श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
DevanagariHindipublished811 पृष्ठ
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| १४ | विषयानुक्रमणिका | ||
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
| विदाहोत्सवमें आये हुए अभ्यागतोंको विदाई, रामदासका विष्णुदासको कुशके विषयमें गुप्त भविष्यकी बातें बतलाना | ३६२ | का विह्वल होना और नारदका सब हाल बतलाना, यूपकेतुका अपने मोहनशस्त्रसे सब राजाओंको मोहित करके मदनसुन्दरीको वरना | ३७५ |
| पञ्चम सर्ग | यूपकेतुका सब राजाओंके साथ युद्ध | ३७६ | |
| सीता तथा भ्राताओंके साथ रामका वनमें अगस्त्यके आश्रमपर जाना | ३६३ | यूपकेतुका खड्ग उठाकर अपने श्वशुर कम्बुकण्ठको मारनेके लिए उद्यत होना और मदनसुन्दरीकी प्रार्थनासे छोड़ देना, अन्तमें शम्भुसे यूपकेतुका साक्षात्कार और वहांसे लौटकर फिर क्रान्तिपुरीको जाना | ३७७ |
| अगस्त्य ऋषि द्वारा रामका सत्कार और वनमें रामको पांच अप्सराओंका मिलना | ३६४ | नवम सर्ग | |
| अगस्त्यसे उन अप्सराओंके विषयमें रामका प्रश्न और उनका उत्तर, रामके बाण मारनेके लिए उद्यत होनेपर जलदेवियोंका प्रकट होना और बारह कन्यायें रामको अर्पित करना | ३६५ | दूतके मुखसे यूपकेतुका सब समाचार ज्ञात होनेपर रामका क्रान्तिपुरीके लिए प्रस्थान, क्रान्तिपुरीमें बाह्यपूर्वक रामका पहुंचना | ३७८ |
| षष्ठ सर्ग | वहीं यूपकेतुका विवाह होना, भगवान्की स्तुति करके नारदका प्रस्थान, विवाहकाण्डका श्रवणफल | ३७९ | |
| बहुतसे गंधर्व और पन्नगोंका आना और रामकी स्तुति करना, अपने तथा लक्ष्मण आदिके पुत्रोंकी कुछ भविष्यकी बातें अगस्त्य ऋषिसे रामको मालूम होना | ३६६ | विवाहकाण्डके अनुष्ठानकी विधि | ३८० |
| गंधर्वोंको अयोध्या आनेकी आज्ञा देकर रामका अपनी पुरीको वापस लौटना | ३६७ | राज्यकाण्ड (पूर्वार्द्ध) | |
| अयोध्यामें पहुंचकर उन कन्याओंको वशिष्ठके यहां रखना, गंधर्वो और नागोंका अयोध्यापुरीमें पहुंचना तथा विवाहके मुहूर्तका निश्चित होना | ३६८ | प्रथम सर्ग | |
| सप्तम सर्ग | रामसहस्रनामके विषयमें विष्णुदासका प्रश्न और रामदासका उत्तर | ३८१ | |
| सब कन्याओंके साथ राम आदिके पुत्रोंके विवाहकी तैयारी | ३६९ | सनत्कुमार और गणेशका वार्तालाप | ३८२ |
| मन्दोदरी नामकी कन्याके संग लवका विवाह, अन्य कन्याओंके सङ्ग अन्य पुत्रोंका विवाह, राम आदिके आनन्दका वर्णन | ३७१ | राम सहस्रनाम | ३८३ |
| अष्टम सर्ग | रामसहस्रनामका माहात्म्य | ३९१ | |
| रामके पास कम्बुकण्ठ नामक राजाका पत्र आना, कम्बुकण्ठकी कन्या मदनसुन्दरीके पास नारदजीका पहुंचना | ३७३ | द्वितीय सर्ग | |
| मदनसुन्दरीका नारदजीसे रामचन्द्रजीको पति बनानेका उपाय पूछना और नारदका उसे उपाय बताना | ३७३ | कल्पवृक्षके विषयमें रामदास-विष्णुदासका प्रश्नोत्तर | ३९२ |
| नारदका अयोध्या पहुंचना और उनके मुखसे सब हाल सुनकर यूपकेतुका क्रान्तिपुरीको चल देना | ३७४ | रामके पास साठ हजार शिष्योंके साथ दुर्वासाका आगमन और सबके लिए भोजन तथा पूजनके लिए ऐसे फूल माँगना, जिन्हें संसारमें किसीने न देखा हो | ३९३ |
| यूपकेतुको न देखकर परिवार समेत राम- | रामका पत्रके साथ एक बाण इन्द्रके पास भेजना और इन्द्रका कल्पवृक्ष तथा पारिजात स्वयं लाकर अयोध्यामें रामको देना | ३९४ | |
| सीताका कल्पवृक्षकी स्तुति करके उसके द्वारा प्राप्त सामग्रीसे शिष्यों समेत दुर्वासाको भोजन कराना | ३९५ | ||
| भोजनके बाद प्रसन्न दुर्वासाका रामसे स्तुति करके प्रस्थान | ३९६ |