अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६३ अकबर बीरबल विनोद प्राण बचाने के लिये एक नया उपाय निकाला। झट बच्चे को पानी में डुबाकर आप स्वयं उसके ऊपर खड़ी हो गई, इस प्रकार उसका मुँह पानी से ऊपर हो गया। बीरबल ने बादशाह को उसे दिखला कर बागवान को पानी रोकने की आज्ञा दी। पानी आना तुरत बन्द हो गया और बँदरिया बच्चे सहित सजीव बाहर निकाल ली गई। बीरबल ने कहा-"पृथिवी नाथ ! आपने प्रत्यक्ष देखा है कि जब तक प्राण बचने की आशा थी तब तक बंदरिया बच्चे का प्राण बचाने की बराबर यत्न करती रही, परन्तु जब उसके ही प्राणों पर आफत आई तो वह बच्चे की जीवन-रक्षा भूल गई, बल्कि स्वयं उसके जान की गाहक होकर अपना प्राण बचाया। बादशाह दरबारियों सहित बीरबल के बुद्धि की श्रेष्ठता स्वीकार कर ली। ━o*o━ मिश्री के डेली का हीरा। एक दिन रात्रि समय बीरबल किसी कार्यवश नगर से बाहर दूसरे ग्राम को जा रहा था, थोड़ी दूर जाने के बाद उसे एक झोपड़ा दिखाई पड़ा। उस झोपड़े से किसी के रोने की आवाज आ रही थी। अर्धरात्रि के समय फूट २ कर रोने का शब्द सुन बीरबल से न रहा गया। वह झोपड़े के पास जा पहुँचा। दरवाजा बन्द था, बीरबल ने आवाज देकर कई बार पुकारा-"भाई ! अभी इस झोपड़े में कौन आदमी रो रहा था ? उस झोपड़े से एक बुड्ढा मनुष्य बाहर निकला और