ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
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Read in context३४४ [पाँचवीं पञ्चिका मरुतों का। जिस पर फेन उठता है वह विश्वेदेवों का है। मलाई मित्र की है। जो गिर पड़े वह द्यावापृथिवी का है। जो उबल पड़े वह सविता का, जो ले लिया गया वह विष्णु का। जो वेदी पर रक्खा जाता है वह बृहस्पति का है। पहली आहुति अग्नि की। पिछली प्रजापति की। जो आहुति हो चुकी वह इंद्र की। इस प्रकार यह सब देवों का, सोलह कला वाला और पशुओं में प्रतिष्ठित अग्निहोत्र है। जो इस सब देवों वाले, सोलह कला वाले, पशुओं में प्रतिष्ठित अग्निहोत्र को जानता है वह सफल होता है। (१) २७-अगर एक अग्निहोत्री की गाय जो बछड़ा के साथ है दूध दुहने के समय बैठ जाय तो इसका क्या प्रायश्चित्त है ? तब यह मंत्र पढ़े :- "यस्माद्भीषा निषीदसि ततो नो अभयं कृधि। पशून्नः सर्वान् गोपाय नमो रुद्राय मीढुषे ।" "जिससे डर कर तू बैठती है उससे हम को अभय करो। हमारे सब पशुओं की रक्षा कर। दानी रुद्र के लिये नमस्कार हो।" इस मंत्र को पढ़कर उठावे :- 'उदस्थाद् देव्यदितिरायुर्यज्ञपतावधात् । इंद्राय कृण्वती भागं मित्राय वरुणाय च।" "देवी अदिति उठी। और यजमान को दीर्घ जीवन दिया। इन्द्र, मित्र और वरुण को भाग देती हुई।" या उसके थन और मुख पर जलपात्र रखकर उसको ब्राह्मण को दे देवे। यह दूसरा प्रायश्चित्त है। अगर किसी अग्निहोत्री की गाय जो बछड़े से युक्त है दुहते में चिल्ला पड़े तो क्या प्रायश्चित्त है ? यदि भूख से चिल्ला पड़े और यजमान को प्रकट करे कि उसको क्या जरूरत है तो