१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ
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१८४ ] [ षष्ठ अध्याय होता है। वह दस सहस्र प्रणव के जाप का तथा सहस्रों इतिहासों और पुराणों के पाठ तथा अध्ययन का फल प्राप्त कर लेता है। वह जहाँ तक देखता है, वहाँ तक की पंक्ति को पवित्र कर देता है। पहिले पीछे की सात-सात पीढ़ियां समाप्त हो जाती हैं। इसके जप द्वारा अमृतत्व प्राप्त होता है। यह उपनिषद् है—ऐसा हिरण्यगर्भ ब्रह्माजी का कथन है ॥ ८३ ॥ ॥ षष्ठ अध्याय समाप्त ॥ ❄ महोपनिषद् समाप्त ❄