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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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विषयानुक्रमणिका१७
विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
उद्धारके समयका निर्देश४७४कंकण देना उस कंकणकी प्राप्तिके विषयमें अगस्त्यसे लवका प्रश्न और उन मुनिका उत्तर५००
जय-विजयके अगले जन्मकी कथा, ब्रह्मा- की स्तुतिसे रामका प्रसन्न होना, महर्षि वाल्मीकिका रामसे कुछ प्रश्न४७५एक स्वर्गीय प्राणीको मरे हुए मुर्देका मांस खाते देखकर अगस्त्यका विस्मित होना, उससे कारण पूछना और उसका बतलाना५००
वाल्मीकिका अपने पूर्वजन्मका वृत्तान्त बताना, तस्करवृत्तिपरायण वाल्मीकिका एक विप्रका दण्ड-कमण्डल तथा जूते आदि छीनना बादमें तपती रेतपर चलते हुए ब्राह्मणको दुखी देखकर दयावश जूते लौटा देना४७६दण्डकारण्यके विषयमें महर्षि अगस्त्यसे लवका प्रश्न और ऋषिका उत्तर५०१
वाल्मीकिका शङ्ख विप्रसे अपने पूर्वजन्मका हाल पूछना४७७दण्डकारण्यकी कथा, राजा दण्डकका भृगुकी कन्याके साथ बलात्कार और राजाको भृगुका शाप५०२
शङ्खका वाल्मीकिके पूर्वजन्मका वृत्तान्त बताना, प्रेतपालक वाल्मीकिकी स्त्रीकी सेवा और आश्वासन४७८अष्टादश सर्ग<br>रामभद्रकी रचनाविधि५०३
वाल्मीकिका देहान्त और उनकी स्त्रीका सती होना४७९विश्वम्भरनामक रामनाथपुरके ब्राह्मणोंको राममुद्रा युक्त शिला दिखनेका कारण पूछना और रामदासका उत्तर५०४
उनके अगले जन्ममें कृश नामके ऋषि- का यहां एक क्षत्रिणीका आना और उपन वाल्मीकिका जन्म किरातों द्वारा पालित होनेके कारण वाल्मीकिका व्याधवृत्ति स्वीकार करना४८०बहुत समय बाद एक दुष्ट राजा द्वारा सताये जानेपर उन ब्राह्मणों द्वारा वह शिला एक सरोवरमें फेंकना५०७
वाल्मीकिको सप्तर्षियोंका उपदेश४८१उस सरोवरको बाढ़से हनुमान्जीका उन ब्राह्मणोंकी रक्षा करना और राममुद्रांकित शिलाको सरोवरसे निकालना५०८
उनके उपदेशसे वाल्मीकिका 'मरा-मरा' यह मन्त्र जपते हुए कठोर तप करना और बहुत वर्षों बाद सप्तर्षियोंका फिर वहाँ आना और उन्हें बाँबीसे बाहर निकालना, वाल्मीकिके मुखसे श्लोकका जन्म४८२वह शिला दिखाकर हनुमान्जीका उस दुष्ट राज को शूलीपर चढ़ाना और ब्राह्मणोंको आश्वासन देना५०९
अकारादि क्रमसे रामनामकी महिमा४८३एकोनविंश सर्ग<br>रामकी दिनचर्या५१०
पञ्चदश सर्ग<br>रामराज्यकी विशेषतायें४८५वैद्य और ज्योतिषीसे रामका वार्तालाप५११
षोडश सर्ग<br>रामका लव-कुश आदि पुत्रों तथा भरत-लक्ष्मण आदि भ्राताओंको राजनीतिक उपदेश४९०रामकी सभा और उसकी शोभा५१२
सप्तदश सर्ग<br>कुशकी पुत्री हेमाका स्वयंवर४९६कुशकी उत्पत्तिके बाद सीताके वनमें न रहनेका कारण५१६
चित्रांगद द्वारा हेमाका अपहरण और उसके साथ लव कुश आदिका भीषण युद्ध४९७बीसवाँ सर्ग<br>लवका वसिष्ठसे रात्रिमें सोते समय कानमें बाँसुरीके समान होनेवाले शब्दका कारण पूछना और वसिष्ठका उत्तर देना५१८
उस युद्धमें कुशका विजयी होना और प्रसन्न होकर रामका उन्हें एक कंकण देना उस कंकण की प्राप्तिके विषयमें कुशका महर्षि अगस्त्यसे प्रश्न और उनका उत्तर४९८रामका रामावतारको श्रेष्ठ बतलाना५१९
हनुमान्जीका मुद्गल ऋषिके आश्रमसे संजीवनी बूटी लाकर लवकी मूर्छा दूर करना४९९मत्स्य, कूर्म, वाराह नृसिंह, वामन, परशुराम, कृष्ण, बौद्ध तथा कल्कि अवतारके दोषोंका वर्णन५२०
लवको भी रामका एक अगस्त्यप्रदत्तराम के रामावतारके गुणोंका वर्णन५२२
इक्कीसवाँ सर्ग<br>संतोषानके समय सीताका दर्शन करनेके लिए बहुतेरी स्त्रियोंका आना५२५
रामका पूर्वकालके कार्योंका सिंहावलोकन५२६