अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ॥ ) राजा बीरबल को अकबर की आँखों से गिराने का कई बार उनके प्रतिद्वन्द्वियों ने प्रयत्न किया पर वे अपने कौशल से षड्यन्त्रकारियों को नीचा ही दिखाते रहे। बीरबल की हाजिरजवाबी ऐसी थी जिससे अकबर को भी सिर नीचा कर लेना पड़ता था। बीरबल को अकबर बहुत मानता था। स्वात और बाजोर के युद्ध में बीरबल के मारे जाने पर अकबर को घोर दुःख हुआ। कई रोज तक वह एकान्त में बैठकर रोया किया। अकबर को यदि बीरबल-सा साथी न मिला होता तो उसका जीवन नीरस हो जाता। हमारे इस संग्रहमें बीरबल और अकबर के वे ही मजाक संग्रहीत हैं जो अधिक प्रचलित हैं और हास्यरस से भरे हुए हैं। आशा है कि इसके पाठकों को इससे कुछ मनोरंजन विशेष होगा। यदि ऐसा हुआ तो हम अपना श्रम सफल समझेंगे। हमने इसे कई प्रचलित प्रकाशित पुस्तकों से संग्रह किया है। सम्भव है कि हमारी संग्रहीत भाषा में अनेक अक्षम्य अशुद्धियाँ हों अतएव पाठकवृन्द उन अशुद्धियों पर विशेष दृष्टि निक्षेप न करके हमारे प्रयास पर ही ध्यान देंगे और उन्हें सुधार कर ही पठन पाठन करेंगे। विनीत-- लेखक