ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
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Read in contextतीसरा अध्याय ] ३२५ पंक्ति में पाँच पद होते हैं। यज्ञ पंक्ति वाला है। पशु भी पंक्ति वाले हैं। पशु छन्दोम हैं। पशुओं की वृद्धि के लिये। आठवें दिन के रथन्तर पृष्ठ यह हैं :— अभित्वा शूर नो नुमो...... अभित्वा पूर्वपीतये...... धाय्या वही है......यद् वावान्...... ‘त्वामिद्धि हवामहे' इससे सबको मानि की ओर लौटाता है। क्रमानुसार यह बृहत् दिवस है। साम प्रगाथ यह है :— उभयं शृणवच्च न इन्द्रो अर्वागिदं वचः । सत्राच्या मघवा सोम पीतये धिया शविष्ठ आ गमत् ॥ तं हि स्वराजं वृषभं तमोजसे धिषणे निष्टतक्षतुः । उतोपमानां प्रथमो निषीदसि सोमकामं हि ते मनः ॥ ( ऋ० ८।६१।१-२ ) इनमें वह भी है जो आज है और वह भी जो कल था। यह बृहत् दिवस अर्थात् आठवें दिन का रूप है। तार्क्ष्य वही है अर्थात् त्यमूषु वाजिनम्......(३) १९—पाँच महद्वत् सूक्त यह हैं :— अपूर्व्या पुरुतमान्यस्मै...( ऋ० ६।३२ ) इसमें 'महेवीराय तवसे तुराय' में 'महद्' शब्द आया है। यह आठवें दिन का रूप है। तां सु ते कीर्तिं मघवन् महित्वा...( ऋ० १०।५४ ) इसमें भी 'महद्' है। यह भी आठवें दिन का रूप है। त्वं महां इंद्र यो ह शुष्मैः...( ऋ० १।६३ ) इसमें 'महद्' है यह भी आठवें दिन का रूप है। त्वं महां इंद्र तुभ्यं ह क्षा......( ऋ० ४।१७)