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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

by पारम्परिक लोक संग्रह

Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)

DevanagariHindipublished292 pages

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२५ अकबर बीरबल विनोद

तब उसने एक नई सूझ निकाली। बीरबल उन दोनों सौदा- गरों को एक जगह खड़ा कराकर एक जल्लाद को नंगी तलवार लिये हुए बुलवाया। जब वह आकर हाजिर हुआ तो बीरबल उससे बोला-“क्या देखता है “गुलाम को अभी मार डाल।” बीरबल के मुख से इतना शब्द निकलते ही जल्लाद तलवार लेकर झपटा। उसका झपटना था कि नगर व्यापारी यानी नकली शेरअली अलग हट गया। बीरबल उसकी ऐसी हरकत देखकर तुरत ताड़ गया कि असल में यही गुलाम है। उसने उसकी कलाई पकड़ ली। नकली शेरअली ने भी अपना गुलाम होना स्वीकार कर लिया और वह तुरन्त कैद कर लिया गया। अनन्तर दरबारियों के पूछने पर उसने कहा-“असल में मैं ही अपने इस ईरानी मालिक असली शेरअली का गुलाम था। मेरी आदत धीरे धीरे बिगड़ने लगी, मैं हमेशा इसे हटाने की ताक में था जब मेरा मालिक मुझे दूकान पर अकेला छोड़कर बाहर चला गया तो मेरी नीयत बिगड़ी और उसका बहुत सा माल लेकर वहाँ से भाग निकला। घूमते फिरते यहाँ पहुँचा और उस चोरी के रुपयों से व्यापार करने लगा। चूंकि इस काम को मैंने अपने मालिक के यहाँ ही सीख लिया था इस कारण व्यापार चलाने में मुझे कोई दिक्कत न पड़ी और मेरा काम धड़ल्ले से चलने लगा। अब मैं असली शेरअली के नाम से विख्यात हो गया हूँ। इतने दिनोंके परिश्रम से जो मैंने भारत- वर्ष में अपना नाम प्रख्यात किया था सो आज दैव के प्रकोप से मिट्टी में मिल गया। अब मुझसे गुलामी करते नहीं