भारतकोश
अध्यात्म रामायण

अध्यात्म रामायण

Adhyatma Ramayana

महर्षि वेदव्यास (टीकाकार: मुनीलाल) द्वारा

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श्रीरामचतुष्टय

यत्पादपङ्कजपरागसुरागयोगिवृन्दैर्जितं भवभयं जितकालचक्रैः।
यन्नामकीर्तनपरा जितदुःखशोका देवास्तमेव शरणं सततं प्रपद्ये॥
(अ० रा० बाल० ६। ७५)