श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात
Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)
DevanagariHindipublished811 pages
Page 14 of 811
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१८ | विषयानुक्रमणिका
| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| लवका गुरु वसिष्ठसे पोथियोंके प्रत्येक पन्नेमें एक ओर था तथा दूसरी ओर राम लिखनेका कारण पूछना और उनका बताना | ५२७ | सूर्यका यमको ले जाकर रामसे क्षमा मँगवाना | ५४६ |
| रामका एक दासको वरदान देना, रामका एक ही समय दो रूप धारण करके विश्वामित्र और वाल्मीकिके यहां जाना | ५२८ | रामका अपने राज्यभरमें धार्मिक आदेश | ५४७ |
| राज्यकाण्डके पारायणका माहात्म्य | ५५१ | ||
| बाईसवाँ सर्ग | मनोहरकाण्ड | ||
| राजा मूरिखेलीके यहाँसे बहुतेरा भोगका आना और बिना रामको अर्पण किये सीताका उसमेंसे एक फूल सूंघ लेना | ५३१ | प्रथम सर्ग | |
| एकादशीके रोज़ सीताके साड़ीसे फँस-कर एक तुलसीका पत्र टूटना और उसी समय नारदका आ पहुंचना | ५३२ | रामदाससे विष्णुदासका नारदकथित रामायण (रघुरामायण) का सार पूछना | ५५३ |
| भोजन परोसनेपर नारदका सीताके संस्पृष्ट भोजन करनेसे इन्कार करना और रामके पूछने पर कारण बताना | ५३३ | द्वितीय सर्ग | |
| सीताका टूटा तुलसीपत्र टहनीमें जोड़नेके प्रयासमें विफल होना | ५३४ | अयोध्यावासियोंका रामसे कुछ उपदेश देनेके लिए प्रार्थना करना | ५६० |
| नारदकी बतायी युक्तिसे फिर सीताका प्रयास करना और तुलसीपत्रका जुड़ जाना | ५३५ | रात्रिके समय दूतोंका प्रजामनोंको उपदेश | ५६१ |
| नारदकृत रामस्तुति | ५३६ | प्रातःकाल पुनः पुरवासियोंका रामसे वार्तालाप | ५६२ |
| तेईसवाँ सर्ग | एक दिन स्त्रियोंका रामसे उपदेश देनेकी प्रार्थना करना और रामका स्त्रियोंको श्रेष्ठोंसे उपदेश दिलवाना | ५६४ | |
| आनन्दरामायणका पाठ करनेसे एक साधारण सिपाहीका राजमन्त्री हो जाना | ५३८ | श्रेष्ठोंसे प्राप्त ज्ञानके विषयमें रामका कैकेयीसे प्रश्न | ५६१ |
| उसका अभ्युदय देखकर सब सिपाहियोंका आनन्दरामायणके आराधनामें लग जाना, सिपाहियोंके अनाहसे घबड़ाकर सब राजाओंका रामके पास जाना | ५३९ | सुमित्राको रामका ज्ञानापदेश | ५६६ |
| आनन्दरामायणके श्रवणसे यमपुरका सूना होना और यमराजका ब्रह्मा-शिव आदि देवताओंके साथ अयोध्या आना | ५४० | माता कौसल्याको रामका शोक नकरने और आत्मज्ञानका उपदेश दिलाना | ५६८ |
| उनकी दुर्दशाको सुनकर रामका आनन्द-रामायणपर प्रतिबन्ध लगाना | ५४१ | कालान्तरमें कौसल्या-सुमित्रा आदिका देहत्याग | ५६९ |
| चौबीसवाँ सर्ग | तृतीय सर्ग | ||
| रामका मृत सुमन्त्रको यमदूतोंसे छीनकर वापस लाना | ५४३ | विष्णुदासका रामदाससे रामकी मानसी पूजा-विधि पूछना | ५७० |
| सुमन्त्रकी जन्मकालीन गाथा | ५४४ | रामदासका उत्तर और गुरुके लक्षण बतलाना | ५७१ |
| कुपित यमराजकी अयोध्यापर चढ़ाई | ५४४ | विभिन्नसंख्य अक्षरोंवाले राममन्त्र | ५७२ |
| लव और यमराजमें भयानक युद्ध, लवके ब्रह्मास्त्रकी मारसे यमराजकी घबराहट और सूर्य भगवान्का आकर लवको समझाना | ५४५ | मानसी पूजाका विधि-विधान | ५७३ |
| नमस्काराष्टकमन्त्र | ५७५ | ||
| बहिःपूजाविधान | ५७७ | ||
| मञ्चपुष्पांजलिके विषयमें विष्णुदास-रामदासका प्रश्नोत्तर और चन्द्र-महिचन्द्र आदि नौ भक्तोंकी कथा | ५८३ | ||
| उन नवों भक्तोंका कठोर तप करना और उन्हें रामका प्रत्यक्ष दर्शन मिलना | ५८३ | ||
| उन नवों भक्तोंको रामका वरदान | ५८४ | ||
| चतुर्थ सर्ग | |||
| अहोबिलके रामशिलातीर्थादिके विषयमें विष्णुदासका रामदाससे प्रश्न और उसका उत्तर | ५८५ | ||
| रामदासका विष्णुदासको आध्यात्मिक उपदेश | ५८९ |