BharatKosha
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

by पारम्परिक लोक संग्रह

Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)

DevanagariHindipublished292 pages

Page 74 of 292

Read in context
Page 74

अकबर बीरबल विनोद ६० आपकी मरजी के मुवाफिक अधर महल में काम लगवा दिया है, इस समय उसमें बहुतेरे पेशराज और मिस्त्री काम कर रहे हैं, आप चलकर मुवाइना कर लें।" बादशाह महल देखने की इच्छा से बीरबल के साथ हो लिया। जब बीरबल दीवान खाने के पास पहुँचा तो उसका किवाड़ खोलवा दिया। तोते बाहर निकल कर आकाश में उड़ते हुये बोलने लगे—"ईंटा लाओ, चूना लावो, किवाड़ लाभो, चौखट तय्यार करो, दीवार चुनो।" इस प्रकार आकाश में तोतों ने खूब शोर गुल मचाया। तब बादशाह ने बीरबल से पूछा—"क्यों बीरबल! ये तोते क्या कह रहे हैं?" बीरबल अदब के साथ उत्तर दिया—"हुजूर आपका अधर महल तय्यार हो रहा है, उसमें पेशराज और बढ़ई लोग लगे हुये हैं। सब सामान एकत्रित हो जाने पर महल बनना शुरू होगा।" बीरबल की इस बुद्धिमानी पर बादशाह हर्षित हुआ और उसको बहुत सा धन देकर बिदाकिया। सेर भर मांस दिल्ली शहर में दीनदयाल नामी एक पुराना व्योपारी रहता था। उसका कारोबार बहुत बड़ा था जिस कारण उसकी ख्याति दूर देशों तक पहुँचती थी। एक समय उसको कई हुण्डियाँ एक साथ सकरनी पड़ीं और उसके पास रुपया आने में तीन चार दिनों की देर थी। जो कुछ पास था उससे रोकड़ मिलाने पर पाँच लाख रुपये की