योग्य) और गुह्य (छिपाया हुआ) भी मैं हूँ। अरण्य, पुष्कर (तीर्थ), पवित्र मैं हूँ। अग्र, मध्य, बाह्य और पुरस्ताद् (पूर्व) आदि दसों दिशाओं में अवस्थित और अनवस्थित ज्योतिरूप शक्ति मुझे ही मानना चाहिए और सब कुछ मुझमें ही व्याप्त जानना चाहिए। इस प्रकार जो मुझे जानता है, वह समस्त देवों और अङ्गों सहित समस्त वेदों को जानता है। मैं गौओं को गोत्व से, ब्राह्मणों को ब्राह्मणत्व से, हवि को हविष्य से, आयु को आयुष्य से, सत्य को सत्यता से, धर्म को धर्म तत्त्व से तृप्त करता हूँ। यह सुनकर देवगणों ने रुद्र को देखा और उनका ध्यान करने लगे। तत्पश्चात् भुजाएँ उठाकर इस प्रकार स्तुति की ॥ १ ॥ ॐ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च ब्रह्मा तस्मै वै नमो नमः ॥ १ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च विष्णुस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च स्कन्दस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ३ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्चेन्द्रस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ४ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्चाग्निस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ५ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च वायुस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ६ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च सूर्यस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ७ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च सोमस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ८ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्ये चाष्टौ ग्रहास्तस्मै वै नमो नमः ॥ ९ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्ये चाष्टौ प्रतिग्रहास्तस्मै वै नमो नमः ॥ १० ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च भूस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ११ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च भुवस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १२ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १३ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च महस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १४ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्या च पृथिवी तस्मै वै नमो नमः ॥ १५ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्चान्तरिक्षं तस्मै वै नमो नमः ॥ १६ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्या च द्यौस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १७ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्याश्चापस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १८ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च तेजस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १९ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्चाकाशं तस्मै वै नमो नमः ॥ २० ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च कालस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २१ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च यमस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २२ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यश्च मृत्युस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २३ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्चामृतं तस्मै वै नमो नमः ॥ २४ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च विश्वं तस्मै वै नमो नमः ॥ २५ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च स्थूलं तस्मै वै नमो नमः ॥ २६ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च सूक्ष्मं तस्मै वै नमो नमः ॥ २७ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च शुक्लं तस्मै वै नमो नमः ॥ २८ ॥ यो वै रुद्रः स भगवान्यच्च कृष्णं तस्मै वै नमो नमः ॥ २९ ॥ यो वै रुद्रः स