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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

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अकबर बीरबल विनोद १२० गया। बादशाह हज्जाम को देख कर अति प्रसन्न हुआ और उस नौकर से पूछा-"यह राय तुझे किसने दी।" नौकर ने कहा-"पृथ्वीनाथ ! जब मेरी समझ में आपकी बात न आई तो मैं बड़ा परेशान हुआ अन्त में हारकर बीरबल के पास जाकर सारा किस्सा कह सुनाया। बीरबल ने कहा-"बादशाह हज्जाम को बुला रहे हैं।" सो मैं उन्हीं की सलाह से इस हज्जाम को ले आया हूँ।" बादशाह बीरबल की कुशाग्र बुद्धि से बड़ा सन्तुष्ट हुआ।

रूपचन्द फूलचन्द जौहरी दिल्ली शहर में कपूर चन्द जौहरी के दो पुत्र थे। बड़े का नाम रूपचन्द और छोटे का फूलचन्द जौहरी था। मरते समय कपूरचन्द काफी धन अपने दोनों लड़कों के लिये छोड़ गया था। बाप के क्रिया कर्म के पश्चात जो कुछ धन बच रहा उससे दोनों भाइयों ने कई वर्षों तक गुलछर्रे उड़ाये। आखिरकार उनकी नासमझी से सारा धन खर्च हो गया। तब इनको धनोपार्जन की चिन्ता हुई। जब दिल्ली में रहकर धनोपार्जन की इन्हें कोई तरकीब न सूझी तो परदेश जाने का ठहराया और गृहस्थी के निर्वाहार्थ दो तीन वर्षों के लिये सब सामग्री एकत्रित कर बाहर के लिये रवाना हुए। जब कुछ दूर निकल गये तो इन लोगों ने दिहातों से सामान खरीदना और अगले दिहातों में बेचना प्रारम्भ किया। इसतरह खरीद फरोक्त करते हुये बहुत दूर निकल गये, रास्ते