ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
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Read in context४७२ [ आठवीँ पञ्चिका लड़का ) पैदा हो जो हजारों दक्षिणाायें दे ।” ऐसी प्रार्थना करने वाले के बहुत सन्तान और पशु उत्पन्न होंगे । जिस क्षत्रिय के लिये पुरोहित लोग इस रहस्य को समझते हुये यज्ञ करते हैं उसकी प्रतिष्ठा होती है । लेकिन जो रहस्य को न समझकर क्षत्रिय के लिये इस प्रकार यज्ञ कराते हैं, वह उसको मार डालते हैं घसीटते हैं और धन छीन लेते हैं, जैसे अगर कोई बन में जाता हो तो चार डाकू उसको पकड़ लें, और खाई आदि में डालकर उसके धन को छीन लें । परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने जो इस रहस्य को समझता था कहा है, 'मेरे रहस्य समझने वाले ऋत्विजों ने मुझ रहस्य समझने वाले को यज्ञ कराया । इसलिये मैं विजयी हुआ । मैं लड़ने के उत्सुक शत्रु को शीघ्र ही जीतता हूँ । दैवी अथवा मानुषी तीर जो इस सेना से आयें मुझे न ही लग सकते । मैं पूर्ण आयु वाला हूँगा । मैं सब पृथ्वी का स्वामी होऊँगा । ' जो इस रहस्य को समझकर इस प्रकार यज्ञ करता है उसकी पूर्ण आयु होती है और वह सब भूमि का अधिपति होता है । (७) ऐतरेय ब्राह्मण की आठवीं पञ्चिका का दूसरा अध्याय समाप्त हुआ ।