अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
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उसकी युक्ति से बादशाह भी सहमत हो गया और उसे तत्क्षण कार्यान्वित करने के लिये बीरबल को आज्ञा दी। बीरबल का कार्यारम्भ हुआ। वह बहुतेरे वैद्यहकीमों को बुलावा भेजा, जब वे आये तो उन से पूछा-“आपको जड़ी बूटियों का हाल भलीभाँति मालूम है— यदि न भी मालूम हो तो एक हफ्ते में छानबीन कर बतलावें कि आशापल्लव की पत्तियाँ और उसकी जड़ किन-किन दवाओं में काम आती है?” बीरबल की आज्ञा मानकर सब वैद्य लौट गये और घर पहुँचकर उसके अनुसन्धान में यथासक्य कोशिश करने लगे। जब सप्ताह का अन्तिम दिन आया तो अपनी-अपनी सम्मति देने के लिये दर्बार में उपस्थित हुए। सभी ने अपनी खोज का पृथक २ वर्णन किया; परन्तु बीरबल के मतलब की बात किसीने नहीं बतलाई। तब उनमें से एक सर्वश्रेष्ठ वैद्य बोला-“दीवानजी! आपकी आज्ञानुसार मैंने भी अपने भरसक अनुसन्धान किया है। बड़ी खोजबीन के पश्चात् मुझे निघण्टु से एक बात मिली है। सुश्रुत और निघण्टु में लिखा है कि आशापल्लव के पत्ते का चूर्ण बना कर देने से पीलिया रोग वाले को तत्काल आरोग्य-लाभ होता है और जलन्धर वाले रोगी को इसकी जड़ की धूनी देने से जलन्धर का रोग जड़ से जाता रहता है।” बीरबल ने पूछा-“क्या आप बतला सकते हैं कि इस महीने के अन्तर्गत कितने लोग जलन्धर के रोग से ग्रसित हुए थे और उससे बचने के लिये उन रोगियों ने किन-किन